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महिला उत्पीड़न: महिलाओं के साथ बर्बरता क्षम्य या अक्षम्य?

सार

'महिला उत्पीड़न अक्षम्य अपराध है' यह पंक्ति मेरे ऑफिस में कई जगह पोस्टर के रूप में टंगी हुई है। न्यूज रूम में काम के दौरान जब महिला उत्पीड़न और महिलाओं के साथ बर्बरता व बलात्कार की खबरें आती हैं तो मेरी नजरें सबसे पहले इन्हीं पोस्टर्स पर जाती हैं। महिला उत्पीड़न और बलात्कार की हेडिंग पढ़कर खून खौल उठता है तो दूसरी ये पोस्टर्स सोच में डाल देते हैं कि आखिर जिस देश में महिलाओं को देवी का स्वरूप माना जाता है, उस देश में ऐसी पंक्ति लिखने की नौबत क्यों आई?
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महिलाओं के साथ बर्बरता क्षम्य या अक्षम्य? - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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'महिला उत्पीड़न अक्षम्य अपराध है' यह पंक्ति मेरे ऑफिस में कई जगह पोस्टर के रूप में टंगी हुई है। न्यूज रूम में काम के दौरान जब महिला उत्पीड़न और महिलाओं के साथ बर्बरता व बलात्कार की खबरें आती हैं तो मेरी नजरें सबसे पहले इन्हीं पोस्टर्स पर जाती हैं। महिला उत्पीड़न और बलात्कार की हेडिंग पढ़कर खून खौल उठता है तो दूसरा ये पोस्टर्स सोच में डाल देते हैं कि आखिर जिस देश में महिलाओं को देवी का स्वरूप माना जाता है, उस देश में ऐसी पंक्ति लिखने की नौबत क्यों आई?

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एक सवाल यह भी आता है कि ये पंक्तियां क्या सिर्फ लिखने के लिए हैं? क्योंकि कुछ गिने-चुने मामलों को छोड़ दें तो भारत में 31 हजार से ज्यादा बलात्कार और उत्पीड़न के मामले केवल दर्ज होकर रह जाते हैं। चर्चा और कार्रवाई इक्का-दुक्का मामलों में होती दिखती है।


कुछ मामले जो चर्चा में आए

ज्यादा पीछे न जाकर हाल ही में सुर्खियों में रहे कुछ अपराधों के बारे में जिक्र करूंगी, जिनसे यह साबित हो गया कि देश में अब महिला उत्पीड़न 'क्षम्य अपराध' बन गया है। आप जी खोलकर अपराध करते रहिए क्योंकि आपको बचाने के लिए यहां हजारों लोग बैठे हुए हैं लेकिन सवाल करने वाला कोई नहीं।

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हाल में बिलकिस बानो का मामला सामने आया, जिनके दोषियों को फांसी की सजा देने की बजाय उम्रकैद की सजा दी गई थी। कुछ साल सजा काटने के बाद उन अपराधियों को छोड़ भी दिया गया। छोड़ने का जो कारण बताया गया वह हास्यास्पद और हैरान करने वाला है।


इस फैसले के बाद ज्यादातर लोग मौन रहे। कई लोगों ने इसके खिलाफ आवाज भी उठाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आवाज उठाने वाले भी थककर बैठ गए लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।  

बलात्कार और शोषण के बढ़ते मामले चिंताजनक - फोटो : Twitter

चर्चा में आने के बावजूद अपराधियों को कठोर सजा नहीं

इसके बाद मामला आया किरण नेगी का। निर्भया से भी क्रूर यातनाएं किरण नेगी को दी गई थीं। अपराध अपराध होता है, किसी भी मामले से तुलना करना सही नहीं है लेकिन यहां करना पड़ेगा, क्योंकि इन मामलों में देश के कानून, इनके नियंताओं और देशवासियों का दोहरा चरित्र देखने को मिला।

