अभिनय अपने स्वभाव में अभिव्यक्त है और अभिनेता लोक में. पर्दे का सितारा जब जमी पर होता है, तो आसमान में उसकी जगह सबसे चमकदार होती है-
नाना नहीं रहे।
काय रे...!
और यह काय रे और वह मुस्कान आज तक भीतर बनी हुई है.
दूसरी मुलाकात गणपति के ही दिनों में मुंबई में माहिम स्थित उनके घर पर 2007 में हुई थी। उन दिनों दैनिक भास्कर से कुछ ही दूरी पर उनका घर था। ठेठ देसी मराठी अंदाज किसान वाली टोपी, कुर्ता-पायजामा, बंडी और माथे पर तिलक। यह अंदाज देखते ही बनता था। मुस्कुराकर मुझे दी गई आरती और प्रसाद ने उनके व्यक्तित्व को देखकर अचरज में डाल दिया था। बाद में फिल्मों के प्रीमियर के बीच हंसते-मुस्कुराते, लेकिन अपने स्वाभाविक अक्खड़ स्वभाव में जी रहे नाना अपनी रंगत दिखाते, टकराते रहे।
फिल्मों का यह अभिनेता लोगों के अपने मानुस होने के किरदार में जगह बनाता रहा और चुपचाप इतना बड़ा होता चला गया और उनकी उपस्थिति की छाया हर दिल में एक खास जगह बनाती चली गई।
इधर जब वे 2015 में मिले तो कुछ अलग थे। इतने कि अंदाजा नहीं था कि इस प्रिय अभिनेता का आभा-मंडल इतना विस्तार पा रहा था। साल 2015 में जब महाराष्ट्र में आत्महत्या कर रहे किसानों की हालत से विचलित होकर वे अपनी कमाई से 15 हजार रुपये तक के चेक किसानों को बांट रहे थे, उस समय एक टीवी पत्रकार ने उनसे पूछा था कि इस मामले में आप राजनीतिज्ञों और नेताओं से क्या कहना चाहेंगे?
नाना ने ठेठ उसी खांटी अंदाज में जवाब दिया था।
वो उनका काम कर रहे हैं, मैं मेरा काम कर रहा हूं।
इतना बोलकर नाना चुप हो गए।
नाना इंडस्ट्री की चकाचौंध के बीच सादगी, सरलता और सहजता में मानवीय गुणों तथा अपनी ग्रामीण, देशज संस्कृति का दीपक रहे। रील से बाहर रियल लाइफ की एक दुनिया उनकी अपनी थी, जिसके न जाने कितने, किस तरह के अनगिनत किस्से उनके चाहने वालों के दिलों में रहे होंगे। फोटाग्राफर हो, मीडियाकर्मी हो या सेट पर काम करने वाले हर किसी से उनका जुड़ाव बेहद आत्मीय था लेकिन वे सरलमना होकर मिलते रहे। हां अपने टेम्परामेंट, गुस्से और मुंहफट होने के बीच वे यदा-कदा अलग दिखते रहे लेकिन नाना के भीतर धड़कता एक देसी, खांटी मराठी संस्कृति में डूबा आदमी हमेशा इसे देश की जड़ों को छूता रहा।
फिलहाल हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के इस नटसम्राट नाना पाटेकर उर्फ गणपतराव रामचंद्र बेलवलकर को विदा. एक अभिनेता रुपहले पर्दे की दुनिया को अंतिम प्रणाम कहकर गुजर गया.
एक किरदार अभिनय से छूटा
और
एक किरदार संसार से..!
जब-जब स्क्रीन पर नजर आओगे बहुत याद आओगे नाना..!