20वीं शताब्दी के आते-आते इस अत्याचार का खात्मा होने लगा और इसकी जगह सामान्य मटेरियल के अंडर गारमेंट्स ने ले ली।
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कॉर्सेट को असल में बनाया महिला-पुरुष दोनों के लिए बनाया गया था। खासकर बच्चों की रीढ़ की हड्डी को शेप में रखने के हिसाब से इसे बनाया गया था लेकिन बाद में यह महिलाओं की देह को आकर्षक बनाए रखने के लिए ज्यादा इस्तेमाल में लाया जाने लगा। यहां तक कि इसमें कपड़े के अलावा मैटल प्लेट्स, लकड़ी, हड्डियों, जानवर के सींग आदि का उपयोग भी होता था। जरा सोचिए दिनभर उस भारी ढांचे को देह पर लादे रहना, न ठीक से खा पाना न सांस ले पाना, क्या स्थिति होती होगी महिलाओं की?
20वीं शताब्दी के आते-आते इस अत्याचार का खात्मा होने लगा और इसकी जगह सामान्य मटेरियल के अंडर गारमेंट्स ने ले ली। अब भी कॉर्सेट फैशन का हिस्सा हैं और अब वे भले ही उतने कठोर न हों, मकसद वही है शरीर को शेप में रखना। अब वे शेपवेयर और नाइटवेयर के रूप में बाजार में मिल रहे हैं।
विरोध की कहानियां और लड़कियों की आवाज
हैरी पॉटर में बुद्धिमान लड़की की भूमिका निभाने वाली एमा वॉटसन ने कुछ समय पहले अपने एक इंटरव्यू में कहा था-
फिल्म ब्यूटी एंड बीस्ट के दौरान उन्होंने इस तरह की ड्रेसेस पहनने से मना कर दिया था। वे इस बात की कल्पना से ही डर गई थीं कि इस ड्रेस को पहनकर कैसे रहा जाएगा। एमा हिम्मती थीं, कम उम्र और चर्चित नाम होने पर भी डायरेक्टर ने उनकी बात मान ली।
इसी तरह एक्ट्रेस फीबी डेनवीयर ने अपने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि किस तरह पीरियड ड्रामा सीरीज 'ब्रिजर्टन' में अपनी भूमिका के दौरान कॉर्सेट पहनने से वो सांस नहीं ले पाती थीं। यहां तक कि हर दिन शूटिंग खत्म होने पर उनके शरीर पर घाव और निशान होते थे। 'सिंड्रेला' की भूमिका अदा करने वाली लिली जेम्स शूटिंग के दौरान कई बार ब्रीथिंग प्रॉब्लम से गुजरीं। स्थिति ऐसी थी कि सेट पर उनके लिए महज लिक्विड डाइट रखी जाती थी क्योंकि उस कॉर्सेट के साथ कोई भी और खाना वो डायजेस्ट ही नहीं कर सकती थीं।
जब केवल उस ड्रेस में एक्टिंग करने वाली महिलाओं के लिए स्थिति इतनी कठिन रही हो तो सोचा जा सकता है कि उस ड्रेस को रोज पहनकर रहना औरतों के लिए कितना मुश्किल रहा होगा।
मोटापा या बढ़ता वजन निश्चित ही कई बीमारियों का घर है। इसलिए फिट रहना एक सकारात्मक बात है लेकिन फिट रहने के ये पैमाने जब अस्तित्व पर हावी होने लगते हैं तो यह किसी के ऊपर लांछन की तरह लगने लगते हैं और किसी के पूरे जीवन पर ही तोहमत की तरह हो जाते हैं।
तो जरूरी है रुबीना की ही तरह का रवैया। जब बेवजह के लोग केवल आपके ऊपरी आवरण पर मर-मिट जाएं, आपसे महज छद्म प्यार जटाएं तो जरूरी है कि आप भी ऊपर उठ जाएं और इस फिजूल वजन को झटक-झाड़ अदा से आगे बढ़ जाएं।
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