महागठबंधन को मजबूत करने की पहल
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अतुल अंजान बताते हैं कि उन्होंने इसके लिए कई बार अखिलेश यादव से भी मुलाकात की और कांग्रेस नेताओं से भी। उनका कहना है कि जबतक सब एक नहीं होंगे हिन्दूवादी ताकतों को हराना आसान नहीं है। अगर 2024 में भाजपा को केंद्र से नहीं हटाया गया तो संघ और भाजपा अगले पांच सालों में देश को पूरी तरह बरबाद कर देंगी। वह नीतीश की पहल का स्वागत करते हैं लेकिन यह भी कहते हैं कि इस वक्त कांग्रेस को लीड लेना चाहिए।
सीताराम येचुरी का भी यही मानना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा ने जो माहौल बनाया और खरगे के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस में जो आक्रामकता दिखाई दे रही है, उसी का असर है कि कर्नाटक में ऐसे नतीजे आए और जनता ने खुलकर ये संदेश दे दिया है कि अब जनता भाजपा से निजात चाहती है।
पटना की बैठक को इस मायने में खासा अहम माना जा रहा है और यह बताया जा रहा है कि 2024 के पहले की यह सबसे बड़ी गठबंधन की कवायद साबित होगी। बेशक नीतीश कुमार को लेकर कांग्रेस समेत कुछ पार्टियों में बहुत अच्छी धारणा न रही हो, लेकिन उनकी इस पहल को सबने आज की जरूरत करार दिया है।
कांग्रेस में नई ऊर्जा
दरअसल कांग्रेस को लेकर तमाम दलों में बेशक कई अवधारणाएं रही हों और उसके पुराने इतिहास को याद करके कुछ पार्टियां उससे परहेज करती रही हों, लेकिन खरगे के अध्यक्ष बनने के बाद और राहुल गांधी की लगातार और ईमानदार कोशिशों की बदौलत कर्नाटक जीतने के बाद स्थितियां बदली हैं। अब इस साल होने वाले तीन अहम राज्यों के चुनाव पर सबकी नजर है। सभी पार्टियों की अंदरूनी रिपोर्ट और भाजपा की घबराहट जिस तरह सामने आ रही है, उससे कांग्रेस के साथ साथ सभी पार्टियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
बेशक भाजपा विपक्ष की इस कवायद पर तंज कस रही हो, उनके आपसी विवाद और महत्वाकांक्षाओं की बात कर रही हो, लेकिन भीतर ही भीतर इस गठबंधन को लेकर उसकी चिंता बढ़ी हुई नजर आ रही हो।
पुराने अनुभव देखें तो साफ है कि गठबंधन की सरकारें आपसी टकराव और निजी महत्वाकांक्षाओं की शिकार होती रहीं और ज्यादा नहीं चलीं, लेकिन एनडीए के मुकाबले यूपीए के प्रयोग ने यह भी साबित किया कि जबतक सब साथ नहीं आएंगे, भाजपा के मजबूत किले को तोड़ा नहीं जा सकता। जाहिर है पटना की बैठक को इसी दिशा में एक मजबूत बुनियाद के तौर पर देखा जा रहा है।
बाकी तो सियासत है, इस खेल में कौन बाजी मारता है और जनता के मन में क्या है, यह तो नतीजे ही बताते हैं, लेकिन गठबंधन की यह बयार कुछ नए संकेत तो दे ही रही है।
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