इन दिनों पेरिस में एक ऐसी ही प्रदर्शनी आज से साढ़े तीन हजार साल पहले मृत हुए फराओ तूतनखामन की ममी और उसकी कब्र से निकली बेशकीमती वस्तुओं की लगी है जिसे सन् 4 नवंबर 1922 को अंगेज़ पुरातत्ववेत्ता हरबर्ट कार्टर ने मिस्र में खोज निकाला था। इसके पहले 18वीं फराओ की वंश परम्परा में तूतनखामन का कोई नाम नहीं जानता था।
डॉक्टर भगवतशरण उपाध्याय जी ने इस उत्खनन का वर्णन दिया है। उस वर्णन के बाद काफी खोज हुई और इस फराओ की ममी के दो बार एक्स रे हुए तथा सन् 2005 में उसकी स्कैनिंग हुई जिससे पता लगा कि उसकी मृत्यु पैर में चोट लगने से 20 वर्ष की उम्र में हुई थी। उसे मारा नहीं गया था। उसे तीन ताबूतों में दफनाया गया था और अंतिम ताबूत जिसमें उसका शव था उसमें लगे सोने का वजन 110 किलो था।
पेरिस की इस प्रदर्शनी में प्रवेश भी कठिन है।
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पेरिस की इस प्रदर्शनी में प्रवेश भी कठिन है। पूरे विश्व से लोग उमड़े हैं। पहली बार मिस्र के बाहर उसकी कब्र से निकली अधिकतर वस्तुएं प्रदर्शित हुई हैं। कब्र से कुल 3500 वस्तुएं निकलीं जिनमें तूतन के दो बच्चों की ममी भी हैं। इस वस्तुओं के दस्तावेज़ीकरण करने में कार्टर को दस वर्ष लगे। अन्य वस्तुओं में हाथीदांत और सोने की वस्तुओं का बाहुल्य है। इनमें मुकुट, तरह-तरह के उपहार,अलंकृत सिंहासन, तिजोरी, शेरों के हत्थे के बिस्तर,कुर्सी,रत्नजड़ित हार, झुनझुने,शिल्प,मूर्तियां और वह सब कुछ है जो एक सम्राट के वैभव के प्रतीक हैं।
यहां उसकी कब्र से निकली इन्हीं वस्तुओं के कुछ चित्र हैं जिनकी चमक आंखों को विस्मित करती है और मनुष्य की अपनी देह के प्रति उस भ्रम का आख्यान करती है जिसके चलते नश्वर देह को वह अनश्वर मानने लगता है और संसार को अपना चिरस्थाई निवास।
वरिष्ठ लेखक और निबंधकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय इन दिनों पेरिस प्रवास पर हैं।
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