कांग्रेस भी नहीं पीछे
यही नहीं, सीएम शिवराज सिंह के पीड़ित दशमत रावत का सम्मान करने के बाद कांग्रेस जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह पीड़ित के घर पहुंचे। जहां उन्होंने पहले गंगाजल छिड़कर दशमत रावत का शुद्धिकरण किया। फिर उनका गंगाजल से मुंह धोया और एक गमछे से मुंह और सिर को साफ भी किया। आखिर में ज्ञान सिंह ने पीड़ित को टीका लगाया।
क्या बीजेपी के लिए खतरे की घंटी?
इस घटना से जहां लोग आक्रोशित हैं, तो वहीं बीजेपी के लिए ये मामला चिंता का विषय बना हुआ है और हो भी क्यों न। दरअसल, एमपी में आदिवासी समाज की आबादी 21 प्रतिशत है और विधानसभा की 47 सुरक्षित सीटें आदिवासियों के लिए है। ऐसे में आंकड़ों के फेर को समझें तो नजर आता है कि जो बीजेपी आदिवासियों के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में थी, अब उसको कहीं न कहीं चोट पड़ती हुई नजर आ रही है।
कांग्रेस को भी है आस
बात अगर कांग्रेस की करें, तो वो इस मुद्दे को बिल्कुल सस्ते में छोड़ने के मूड में नहीं है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि वो जानती है कि राज्य में 47 सुरक्षित आदिवासी सीट हैं और मौजूदा समय में इसमें से 30 उनके पास है और बीजेपी के पास 16 सीट हैं। ऐसे में कांग्रेस इन कुल सीटों पर इस मुद्दे के जरिए अपना परचम लहराना चाहती है।
शिवपुरी से भी आया ऐसा ही मामला
वहीं, एक मामला शिवपुरी जिले से समाने आया, जहां पर दो युवकों के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया। आरोप है कि कुछ दिन पहले दो दलित युवकों को पहले तो चप्पलों की माला पहनाई गई और फिर उन्हें मल खिलाकर उनका जुलूस निकाला गया। इस मामले में पुलिस 7 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और आरोपियों के घर पर बुलडोजर चला दिया गया है।
ऐसे में सवाल ये नहीं कि चुनाव के दौरान राज्य के मुख्या या अन्य नेता उस आदिवासी के पैर क्यों धो रहे हैं? बल्कि, इसे प्रतीक के तौर पर ठीक माना जा सकता है। सरकार ऐसे लोगों का सम्मान करती है, तो इससे पता चलता है कि सरकार आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति के बारे में भी विचारनीय है। पर राजनीति से इतर सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हो गया है कि समाज का नौतिक और चारित्रिक पतन इतना हो गया है? हमारे घर के संस्कार, परिवार द्वारा दी गई अच्छी सीख की क्या गति हो गई है? क्या वे इतने रसातल में पहुंच गए हैं?
वहीं, सवाल ये भी उठता है कि संस्कृति, धर्म, परिवार और नैतिक मूल की दुहाई देने वाली एक बड़ी पार्टी, जिसका राजनैतिक परिवेश या कहें कि सामाजिक परिवेश आरएसएस जैसे संगठन से जुड़कर के आता है तो फिर ऐसी कौन से संस्कारों की कमी रह गई कि एक मनुष्य दूसरे मनुष्य पर अपनी विष्ठा और मल का त्याग कर रहा है। आखिर वो इस मनोस्थिति तक कैसे पहुंचा या उसकी सोच इस घटिया स्तर पर कैसे पहुंची?
जाहिर है कि शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित व्यक्ति का सम्मान किया और बताया कि उनकी अंतर आत्मा कितनी दुखी है और इसे स्वीकार भी कर लिया जाए और दुखी होना जायजा भी बनता है और उन्होंने एक अच्छा काम किया। पर सवाल ये है कि भविष्य में इस तरह के कृत्य न हो, इसको लेकर क्या स्थिति है? इस घटना का वीडियो तो सामने आ गया था। यदि वीडियो नहीं आता तो इसके पीछे का काला सच हमें नहीं नजर आता?
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