प्रियदर्शन ने ढ़ेरों फिल्में बनाई।
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ऋतुपर्ण घोष जैसे कई अन्य निर्देशकों की तरह प्रियदर्शन ने ढ़ेरों विज्ञापन फिल्में भी बनाई। जिनमें ‘कोका-कोला’, ‘अमेरिकन एक्सप्रेस’, ‘नोकिया’, ‘पार्कर पेन्स’, ‘एशियन पेन्ट्स’, ‘किनले’, ‘मैक्स न्यू यॉर्क लाइफ इन्श्योरेंस’ आदि खूब सफल रहे। इस प्रतिभावान निर्देशक की मुलाकात मलयालम की अभिनेत्री लिजी से अपनी दूसरी ही फिल्म के सेट पर हुई और जल्द दोनों ने शादी कर ली। दोनों ने साथ-साथ में एक दर्जन फिल्में की, हालांकि अब लिजी ने फिल्मों से सन्यास ले लिया है। कल्याणी और सिद्धार्थ उनके बच्चों के नाम हैं। वैसे तलाक के बाद दोनों अब अपने-अपने रास्ते पर हैं।
कॉमेडी और गंभीर, दोनों तरह की फिल्में रहीं हिट
कॉमेडी फिल्म बनाने वाले इस निर्देशक को गंभीर फिल्म बनाने में भी कुशलता हासिल है। विश्वास न हो तो मलयालम फिल्म ‘कालापानी’ तथा ‘थालवट्टम’ देख लें। ‘कालापानी’ उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी इस गाथात्मक फिल्म में उन्होंने मोहनलाल के अलावा तब्बू, प्रभु, श्रीनिवासन, अमरीश पुरी, अनु कपूर, विनीत को लिया। इस नायाब फिल्म का संगीत स्वयं इलईराजा ने दिया है।
फिल्म को कई पुरस्कार प्राप्त हुए। यह फिल्म हिन्दी, तेलगु तथा तमिल में भी उपलब्ध है। ‘वेल्लानकलुडे नाडु’ और उसी पर बनी ‘खट्टा मीठा’ की स्क्रिप्ट श्रीनिवासन की है। यह फिल्म भ्रष्टाचार, लैंड माफिया तथा कई अन्य सामाजिक मुद्दों को उठाती है। अक्षय कुमार के अलावा यहां तृषा कृष्णन, राजपाल यादव एवं असरानी भी सक्रिय हैं। यह उनकी एक सफलतम फिल्म है।
उनकी फिल्म ‘चित्रम्’ का रिकॉर्ड उनकी ही एक अन्य फिल्म ‘किलुक्कम’ (हिन्दी में ‘मुस्कुराहट’) ने तोड़ा। ‘किलुक्कम’ प्रियदर्शन-मोहनलाल जोड़ी की आज भी सफलतम फिल्म मानी जाती है। 1988 में प्रियदर्शन ने कमाल कर दिया, इस साल उनकी पांच फिल्में रिलीज हुईं। ए. के. लोहितदास की कहानी पर मलयालम फिल्म ‘किरीटम’ को आधार बना कर हिन्दी में ‘गर्दिश’ बनाई जिसमें उन्होंने हिन्दी दर्शकों को ध्यान में रख कर काफी-कुछ जोड़ा और फिल्म को सफल होना ही था।
इसकी सफलता के फलस्वरूप उन्हें 1996 में बैंगलोर में होने वाले ‘मिस वर्ल्ड’ का निर्देशन का दायित्व प्राप्त हुआ। उनकी फिल्म ‘कांचीवरम’ उनकी अन्य फिल्मों से बिल्कुल हट कर है। यह कांचीपुरम के बुनकरों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। इस फिल्म के केंद्रीय पात्र के रूप में प्रकाश राज को 2008 का सर्वोत्तम अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
एक आलेख में प्रियदर्शन की फिल्मों को समेटना संभव नहीं है अत: आज इतना ही। अगर न देखी हो तो उनकी साइकोलॉजिकल, कॉमेडी-हॉरर मलयामल फिल्म ‘मणिचित्रट्टाषु’ अथवा हिन्दी की ‘भूल भुल्लैया’ देख लें और अगर उसके लिए समय न हो तो श्रेया घोषाल-एम. जी श्रीकुमार के मधुर स्वर में ‘आमी जे तोमार...’ (गीतकार समीर, संगीतकार प्रीतम) सुन लें।
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