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जीवन धारा: संभावनाएं हालात से बड़ी होती हैं, उन्हें पहचानिए; सूत्र- क्षमताओं पर भरोसा रखें

Wed, 03 Jun 2026 08:26 AM IST
Pavan नॉर्मन कजिंस

सार

जब मनुष्य अपनी क्षमताओं, रचनात्मक शक्ति और अपने भीतर छिपी संभावनाओं को भूल जाता है, तब वह अपने जीवन के क्षितिज को सीमित कर देता है।
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संभावनाएं हालात से बड़ी होती हैं, उन्हें पहचानिए - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मनुष्य को सबसे बड़ा खतरा निराशा से नहीं, बल्कि अपनी संभावनाओं को भूल जाने से होता है। मैंने अपने जीवन में युद्ध देखे, मानवीय त्रासदियां देखीं, बीमारियों का सामना किया और ऐसे लोगों से मिला, जिन्होंने अपने चारों ओर अंधकार के सिवा कुछ नहीं देखा था। फिर भी इन सब अनुभवों से मैंने एक बात जो सीखी, वह यह कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु निराशा नहीं है। वास्तविक खतरा तो तब पैदा होता है, जब हम अपनी संभावनाओं को भूलने लगते हैं। निराशा एक बादल की तरह है। वह आती है, कुछ समय के लिए आकाश को ढक लेती है और फिर चली जाती है। लेकिन यदि हम यह मान बैठें कि आकाश का अस्तित्व ही नहीं है, तब समस्या गंभीर हो जाती है। जब मनुष्य अपनी क्षमताओं, रचनात्मक शक्ति और अपने भीतर छिपी संभावनाओं को भूल जाता है, तब वह अपने जीवन के क्षितिज को सीमित कर देता है।
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मुझे अक्सर लगता है कि हम अपने बारे में बहुत कम जानते हैं। हम अपने भय, सीमाओं और असफलताओं को तो पहचानते हैं, पर अपनी संभावनाओं को जानने में बहुत पीछे रह जाते हैं। एक बीज को देखिए। यदि आप उसे अपनी हथेली पर रख कर देखें, तो लगता है कि वह कुछ नहीं है, लेकिन इसी छोटे-से बीज में एक विशाल वृक्ष छिपा होता है। वृक्ष पहले से ही उसमें मौजूद है, केवल प्रकट होना बाकी है। मनुष्य भी कुछ ऐसा ही है। उसके भीतर साहस, करुणा, बुद्धि, कल्पना और प्रेम आदि की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। समस्या यह है कि वह उन पर विश्वास करना भूल जाता है। मैंने बीमारी के दौरान यह सत्य अपने जीवन में भी अनुभव किया। जब चिकित्सकीय रिपोर्टें मेरे प्रतिकूल थीं, तब मेरे सामने दो विकल्प थे। पहला, मैं स्वयं को केवल एक रोगी मानकर सारी उम्मीदें छोड़ दूं। और दूसरा कि यह स्वीकार करूं कि मेरे भीतर अब भी ऐसी शक्तियां हैं, जिन्हें विज्ञान पूरी तरह माप नहीं सकता-आशा, हंसी और जीवित रहने की इच्छाशक्ति। मैंने दूसरा मार्ग चुना। पर, इसका अर्थ यह भी नहीं कि मैंने वास्तविकता से मुंह मोड़ लिया। इसका अर्थ केवल इतना था कि मैंने अपनी संभावनाओं को विस्मृत नहीं होने दिया।

यही बात मनुष्य के जीवन पर भी लागू होती है। एक बच्चा जब चलना सीखता है, तो बार-बार गिरता है। यदि वह अपनी असफलता को अंतिम सत्य मान ले, तो कभी नहीं चल पाएगा। उसकी प्रगति इसलिए संभव होती है, क्योंकि उसके भीतर विश्वास होता है कि वह अभी जितना है, उससे अधिक बन सकता है। वयस्क होने पर अक्सर हम यही विश्वास खो देते हैं। हम अपने भीतर भय और निराशाओं की दीवारें खड़ी कर लेते हैं। धीरे-धीरे हम खुद को समझाने लगते हैं कि अब कोई नई शुरुआत नहीं हो सकती। वास्तव में यही वह क्षण है, जब हमारी संभावनाएं हमसे दूर नहीं जातीं, बल्कि हम उनसे दूर चले जाते हैं।
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सूत्र- क्षमताओं पर भरोसा रखें
निराशा का अंधेरा हमारी संभावनाओं के सूर्य को कभी अस्त नहीं कर सकता। जैसे एक छोटे-से बीज में विशाल वृक्ष बनने की क्षमता होती है, वैसे ही व्यक्ति के भीतर अनंत संभावनाओं का संसार छिपा होता है। असफलताएं, कठिनाइयां और बाधाएं परीक्षा हैं, पहचान नहीं। जो व्यक्ति अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखता है, वह हर गिरावट को नई उड़ान बना लेता है।
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