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शहीद दिवस: "गांधी का रामराज्य एक सच्चा लोकतंत्र है"...

सार

गांधी सन् 1929 में यंग इंडिया में लिखते हैं कि रामराज्य से मेरा अर्थ हिंदू राज्य नहीं हैं बल्कि ईश्वरीय राज्य से है, भगवान के राज्य से है। गांधी का रामराज्य एक सच्चा लोकतंत्र है
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महात्मा गांधी - फोटो : Facebook/MokamOfficial
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विस्तार
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हे राम! महात्मा गांधी के ये आखिरी शब्द थे। अपने इन अन्तिम शब्दों के साथ महात्मा गांधी ने 30 जनवरी सन् 1948 के दिन   दुनिया को अलविदा कह दिया। गांधी एक सनातनी हिन्दू थे हिंदू धर्म में उनकी अटूट आस्था थी । उनके आदर्श "राम" और सपनों का भारत ’’रामराज्य’’ पर आधारित था। उनकी कल्पना के केन्द्र में एक ऐसे भारत का निर्माण रचा बसा था जिसमें असमानता, अशिक्षा, असन्तोष, अशान्ति, अनैतिकता, अंधकार की कोई जगह नहीं थी।

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एक ऐसा राज्य जिसे श्री राम ने अयोध्या लौटने के बाद स्थापित किया था पुनः भारत में स्थापित करना ही गाँधी के जीवन का सार दिखाई देता है। एक ऐसा अद्वितीय आदर्श राज्य जिसकी मिशाल आदिकाल से अनन्त कालों तक दी जाती रहेगी। गांधी उसी रामराज्य की कल्पना करते थे। महात्मा गांधी के जीवन के मूल में राम ही थे। यह इस बात की तसदीक है कि गांधी के अन्तिम शब्द भी हे राम! ही थे।

गांधी का राम के राज्य जैसी धार्मिक सदभाव की भावना रखते थे। दुनिया के ज्यादातर धर्मो का सार जानने, समझने के साथ, 1947 में हरिजन में गांधी कहते हैं कि धर्म नैतिकता सिखाता है वे कहते थे कि, मेरा हिन्दुत्व मुझे सभी धर्मो का आदर करना सिखाता है। रामराज्य का रहस्य इसी में निहित है।
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सबके अपने-अपने राम हैं, और सदियों से रहे हैं । किसी ने भक्ति में ढूंढा, किसी ने शक्ति में खोजा, किसी ने आत्मीयता तो किसी ने मानवता में राम को तलाश किया । गांधी के राम सबसे अलग हैं। गांधी के प्रातःकाल के भजनों में सबसे जनप्रिय ’रघुपति राघव राजा राम' है जिसकी एक पंक्ति 'ईश्वर अल्लाह तेरो नाम’ तक जाती है। उन्होंने अपने इस भजन के माध्यम से प्रत्येक दिन संपूर्ण विश्व को यह संदेश दिया की राम और रहीम में कोई भेद नहीं हैं। दोनों का सार एक ही है, यही भारतीय संस्कृति का आदर्श है।

गांधी के राम बेहद उदार, सौम्य और करूणानिधान हैं, मानवता के पोषक हैं, भावना के भण्डार हैं, अभय की अमोघ शक्ति हैं राजा होकर भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थापित करने वाले हैं। छोटे बड़े के भेद से परे हैं, नारी के सम्मान के रक्षक हैं, युवाओं के मार्गदर्शक हैं, बच्चों के प्रेरणा श्रोत हैं । गांधी वर्ण व्यवस्था के हिमायती हैं और  जाति-व्यवस्था के आलोचक हैं। गांधी सभी धर्म का सम्मान करते हुए हिन्दू धर्म को आदर्श मानते हैं।

