शीला दीक्षित से मनोज तिवारी की मुलाकात
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कांग्रेस का लंबा और पुराना अध्याय थीं शीला दीक्षित
बहरहाल, विकास की भविष्योन्मुखी सोच, नेहरु-गांधी विचारधारा की समर्थक, सांसद, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और उससे आगे आम लोगों के दिलों पर राज करने वाली शीला दीक्षित का राजनीतिक करियर एक लंबा अध्याय था।
शीला दीक्षित साल 1998 से 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। उनके नेतृत्व में लगातार तीन बार कांग्रेस ने दिल्ली में सरकार बनाई। वह सबसे लंबे समय (15 साल) तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं।
कांग्रेस की कद्दावर नेता शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। उन्होंने दिल्ली के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से पढ़ाई की और फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस कॉलेज से मास्टर्स ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की। शीला दीक्षित साल 1984 से 1989 तक उत्तर प्रदेश के कन्नौज से भी सांसद रहीं। बतौर सांसद वह लोकसभा की एस्टिमेट्स कमिटी का हिस्सा भी रहीं।
शीला ने महिलाओं के लिए भी अलग तरह से काम किया।
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शीला दीक्षित ने महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग में 5 साल (1984-1989) तक भारत का प्रतिनिधित्व किया। वे प्रधानमंत्री कार्यालय में 1986 से 1989 तक संसदीय कार्यराज्यमंत्री रहीं।
अनूठी सांगठनिक क्षमता थीं शीला दीक्षित के पास
आज जिस स्थिति में कांग्रेस है वहां शीला दीक्षित जैसे राजनेता पार्टी के मार्गदर्शक के साथ-साथ संगठन के विवेक के रूप में मौजूद रहे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बेहद करीब मानी जाने वाली शीला दीक्षित का विरोधियों और विपक्षी नेताओं के साथ व्यवहार भी हमेशा चर्चा में रहा।
हाल ही में भाजपा सांसद मनोज तिवारी का जीत के बाद उनसे घर पर मिलने जाना भी यह बताता है कि वे किस तरह विरोधी नेताओं से मिलती थीं और विपक्षी नेता भी उन्हें बेहद पसंद करते थे। जीवन और राजनीति में प्रगतिशील, उदार और लोकतांत्रिक मूल्यों से भरपूर शीला दीक्षित बेहद अलग नेता रहीं।
साल 1998 के लोकसभा चुनावों में शीला दीक्षित को भारतीय जनता पार्टी के लाल बिहारी तिवारी ने पूर्वी दिल्ली क्षेत्र में मात दी थीं। बाद में वह मुख्यमंत्री बनीं। शीला दीक्षित गोल मार्केट क्षेत्र से 1998 और 2003 से चुनी गईं। इसके बाद 2008 में उन्होंने नई दिल्ली क्षेत्र से चुनाव लड़ा। शीला दीक्षित के दो बच्चे हैं- संदीप दीक्षित और बेटी लतिका सैयद। संदीप दीक्षित कांग्रेस से सांसद रह चुके हैं। आज जब कांग्रेस को ऐसे कर्तव्यनिष्ठ और समर्पित लोगों की जरूरत थी। सच में यह अपूरणीय क्षति है।
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