आज एक संकल्प पूरा हुआ है। श्री राम मंदिर का निर्माण कार्य प्रारम्भ हो रहा है। राम मंदिर के निर्माण कार्य के साथ राष्ट्र निर्माण का यज्ञ भी प्रारम्भ होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की दृण इच्छाशक्ति का यह परिणाम है कि उन्होंने लाखों लाख श्रद्धालुओं और राम भक्तों के अनुरूप राम मंदिर निर्माण की परिकल्पना को साकार किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में रामराज की स्थापना देश में होगी।
'अवधपुरी सोहइ एहि भांती। प्रभुहि मिलन आई जनु राती॥'
गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में लिखा है कि भगवान राम के आने पर अवधपुरी इस प्रकार सुशोभित हो रही है, मानोंं रात्रि प्रभु से मिलने आई हो और सूर्य को देखकर मानो सकुचा गयी हो। त्रेता युग में भगवान राम के अयोध्या आगमन पर जो उल्लास रहा होगा वही अनुभूति आज अयोध्या जी सहित पूरे देश में है। हम धन्य हैं, अत्यंत सौभाग्यशाली हैं, हमारे सामने भगवान श्री राम की जन्मभूमि पर भगवान श्री राम के मंदिर का निर्माण प्रारंभ हो रहा है। राम हमारे अस्तित्व हैं, राम हमारे आराध्य हैं, राम हमारे प्राण हैं, राम हमारे भगवान हैं। राम भारत की पहचान हैं, बिना राम के नाम के भारत को नहीं जाना जा सकता, राम हमारे रोम रोम में बसे हैं, राम हमारी हर सांस में बसे हैं।
राम मंदिर निर्माण हमारे लिए एक पवित्र यज्ञ की तरह है, जिसमे लाखों लाख कारसेवकों की आहुतियां हैं। आज उन सभी कारसेवकों को प्रणाम और स्मरण करने का दिन भी है। सभी का अपना अपना योगदान रहा है। सड़क से लेकर संसद तक मंदिर निर्माण के लिए रूपरेखा तैयार की गई थी। श्रद्धेय अशोक सिंघल जी, लाल कृष्ण आडवाणी जी, मुरली मनोहर जोशी जी, विनय कटियार जी, दीदी उमा भारती जी, साध्वी ऋतंभरा जी, महंत नृत्यगोपाल दास जी, महंत रामचन्द्र परमहंस जी, महंत अवैधनाथ जी, विष्णु हरी डालमिया जैसे अनेक अग्रणी लोग थे, जिन्होंने रणनीति तैयार कर राम जन्मभूमि आंदोलन को मूर्त रूप दिया। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कारसेवकों को संबोधित करते हुए कहा था कि- 'रैली नहीं ये रैला है, रामलला का खेला है।'
बात 1991 की है, पूरे देश में रामलला की गूंज थी, आसमान में नारे बुलंद थे - 'रामलला हम आएंगे-मंदिर वहीं बनाएंगे'। तब मैं भारतीय जनता युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष और बुदनी से विधायक था, मुझे भी रामजन्म भूमि आंदोलन से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उस समय अविभाजित मध्यप्रदेश था, मैंने मालवा से लेकर सरगुजा और बस्तर से लेकर ग्वालियर अंचल लगभग पूरे प्रदेश भर का दौरा कर मंदिर निर्माण के लिए जन जागरूकता कार्यक्रम किए।
राम जन्मभूमि आंदोलन की तिथि निकट आई तो हम भी जत्था बनाकर अयोध्या जी के लिए निकले। उस समय मैं भजन बहुत गाता था, रास्ते भर राममय होकर भजन कीर्तन करते हुए हम हनुमना (मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश की सीमा) पहुंचे, जहां मुझे गिरफ्तार कर लिया गया और जौनपुर जेल भेज दिया गया। जौनपुर जेल में हमारे अग्रज श्री राजनाथ सिंह जी पहले से बंद थे। जेल में भी अन्य कारसेवकों के साथ दिन रात भजन कीर्तन होते थे। पूरी जेल का माहौल रमणीय हो गया था। 9 दिन हम जौनपुर जेल में रहे, वहां से निकलकर मैं अयोध्या जी पहुंचा और भगवान रामलला के दर्शन कर मंदिर निर्माण का संकल्प लिया।