सांप्रदायिकता के खिलाफ राजीवजी की दृष्टि और दिशा दोनों बहुत स्पष्ट थी
- फोटो : Congress
राजीव जी के मन में गरीबों के प्रति सच्ची हमदर्दी थी। वे एक ऐसे समाज की स्थापना के लिए आतुर थे जिसमें सब बराबरी के साथ अपनी जिन्दगी जिएं और स्वाभिमान के साथ अपना गुजर-बसर कर सकें। सबकी सुनना और सबको साथ लेकर चलना राजीव जी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी। वे आमजन की समस्याओं को बड़े ध्यान से देखते थे और फिर सही दिशा-निर्देश देकर उसको सुलझाने का काम करते थे, यही उनकी कार्यशैली थी।
सांप्रदायिकता के खिलाफ राजीवजी की दृष्टि और दिशा दोनों बहुत स्पष्ट थी। राजीव जी ने लगातार फिरका-परस्त ताकतों, घृणा, आतंकवाद, अशिक्षा एवं गरीबी के खिलाफ संघर्ष किया। धर्म निरपेक्षता के पक्षधर राजीव गांधी अहिंसा, सौहार्द और शांति के अग्रदूत थे। राजीव गांधी कौमी एकता और सद्भाव को देश की सांस्कृतिक अस्मिता और गौरवशाली विरासत की धुरी मानते थे। वे जाति, धर्म और सम्प्रदाय के संकीर्ण दायरे से देश को उबारना चाहते थे। राजीव जी ने कभी भी बदले या द्वेष की भावना की राजनीति नहीं की। द्वेष शब्द तो उनकी डिक्शनरी में था ही नहीं।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रयास
राजीव गांधी पर्यावरण, प्रदूषण तथा मानव सभ्यता पर इसके घातक प्रभाव की समस्या से चिंतित थे। उन्होंने वन एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए। राजीव जी का मानना था कि पर्यावरण संरक्षण और विकास की अवधारणा में संतुलन आवश्यक रूप से होना चाहिए। उन्होंने केन्द्रीय गंगा विकास प्राधिकरण की स्थापना कर गंगा नदी की सफाई का अभियान शुरू किया।
राजीवजी ने दल-बदल कानून लाकर राजनीति में फैली “आया राम, गया राम“ की विकृति पर अंकुश लगाने की पहल की, एवं राजनीति में शुचिता को विशेष महत्व दिया। राजीव गांधी ने समय की चुनौतियों को समझने एवं उसके मुताबिक देश को आगे ले जाने का साहसिक प्रयास किया। राजीव जी को नौजवानों की क्षमता और विवेक पर पूरा भरोसा था। उन्होंने नौजवानों को 18 वर्ष की उम्र में मताधिकार दिलाकर उनकी लोकतंत्र में भागीदारी सुनिश्चित की।
भारत के नवनिर्माण का सपना
राजीव गांधी जी की स्मृति को संजोए रखना, उनके उस सपने का सम्मान होगा जो उन्होंने नए भारत के नवनिर्माण के लिए देखा था। राजीव जी का पुण्य स्मरण करते समय हमें उनके भारत संकल्प को याद रखना होगा। उनका प्रेरणादायी आव्हान था-
आओ, हम ऐसे भारत का निर्माण करें जिसे अपनी स्वाधीनता पर गर्व हो, जो अपनी स्वतंत्रता की रक्षा करने में पूर्ण सक्षम हो।जो सशक्त, कृषि एवं आधुनिक उद्योगों में आत्मनिर्भर हो, जो जाति, धर्म और क्षेत्र की संकीर्ण भावनाओं से उपर उठकर एकता के सूत्र से अनुप्राणित हो। जो निर्धनता तथा सामाजिक असमानताओं से मुक्त हो।
एक ऐसा महान भारत जो पूर्ण अनुशासित एवं कार्य कौशल युक्त हो। जो वैचारिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों से प्रतिष्ठित हो।
नोट: लेखक भारत सरकार में रक्षा उत्पादन, कार्मिक एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री रहे हैं
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।