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दूसरा पहलू: हॉलीवुड की ‘एलियन पहाड़ी’ और उसका रहस्य, जानें डेविल्स टॉवर की मशहूर लोककथा

Tue, 02 Jun 2026 06:40 AM IST
Pavan अमर उजाला नेटवर्क

सार

अमेरिका के डेविल्स टॉवर को 1977 में आई एक मशहूर हॉलीवुड फिल्म ने दुनियाभर में ‘एलियन पहाड़ी’ की पहचान दिला दी। कई आदिवासी समुदाय इस स्थान को बेयर लॉज या भालू का घर जैसे नामों से जानते रहे हैं। इसके पीछे एक मशहूर लोककथा है। यहां के निवासी बताते हैं कि करीब 30 साल पहले देर रात उनके सामने सड़क पर एक उल्कापिंड गिरा था। यहां पर मोबाइल नेटवर्क भी ठीक से काम नहीं करता है। कई स्थानीय लोग उसका दोष एलियंस को ही देते हैं।
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हॉलीवुड की ‘एलियन पहाड़ी’ और उसका रहस्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिकी राज्य वायोमिंग के खुले घास के मैदानों के बीच अचानक आसमान की ओर उठती एक विशाल चट्टान दूर से किसी दूसरी दुनिया की वस्तु जैसी दिखाई देती है। 867 फीट ऊंचा यह डेविल्स टॉवर दशकों से लोगों को आकर्षित करता रहा है, पर 1977 में आई स्टीवन स्पीलबर्ग की मशहूर फिल्म क्लोज एनकाउंटर्स ऑफ द थर्ड काइंड ने इसे दुनियाभर में एलियन पहाड़ी की पहचान दिला दी। आज भी हजारों लोग सिर्फ उस रहस्यमयी एहसास को महसूस करने यहां पहुंचते हैं, जिसे हॉलीवुड ने परदे पर अमर कर दिया था।
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डेविल्स टॉवर को देखकर यह समझना मुश्किल होता है कि यह प्राकृतिक संरचना है या किसी बड़ी मशीन का हिस्सा। विशाल खंभों जैसी इसकी सतह इसे और भी विचित्र बनाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह दुनिया में कॉलमनर जॉइंटिंग का सबसे बड़ा उदाहरण है, यानी चट्टान ठंडी होने के दौरान उसमें बनीं विशाल स्तंभनुमा दरारों का अनोखा स्वरूप। कुछ स्तंभ तो 10 फीट तक चौड़े हैं। इसे 1906 में तत्कालीन राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने अमेरिका का पहला राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया था।

कई आदिवासी समुदाय इस स्थान को बेयर लॉज या भालू का घर जैसे नामों से जानते रहे हैं। एक लोककथा के अनुसार, दो छोटी लड़कियों को बचाने के लिए धरती ऊपर उठी और एक विशाल भालू ने उसे पंजों से नोचने की कोशिश की। टॉवर की सतह पर दिखाई देने वाली लंबी धारियों को उसी भालू के पंजों के निशान माना जाता है। लोगों का मानना है कि शायद भालू को दुष्ट शक्ति (डेविल्स) या अशुभ आत्मा के अर्थ में समझकर इसका यह नाम पड़ गया। इस सवाल पर स्थानीय लोग हंस पड़ते हैं कि क्या यहां सचमुच एलियंस दिखे हैं? यहां के निवासी ड्रिस्किल कहते हैं कि करीब 30 साल पहले देर रात उनके सामने सड़क पर एक उल्कापिंड गिरा था। यहां मोबाइल नेटवर्क ठीक से नहीं चलता, इसलिए कई लोग उसका दोष एलियंस को ही देते हैं।
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डेविल्स टॉवर आज सिर्फ एक भूवैज्ञानिक संरचना नहीं रह गया है। यह उस दुर्लभ जगह का उदाहरण बन चुका है, जहां प्रकृति, आदिवासी इतिहास, हॉलीवुड कल्पना और आधुनिक पर्यटन एक साथ मिल जाते हैं। शायद यही वजह है कि पांच दशक बाद भी लोग यहां सिर्फ चट्टान देखने नहीं आते, बल्कि वे उस रहस्य को महसूस करने आते हैं, जिसने कभी पूरी दुनिया की कल्पना को झकझोर दिया था। 
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