एक मामले में पूरा देश सड़क पर उतर आया और दोषियों को सजा दिलवाने के बाद ही चैन से सोया। वहीं दूसरे मामले में नियम नियंताओं ने निर्णय दिया और देश ने चुप्पी साध ली। सिर्फ देश ही नहीं बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों ने भी किरण नेगी मामले पर बोलना जरूरी नहीं समझा।

नतीजा यह हुआ कि आज देश में ज्यादातर लोगों को किरण नेगी मामले के बारे में पता ही नहीं है। किरण नेगी के साथ हैवानियत की गई थी यह बात स्वीकारते हुए भी अदालत ने गिरफ्तार अपराधियों को छोड़ दिया। अगर वे दोषी नहीं थे तो इस मामले में दोषी कौन हैं? इसकी छानबीन करना और उन्हें सजा दिलाना किसकी जिम्मेदारी है? अदालत ने तो आसानी से अपना पल्ला झाड़ते हुए केस को बंद कर दिया लेकिन असल अपराधी तो खुलेआम घूम रहे हैं।

यौन शोषण के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत - फोटो : Pixabay

'ऐसी व्यवस्था बने कि बेटियां आवाज उठाएं'

महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों, खासकर यौन शोषण के मामलों पर आवाज उठाने वाली एक्टिविस्ट योगिता भयाना कहती हैं-
 
'देश और राज्य की सरकारों को बेटियों के साथ किए जा रहे यौन अपराधों और अपराधियों पर सख्ती बरतनी चाहिए। जो भी आरोपी हों उन्हें पुलिस गिरफ्तार करने में देर न करे। कोर्ट रेप जैसे जघन्य अपराध के दोषियों को आसानी से बेल, परोल न दे। इससे देश की न्याय प्रणाली से बेटियों को आत्मविश्वास डगमगा जाएगा और कोई भी बेटी अपने साथ हुए अपराध के खिलाफ आवाज उठाने से डरेगी। उसको अपनी आवाज उठाने का स्पेस होना चाहिए।'

साल-दर-साल बढ़ते बलात्कार के मामले
अगस्त 2022 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने भारत में 2021 में महिला अपराध मामलों में एक रिपोर्ट जारी की। उसमें सिर्फ रेप के 31677 मामले दर्ज होने का आंकड़ा है। ये आंकड़े दर्ज किए गए मामलों के हैं, न जाने कितने मामले आते रहते हैं जिनको समझौतों या रुपयों की दबिश देकर दबा दिया जाता है, जिन्हें कोई जानता भी नहीं।

साल 2020 में दर्ज बलात्कार के मामलों की संख्या 28046 थी, जबकि 2019 में यह 32033 थी। यानी 2019 की तुलना में 2020 में रेप के मामले कम दर्ज किए गए, लेकिन 2021 में फिर से दर्ज मामलों की संख्या बढ़ी। यह भी बात सामने आती रहती हैं कि ज्यादातर रेप मामलों में पीड़िता का कोई जानने वाला ही शामिल होता है।
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रेप के राज्यवर आंकड़े

एनसीआरबी की रेप केसे वाली रिपोर्ट में राजस्थान (6337), मध्य प्रदेश (2947), महाराष्ट्र (2496) और उत्तर प्रदेश (2845) जैसे राज्य शीर्ष पर थे, जबकि दिल्ली में 2021 में 1250 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए थे। जनसंख्या के आधार पर देखें तो रेप मामले में अपराध की दर (प्रति लाख जनसंख्या) राजस्थान (16.4) में उच्चतम थी। इसके बाद चंडीगढ़ (13.3), दिल्ली (12.9), हरियाणा (12.3) और अरुणाचल प्रदेश (11.1) का नंबर है। 

हर साल सिर्फ बलात्कार के हजारों मामले सामने आते हैं, लेकिन पीड़िताओं को न्याय मिलने में वर्षों लग जाते हैं। कुछ को न्याय मिल जाता है, वहीं कुछ मामले सबूतों के अभाव या किसी अन्य कारण से रफा-दफा कर दिए जाते हैं। ये सब देख ऐसा लगता है कि महिलाओं के साथ ज्यादती क्षम्य है।

Source- Rape Cases in India 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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