हिंदी फिल्मों के इतर उनके बनाए और कुछ गाए गए गाने उनकी मातृ भाषा बंगाली में भी मौजूद हैं जो उतने ही मीठे और मधुर हैं।
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केवल डिस्को या डांस के गाने ही नहीं, बहुत खूबसूरत मेलोडियस सांग्स भी बप्पी दा की देन हैं। सत्तर के दशक की फिल्मों में सैयां बिना घर सूना, माना हो तुम बेहद हसीं, ज़िद न करो, जैसे उनके गाने तो हमेशा याद रहेंगे ही। मिथुन चक्रवर्ती, गोविंदा और मनीषा कोइराला के उस युग में हम टीन एजर्स की सपनीली दुनिया के कई गीत भी बप्पी दा के इशारों पर रचे गए। ये वो गीत थे जो 90 के दशक को बॉलीवुड की कई खूबसूरत जोड़ियों और मेलोडी से भरपूर यादों का तोहफा दे गए।
बाद में पता चला कि बप्पी लाहिड़ी एक ऐसे परिवार से थे जहां संगीत रगों में बहता था। उनके माता पिता दोनों नियमित रियाज करने वाले गुणीजन थे और यही विरासत बप्पी दा को भी मिली।
हिंदी फिल्मों के इतर उनके बनाए और कुछ गाए गए गाने उनकी मातृ भाषा बंगाली में भी मौजूद हैं जो उतने ही मीठे और मधुर हैं। गानों को खुद आवाज देने के अलावा बप्पी दा खुद तबले से लेकर पियानो, ड्रम, गिटार, बॉंगो और सेक्सोफोन जैसे वाद्यों का भी बेहतरीन इस्तेमाल करने के लिए जाने जाते थे।
बप्पी दा ने म्यूजिक को एक पूरी पीढ़ी की नई आइडेंटिटी के रूप में दिया। उनके म्यूजिक में पारंपरिक मेलोडी के साथ नएपन का फ्यूजन था जो तुरंत जुबान पर चढ़ जाया करता था और यह असर आने वाली कई पीढ़ियों तक रहेगा।
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