गांधी सन् 1929 में यंग इंडिया में लिखते हैं कि रामराज्य से मेरा अर्थ हिंदू राज्य नहीं हैं बल्कि ईश्वरीय राज्य से है, भगवान के राज्य से है। गांधी का रामराज्य एक सच्चा लोकतंत्र है जिसमें समाज के हर तबके को समान प्रतिनिधित्व मिले, सभी के हितो का ध्यान रखा जाए वे कहते थे, ‘‘मेरी कल्पना के राम कभी इस पृथ्वी पर रहे हों या न रहे हों, रामराज्य का प्राचीन आदर्श निस्संदेह एक सच्चा लोकतंत्र है जिसमें क्षुद्रतम नागरिक भी लंबी-चौड़ी और महंगी प्रक्रिया के बिना शीघ्र न्याय पा सकता है। कवि के वर्णन के अनुसार रामराज्य में कुत्ते तक को न्याय मिला था।’’ (यंग, 19.09.1929, पृ. 305)

गांधी के विचारों ने न केवल भारत अपितु दुनिया भर के लोगों को न केवल प्रेरित करने का काम किया बल्कि दया, अहिंसा, सहिष्णुता, और शान्ति की संस्कृति को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गांधी का जीवन हाशिये पर खड़े लोगों और शोषित समाज की आवाज उठाने में समर्पित रहा। नये भारत का खाका तैयार करने में गांधी की अहम भूमिका है।
 

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महात्मा गांधी - फोटो : pib

आज की 21वीं सदी गांधी को और भी आशा से देखती हुई नजर आ रही है। गांधी ने सर्वधर्म समभाव अर्थात सभी धर्म समान हैं तथा सर्वधर्म सद्भाव अर्थात सभी धर्मों के प्रति सद्भावना बनाए रखने के लिए ’वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना को पुरजोर तरीके से संसार के समक्ष रखा। गांधी के विचारों का प्रभाव था कि दुनिया भर के समाज चिन्तकों को जैसे- मार्टिन लूथर किंग, नेल्सन मंडेला, दलाई लामा आदि को प्रेरित होने का मौका भारत में मिला जिन्होंने दुनिया भर के सामाजिक एवं राजनैतिक आंदोलनों को प्रभावित किया।  

गांधी का भारत एक ऐसे राष्ट्र की कल्पना है जो समानता से संपन्नता की ओर अग्रसर हो। समाज तरक्की की डींगे ना हाँके बल्कि वास्तव में तरक्की का पैमाना हर छोटे-बड़े व्यक्ति के हाथ में थमाएं। भारत आत्मनिर्भरता के शिखर पर सबको साथ लेकर आगे बढ़े। आधुनिकता और परम्परा में बेहतर ताल-मेल बैठाये। मशीन और मानव में झड़प न हो बल्कि मानव मशीन का नियंत्रक बने। गांधी का रामराज्य, राम का राज्य है अर्थात सुख, सम्पन्नता और शांति के वास वाला ईश्वर का राज्य और  गाँधी के राम मानवता को सर्व प्रमुख रखने वाले। गाँधी के सपनों का भारत एक ऐसा राष्ट्र, जहाँ व्यक्ति हिंसा, द्वेष से परे अहिंसा, प्रेम, त्याग की संस्कृति को विकसित करें। जिसमें सबके लिए बराबर का स्थान हो ताकि सबका विकास, सबके साथ हो सके।

गांधी का रामराज्य सबको समान अधिकार प्राप्त करने का अधिकार देता है। गांधी मानते थे कि राम और रहीम एक ही है। ईश्वर में भेद रखने के वे घोर विरोधी थे। वो कहते थे कि वो केवल एक ही ईश्वर को जानते हैं और वह है सत्य तथा सदाचार का ईश्वर। मानवता की सेवा संसार की सभी सेवाओं में सर्वोत्तम है। मानव कल्याण से भरा पूरा है गांधी का रामराज्य। निःसंदेह रामराज्य की कल्पना मानव सहित संसार के समस्त जीव के कल्याण के लिए ही रची गयी होगी। जिसमें विकास की धारा विश्वास के साथ बहने का संकल्प धारण किए निरन्तर बहती रहती है।

