माओवादी आंदोलन का सिनेमा पर असर
इसके बाद माओवादी आंदोलन के समय नेपाली सिनेमा की काफी हानि हुई। इस दौरान बहुत कम फिल्में बनीं। आर्थिक, तकनीक तथा कलात्मक सब दृष्टि से नेपाली सिनेमा एक तरह से रुक गया। यहां तक कि दर्शकों की संख्या भी घट गई।
एक और बात ध्यान देने की है। नेपाली सिनेमा के कई पक्षों में शुरू से भारत का योगदान रहा है। अभिनेता, तकनीशियन, संगीतकार, गीतकार सबमें भारत का सहयोग उसे मिला है। भारत का बॉलीवुड सिनेमा काफी चमक-दमक के कारण नेपाल के सिनेमा को प्रभावित करता रहा है। कई बार नेपाली सिनेमा उसकी नकल करता रहा है। नेपाली सिनेमा को इससे उबरना होगा और अपनी एक अलग पहचान कायम करनी होगी।
नई सदी के साथ नेपाली सिनेमा पुन: उठ खड़े होने का प्रयास कर रहा है। सदी के पहले दशक में यहां ‘दर्पण छाया’, ‘जिंदगानी’ जैसी फिल्में बनी जिन्होंने अच्छा व्यापार किया। ‘दर्पण छाया’ का निर्देशन तुलसी घिमिरे ने किया और इसमें दिलीप रायमाझी तथा निरुता सिंह ने भूमिकाएं की। इसका संगीत आज भी लोकप्रिय है। ‘जिंदगानी’ के निर्देशक उज्जवल घिमिरे हैं। इसी दौरान नेपाली सिनेमा में निखिल उप्रेती, बिराज भट्ट, झरना थापा, रेखा थापा, रेजिना उप्रेती जैसे कलाकार उभर कर आए।
‘लूट’, ‘अंदाज’, ‘कोहिनूर’, ‘कबड्डी कबड्डी’, ‘वादा नं. 6’, ‘छक्का पंजा’ इस सदी में नेपाल की फिल्में हैं। अब नेपाल में सिनेमा से जुड़ी महा संचार, सिने मेकर्स प्राइवेट लिमिटेड, आमा सरस्वती गीता देवी फिल्म्स जैसी संस्थाएं हैं, और नेपाल ने अपना प्रथम राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2005 में आयोजित किया, और इस साल ‘कब होगी मिलनवा हमार’ को पुरस्कृत किया गया।
2022 में सर्वोत्तम अभिनेता दिव्य देव तथा सर्वोत्तम अभिनेत्री मेनका प्रधान को चुना गया। इस साल के सर्वोत्तम निर्देशक मोहन राय (वन नाइट इन काठमांडु) रहे।
नेपाल- आधुनिक सिनेमा
हाल के दिनों में नेपाल में सिनेमा हाल, मल्टीप्लेक्स में काफई इजाफा हुआ है। सेटेलाइट टेलिविजन तथा स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के कारण दर्शकों तक सिनेमा का पहुंचना आसान हो गया है। नेपाल का सिनेमा अब अपने निर्देशकों, अपने अभिनेता-अभिनेत्री, अपने गीत-संगीत के बल पर खड़ा हो रहा है।
नेपाल में उनका अपना संगीत और अपने वाद्य यंत्र है। अपनी फिल्मों में इनका प्रयोग कर वे अपने राष्ट्रीय सिनेमा की पहचान को मजबूत कर सकते हैं। यह न केवल नेपाल के दर्शकों को लुभाएगा वरन बाहरी दर्शक भी नेपाली फ़िल्म की ओर आकर्षित होंगे।
अब नेपाल में सिनेमा से जुड़े लोगों जैसे निर्देशकों, अभिनेताओं में प्रोफेशनलिज्म आ गया है। तकनीक दृष्टि से भी वे सक्षम हो गए हैं। अत: अब नेपाल में उच्च कोटि की फिल्में बनने लगी हैं। नेपाल के पास काफी समृद्ध संस्कृति की विरासत है। नेपाल दक्षिण एशिया के सिनेमा में काफी योगदान कर सकता है। सिने-जगत को नेपाली सिनेमा से काफी उम्मीदें हैं।
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