चुनावों का नतीजा 3 दिसंबर को आएगा।
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किसके सिर बंधेगा जीत का सेहरा?
वहीं, जैसा भारतीय जनता पार्टी में एक सरप्राइज देने का फैक्टर है तो अभी कोई भी इस बात को लेकर 100 प्रतिशत आश्वस्त नहीं है कि पार्टी सत्ता में लौटी तो सेहरा किसके सिर बंधेगा? अधिकांश जानकारी यही मान रहे हैं कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौंकाने वाले निर्णय लेते हैं तो यह भी संभव है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बैकग्राउंड से आने वाले किसी अनजान चेहरे को सत्ता की चाबी सौंप दी जाए, जैसे गुजरात में नरेंद्र मोदी को सत्ता दी गई थी।
फिलहाल राजस्थान में सभी को भारतीय जनता पार्टी की दूसरी लिस्ट का बेसब्री से इंतजार है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि चार-पांच और सांसदों को मैदान में उतारा जा सकता है। इस बात को भी कहा जा रहा है कि दूसरी लिस्ट भी पहली लिस्ट की तरह बेहद चौंकाने वाली होगी। एक तरह से भारतीय जनता पार्टी ने पहले उम्मीदवारों के नामों का एलान कर कांग्रेस से कुछ माइलेज तो ले ही लिया है। जहां कांग्रेस नवरात्रों में 18 अक्तूबर को अपनी पहली लिस्ट जारी करने की बात कह रही है तो भारतीय जनता पार्टी दो-तीन दिन में दूसरी लिस्ट भी लेकर आ सकती है।
चुनाव बेहद दिलचस्प
मरुधरा में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प और रोमांचित करने वाला रहने वाला है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी बिना चेहरे और प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा दिखाकर चुनाव लड़ रही है तो कांग्रेस पार्टी में वैसे तो चेहरा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं हैं, लेकिन पार्टी कहीं न कहीं इशारों में यह संकेत दे रही है कि चुनाव के बाद निर्णय लिया जाएगा।
कांग्रेस का एक वर्ग यह भी चाहता है कि सचिन पायलट के नाम को आगे बढ़ाया जाए। मुद्दों से ज्यादा भावनाओं पर लड़े जाने वाले इस चुनाव का नतीजा 3 दिसंबर को आएगा और उसके अगले एक सप्ताह में नई सरकार बन जाएगी। भाजपा यदि सत्ता में आई तो किसके सिर मुख्यमंत्री का ताज होगा और कांग्रेस अगर सत्ता में बनी रही तो क्या अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे, इस बात की बहस इन दिनों राजस्थान में जोर-जोर से हो रही है।
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