त्याग, सद्भावना, प्रेम, सहयोग, सर्मपण से लबरेज है गांधी का रामराज्य। जहां राजा और रंक में भेद नहीं है। व्यक्ति स्वयं के अधिकारों की वकालत और दूसरे के अधिकारों की हिफाजत स्वयं ही करता है। गांधी जीवनभर एक ऐसी समाज व्यवस्था के निर्माण में लगे रहे। उनके सपनों के भारत के केन्द्र में रहा ’’रामराज्य’’ अर्थात ’’श्रीराम’’ के वास वाला आदर्श राज्य, जिसे वह ईश्वर का राज्य कहकर संबोधित करते थे।

भारत हजारों वर्ष पूर्व विकसित देश के रूप में जाना, पहचाना गया। देवभूमि के रूप में संसार के क्षितिज में आज भी विद्यमान है। दुनिया के मानचित्र में भारत की अलग शान है। भारत को सोने के पंखों वाली चिड़िया का सम्बोधन अपनी व्यवहारिक, वैचारिक, मानविक, कौशल, सांस्कृतिक, सद्भावनात्मक रीति-नीति के फलस्वरूप ही मिला है। जो सदियों से यहां की सांस्कृतिक परम्परा में समाहित है।

गांधी का रामराज्य एक ऐसा आदर्श राज्य है जो किसी विशेष धर्म में बांधकर नहींं रखा जा सकता। वह नैतिकता, सामाजिक न्याय, मानव हितैषी और सच्चाई पर आधारित एक ऐसा राज्य है जहां बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, दरिद्रता और शोषण न हो। संसार का प्रत्येक व्यक्ति अवसर की समानता का बराबरी से अधिकारी है। गांधी इसकी वकालत करते हुए अनेक बार देखे जा सकते हैं। गांधी धर्म की नैतिकता की बात करते हैं। वे सभी सम्प्रदायों के मूल में निहित मानवता के हिमायती हैं। वो जानते थे कि धर्म नैतिकता से आरम्भ होता है। इसीलिए उनके उद्बोधनों में सबसे अंतिम पंक्ति में खड़ा  अंतिम व्यक्ति ही प्राथमिक स्थान प्राप्त व्यक्ति रहता था।

समाज में समानता का भाव उत्पन्न करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के भावों को विचारों को उचित स्थान मिलना अत्यन्त आवश्यक है। जिसका गांधी अपने विचार और व्यवहार में विशेष ध्यान देते थे। गांधी का रामराज्य युवाओं के हाथों में कौशल की कुंजी थमाने वाला है जिससे वे आधुनिक मशीनरीकरण के गुलाम न होकर मशीनों के निर्माणकर्ता बनेगें। मशीन और मानव के युद्ध में मानव ही विजयी हो ऐसी कल्पना गांधी ने की थी। वो भारतीयों की कर्मठता को भलि-भांति जानते थे इसीलिए कौशल शिक्षा के वकालत करते थे, गांधी ने कौशल और तकनीकी की तारतम्य वाली बुनियादी शिक्षा की नींव रखी। ताकि युवाओं को कला-कौशल से पारंगत कर विकसित भारत की आधारशिला रखी जा सके।

जनवरी 1948 में गाँधी ने राम के नाम के साथ संसार त्याग किया। गाँधी के रामराज्य की कल्पना में बसे भारत, के निर्माण के दायित्व का जिम्मा अब सरकार के साथ-साथ हर भारतीय का भी है। जिसमें मानवता का बोलबाला हो । संस्कार से रोजगार तक फले फूले। ना शोषित हो ना शोषण हो, ना भय हो ना हिंसा हो तभी सही मायने में गाँधी के राम आयेंगे और रामराज्य स्थापित होगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 
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