सरकार के लिए तीसरी लहर से निपटना आसान नहीं रहेगा।
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तीसरी लहर के लिए कितना तैयार है भारत
अगर विश्व के परिप्रेक्ष्य में भारत को देखें तो भारत 135 करोड़ की आबादी के साथ विश्व का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या, सातवां सबसे बड़ा क्षेत्रफल, और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला एक विकासशील देश है। आबादी के लिहाज से हेल्थकेयर सेक्टर में डिफेंस सेक्टर के बजाय तुलनात्मक रूप से समग्र बजट का कम हिस्सा ही खर्च किए जाने की परंपरा रही है। लेकिन कोरोना वायरस रूपी इस अदृश्य शत्रु ने मौजूदा सरकार को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने को विवश कर दिया है।
ऐसे में जब अमेरीका, जापान, इटली, जर्मनी समेत अन्य विकसित यूरोपीय देशों की स्वास्थ्य सेवाएं ध्वस्त हो गईं तो भारत की दशा चिंताजनक होनी ही थी। ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी इंडेक्स प्रकोप को रोकने, पता लगाने, रिपोर्ट करने और इस पर अमल करने की अपनी क्षमता के आधार पर देशों की रैंकिंग करता है। इस संस्था ने भारत को 195 देशों में 57वां स्थान दिया है। भारत की हेल्थकेयर एक्सेस की रैंकिंग 149 रही और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर्याप्तता 124 वें स्थान पर। टीका
बहरहाल, पहली लहर से सकुुुुुशल पार रहेे भारत को टीकाकरण से राहत की उम्मीद थी, लेकिन जब तक वैक्सीनेशन होता तब तक दूसरी लहर ने पूरे देश को झकझोर दिया। चुनावों में व्यस्त सरकार के लिए इस बात का अंदाजा लगाना तक मुश्किल था कि दूसरी लहर ऐसी तबाही मचाएगी जबकि सरकार ने इसके इंतजाम ही नहीं किए। कुप्रबंधन, असफल प्रशासन, नौकरशाही का हावी होना, अस्पतालों और चिकित्सा व्यवस्था का लड़खड़ाता ढांचा, गांवों में बदइंतजामी ने सरकार की पोल खोल कर रख दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि भारत तीसरी लहर के लिए कितना तैयार है?
संक्रमण और मरने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है।
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दूसरी लहर में हाल बेहाल, चिकित्सा ढांचा खस्ताहाल
इधर दूसरी लहर में हालात भयावह हैं। देश की राजधानी में हजारों लोग ऑक्सीजन सिलेंडर के अभाव में भटकते रहे। श्मशानों में चिताओं को जलाने की जगह नहीं बची। अब जबकि हालात संभले हैं और सरकार चौकन्नी तो हुई है लेकिन गांवों में हालात खराब हो रहे हैं। संक्रमण का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है जबकि प्रतिदिन मरने वालों का आंकड़ा सरकते हुए 4500 से आगे निकल रहा है। हालात चिंताजनक हैं, ऐसे में तीसरी लहर से निपट पाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
इधर, लंबे समय से लगातार काम कर रहे कोरोना वॉरियर्स जैसे पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिस-प्रशासन , सफाई कर्मचारी, सार्वजनिक वितरण प्रणाली में लगे हुए लोग बहुत थक चुके हैं, तथा बहुत ही तनाव में हैं। फिर भी राष्ट्र को बचाने के लिए इन्हें तीसरी लहर के रोकथाम हेतु पुनः कमर कसना ही होगा। इस निर्णायक युद्ध में सबका योगदान अविस्मरणीय व अतुलनीय रहेगा।
सरकार के अलावा जनता को भी खुद को जागरूक बनाकर, आत्मविश्वास से लबरेज होकर, संयम का परिचय देते, कोविड गाइडलाइंस एवं समय समय पर जारी दिशानिर्देशों का ईमानदारी से पालन करते हुए सरकारी तंत्र का सहयोग करना होगा। इस युद्ध में जनता को अपने घर में रहकर अपने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों का ख्याल रखते हुए, 'दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी' को आत्मसात् कर कोरोना के खिलाफ इस निर्णायक युद्ध में हर किसी को यथा सामर्थ्य सहयोग करना होगा।
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