यह टिड्डी (लोकस्ट) के दुश्मन एवं किसानों के दोस्त होते हैं। 1958 से 1962 के बीच चीन की सरकार ने “फोर पेस्ट्स कैंपेन” के जरिए गौरैया का विनाश रचाया था। इसका नतीजा यह रहा कि टिड्डियों की संख्या असामान्य मात्रा में बढ़ गई और यह विश्व के सबसे भयानक अकाल का कारण बन गया। यह एक सबक है जो हमें वर्तमान में याद रखना चाहिए।
पिछले कई सालों से प्रदूषण के कारण गौरैया की संख्या का शहरी इलाकों में तेजी से घटन हुआ है। कर्नाटक में यह एक चिंता का विषय बनता जा रहा है।
इस कारण से कीटनाशक दवाइयों का उपयोग कृषि पारिस्थितिकी के लिए हानिकारक होता है। केमिकल उर्वरक और अत्यधिक मात्रा में इमारतों का निर्माण इन पक्षियों के रहने की जगहों को नष्ट कर रहे हैं। मानव और किसान होने का उचित उत्तरदायित्व संभालते हुए और मित्र का कर्तव्य निभाते हुए, हमें कृषिकरण के दृष्टिकोण में सही परिवर्तन लाने चाहिए।
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