लड़कियों से दुष्कर्म जैसे मामलों पर भी सियासत अलग ढंग से होने लगी है।
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केरल की घटना और बिशप की रिहाई
अब दूसरी घटना की बारी, 14 जनवरी को केरल के चर्चित नन रेप केस में कोर्ट का फैसला आया। अदालत ने नन से रेप के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल को बरी कर दिया है। 57 वर्षीय फ्रैंको मुलक्कल भारत के ऐसे पहले कैथोलिक बिशप थे, जिन्हें नन के यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। कोट्टायम की अदालत ने 100 दिनों से अधिक समय तक चले मुकदमे के बाद यह फ़ैसला दिया।
अदालत का कहना था कि सबूतों का अभाव था। लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ इस मामले में 83 गवाहों और 30 से अधिक सबूतों के आधार पर सुनवाई हुई थी। जब ये फ़ैसला आया तो महिलाओं का एक बड़ा वर्ग हैरान-परेशान रह गया। क़ानून की समझ रखने वालों के माथे पर भी पसीना आ गया। अभी तक कोई भी कोर्ट के इस फैसले को समझ नहीं पा रहा है। केरल की पुलिस भी कोर्ट के फैसले को हज़म नहीं कर पा रही है लेकिन रेप के आरोपी ने इस फैसले को भगवान की कृपा बताया है।
अब पता नहीं ये भगवान की कैसी कृपा है जो इतने सारे गवाह और सबूतों के बाद भी जज साहब को आरोपी निर्दोष लगा। और उन्होंने न्याय करते हुए आरोपी को बरी कर दिया। फिलहाल जो खबर है उसके मुताबिक़ केरल पुलिस इस फैसले के खिलाफ अपील करने वाली है, ऐसा हो तो ही बेहतर।
ख़ैर, अब मैं अपने लेख के पहले पैरा पर आती हूं। हिंदी पट्टी के एक राज्य, राजस्थान और देश के सबसे शिक्षित माने जाने वाले प्रदेश केरल से एक साथ, एक आवाज़ आ रही है- रेप नहीं हुआ! राजस्थान में ये बात पुलिस कह रही है, आधार मेडिकल रिपोर्ट को बनाया जा रहा है, और केरल में आधार - सबूतों का अभाव है। लेकिन बातें दोनों जगह से एक सी ही कही जा रही है।
अब ऐसे माहौल में महिलाओं को टिकट देने, ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ जैसे नारे देने और मिलने-मिलाने पर कैसे बात हो? मेरे से तो नहीं हुआ। लेकिन आप ख़ूब कर पा रहे हैं। आप, मानें वे, जो ऐसे हर मामले में सोशल मीडिया को सर पर उठा लेते हैं। हाय-तौबा मचाते हैं लेकिन पता नहीं क्यों, इन दो मामलों पर आपकी आवाज़ मैं नहीं सुन पा रही। मेरी बात मानिए, जब भी कहीं कुछ गलत हो, कुछ गड़बड़ा रहा हो तो एक-सी ऊर्जा से लिखिए न, बोलिए न। एक मामले में बहुत ऊंचा बोलना और दूसरे में चुप्पी साध लेना सही बात नहीं है। ठीक है? तो बोलते रहिए और कहिए-रेप हुआ तो न्याय मिले। इधर-उधर की बातें ना हो। ...
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