पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान एक नये वीडियो से बौखला गए हैं।
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वीडियो दिखाने पर सरकार का नोटिस
आपको याद होगा कि जब मरियम नवाज़ ने यह टेप दिखाया तो सीधा प्रसारण करने वाले सारे चैनलों को सरकार ने सख़्त नोटिस जारी कर दिया। लेकिन मामला यहीं समाप्त नहीं हो जाता। मरियम ने पूरी साज़िश का भंडाफोड़ करने के लिए देसी और परदेसी मीडिया की मदद लेनी शुरू कर दी। इमरान ख़ान की हुक़ूमत इससे बौखला गई। गुरुवार को ही मरियम नवाज़ के साथ साक्षात्कार का टेलिविजन चैनल हम न्यूज़ पर प्रसारण हो रहा था। यह साक्षात्कार जाने-माने पत्रकार नदीम मलिक ले रहे थे। अचानक फ़रमान आया और साक्षात्कार बीच में रोककर दूसरा कार्यक्रम प्रसारित किया गया।
इस अधूरे प्रसारित साक्षात्कार में मरियम ने बताया था कि पंजाब सरकार ने अचानक नवाज़ को मिल रहा घर का परहेज़ी ख़ाना बन्द कर दिया है। उन्हें जेल की मोटी रोटी और आलू दिया जा रहा है। हर तीसरे-चौथे दिन उन्हें सीने में दर्द उठता है। यह उनकी दिल की पुरानी बीमारी के कारण है। डॉक्टर भी उन्हें समय पर नहीं देखते। इस कारण वे सुरक्षित नहीं लगते।
कुछ समय पहले आसिफ अली जरदारी के इंटरव्यू पर भी रोक लगा दी गई थी।
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पाकिस्तानी मीडिया में है ये चर्चा
पाकिस्तान के मीडिया में चर्चा आम है कि कुछ न कुछ दाल में काला है। नवाज़ शरीफ हरदम फौज़ को लेकर आक्रामक रहे हैं और कारगिल जंग के दरम्यान जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने उन्हें अंधेरे में रखा था। इसके बाद ही फौज़ से उनके रिश्ते स्थाई रूप से बिगड़ गए, लेकिन बाद में आरोपों की सुनवाई से पहले ही अदालत ने उन्हें सजा सुना दी। चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित कर दिया गया। उसके बाद मामले पर अदालत सक्रिय हुई। यह अजीबोग़रीब मामला है।
मीडिया मानने लगा है कि वास्तव में नवाज़ शरीफ़ मुल्क़ में जम्हूरियत को ताक़तवर बनाना चाहते थे और फौज़ ऐसा नहीं होने देना चाहती थी । इसीलिए उसने प्रधानमंत्री का ख़्वाब देख रहे इमरान ख़ान की पीठ पर हाथ रख दिया। इस वजह से अख़बारों और टीवी चैनलों पर विपक्ष को सहानुभूति मिलने लगी। ये बदले अंदाज़ हुक़ूमत को रास नहीं आ रहे थे। इसलिए उसने पुराने हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए।
चंद रोज़ पहले पूर्व राष्ट्रपति आसफ़अली ज़रदारी का साक्षात्कार प्रसारित करने पर तीन चैनलों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की गई थी। इनमें से एक ज़ियो चैनल भी है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने इस इंटरव्यू को लिया था। पांच मिनट ही यह प्रसारित हुआ था कि ऊपर से हुक़्म हुआ कि प्रसारण रोक दिया जाए जबकि यह साक्षात्कार ज़रदारी की गिरफ़्तारी से पहले लिया गया था और नेशनल असेंबली से भी अनुमति ले ली गई थी। दो दिन पहले लंदन में पाकिस्तान के विदेश मंत्री के संवाददाता सम्मेलन में बड़ी हास्यास्पद स्थिति हो गई थी। पत्रकारों ने उन्हें पाकिस्तान में मीडिया की आज़ादी पर अंकुश के लिए आड़े हाथों लिया था। कनाडा से काम करने वाले एक पत्रकार ने तो सरकार पर सेंसरशिप लागू करने का आरोप लगाया तो विदेश मंत्री बगलें झांकने लगे।
पाकिस्तान में इन दिनों बहस इस बात पर हो रही है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए विपक्ष और मीडिया पर प्रहार कर रहे हैं। पाकिस्तान में आने वाले दिन प्रेस की आज़ादी के नज़रिए से बड़े तनाव भरे हो सकते हैं।
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