जॉर्ज मिलियस, एक जादूगर निर्देशक
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जॉर्ज मिलियस पर बनी फिल्म ‘ह्यूगो’
‘ह्यूगो’ एक ऐतिहासिक फ़िल्म है। इस फ़िल्म में जॉर्ज मिलियस के बारे में जो कुछ दिखाया गया है तकरीबन वह सब सही है। सच में लुमियर भाइयों की फ़िल्म का प्रदर्शन देखने के बाद यह जादूगार और खिलौने बनाने वाला फ़िल्म बनाने में रूचि लेने लगा था। उसने ऑटोमाटा के साथ प्रयोग किए और अपना स्टूडियो, ‘थियेटर रॉबर्ट हौडिन’ बनाया।
दिवालिया होने के बाद उसकी फ़िल्म रील पिघल कर सेलूलोज बनी और वह स्वयं मोंटपारनास (पेरिस का रेलवे स्टेशन) में खिलौनों की दुकान खोल कर अपना जीवन यापन करने लगा। लेकिन लंबी उपेक्षा के बाद उसे सम्मानित किया गया।
फ़िल्म ‘ह्यूगो’ में दिखाई गई कई मूक फ़िल्में वास्तव में उसी का काम हैं। खासतौर पर 1902 में बनाई गई ‘ले वोयज दान्स ला लुने’ (इंग्लिश में ‘ए ट्रिप टू द मून’) ने उसे अमर कर दिया। 1904 में उसने ‘द वॉयज एक्रॉस दि इम्पोसिबल’ बना कर असंभव को संभव कर दिखाया, इसीलिए डी ड्ब्ल्यू ग्रिफ़िथ सब बातों का श्रेय जॉर्ज मिलियस को देते हैं। ‘क्लिओपेट्रा’ज टूम’ (1899), ‘क्राइस्ट वाकिंग ऑन वाटर’ (1899), ‘हेमलेट’ (1908) उसकी कुछ अन्य फ़िल्में हैं।
उसकी फ़िल्म ‘ए वेजर बिटवीन टू मैजीशियन, ओर जेलस ऑफ़ माईसेल्फ़’ के बारे में सोचा जा रहा था कि यह नष्ट हो गई है या गुम हो गई है। यह फ़िल्म उसने 1904 में बनाई थी, मगर यह खोई नहीं थी। 2016 में अचानक यह चेकोस्लोवाक फ़िल्म आर्काइव में मिल गई। ठीक उसी तरह जैसे लाजवाब फ़िल्म ‘ह्यूगो’ में जॉर्ज मिलियस सोच रहा था कि उसकी सारी फ़िल्में नष्ट हो गई हैं और वह बहुत निराश-हताश था।
मिलियस निराशा के गर्त में डूब गया और फ़िल्म शब्द से नफ़रत करने लगा था। लेकिन ‘ह्यूगो’ में फ़िल्मों का विशेषज्ञ रेने टबार्ड (माइकेल स्टॉबर्ग) मिलियस का दीवाना है। उसने मिलियस की फ़िल्म का संरक्षण किया हुआ है। रेने टबार्ड के पास ‘ए ट्रिप टू द मून’ की रील है। फ़िल्म ‘ह्यूगो’ का रेने टबार्ड कोई और नहीं स्वयं निर्देशक मार्टिन स्कॉरसेसि ही हैं।
जॉर्ज मिलियस की फ़िल्में अपने सेट और विचित्र कॉस्ट्यूम के लिए जानी जाती हैं। वह श्वेत-श्याम फ़िल्मों का दौर था लेकिन मिलियस एक-एक फ़्रेम को हाथ से रंग कर जादू में परिवर्तित किया करता था।
अमेरिका फ़िल्मों का महत्वपूर्ण बाजार था, 1903 से मिलियस की कंपनी का एक ऑफ़िस अमेरिका में था। उसके कई प्रोड्क्शन स्केचे तथा स्टोरीबोर्ड के शीर्षक फ्रेंच के साथ इंग्लिश में भी होते थे। वह अपनी फ़िल्म के दो नेगेटिव शूट करता, एक अपने पास रखता, दूसरा अमेरिका भेजता था। उसने इंग्लिश में फ़िल्म कैटलॉग भी बनाया। जब उसने फ़िल्म प्रोड्क्शन बंद किया तो अपनी अधिकांश फ़िल्मों की मूल प्रति स्वयं ही नष्ट कर दी।
प्रथम विश्वयुद्ध ने सब उलट-पलट कर दिया
इसी बीच प्रथम (उस समय कहां मालूम था कि यह युद्धों की शुरुआत है) विश्वयुद्ध के कारण फ़िल्म में दर्शकों की रुचि घट गई। फ़िल्म उद्योग के कमर्सियल विकास से 1913 में उसका व्यापार मंदा पड़ गया। जॉर्ज मिलियस दिवालिया हो गया। उसका ‘थियेटर रॉबर्ट हौडिन’ 1914 में बंद हो गया। इसके बाद जॉर्ज मिलियस मोंटपारनास स्टेशन पर खिलौनों की दुकान खोल कर अपना जीवन यापन करने लगा। परिवार चलाने का भार छोटे भाई हेनरी पर आया, वह लंदन में फ़ैमिली शू फ़ैक्ट्री चलाता था।
जॉर्ज मिलियस की पहली पत्नी का नाम यूजीन जेनिन था। दोनों की 25 जून 1885 को शादी हुई थी, 3 मई 1913 को यूजीन की मृत्यु हो गई। पत्नी यूजीन के जीवित रहते मिलियस का संबंध जेनी से था पर पत्नी के मरने के बहुत बाद में 1925 में दोनों ने विवाह किया। जॉर्जेट तथा एंड्रे मिलियस उसके बच्चे हैं।
1928 में उसे ‘लुमियर ऑनेररी’ अवार्ड मिला तथा 1931 में ‘लीजन ऑफ़ ऑनर’ प्राप्त हुआ। मरणोपरांत अभी हाल में 2017 में उसे विजुअल इफेक्ट्स सोसायटी का ‘हॉल ऑफ़ फ़ेम’ तथा 2021 में ऑर्किटेक्ट केलिए ओएफ़टीए फ़िल्म ‘हॉल ऑफ़ फ़ेम’ दिया गया है। 76 साल की उम्र में 21 जनवरी 1938 को गरीबी में कैंसर से जॉर्ज मिलियस की पेरिस में मृत्यु हुई।
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