सबसे बड़ी बात मुख्यमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल पूरा करने की देवेंद्र फडणवीस की राह में शिवसेना एक बड़ी बाधा बन सकती है
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सबसे बड़ी बात मुख्यमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल पूरा करने की देवेंद्र फडणवीस की राह में शिवसेना एक बड़ी बाधा बन सकती है, विभाग बंटवारे में दोनों में पहले की तरह इस बार भी मतभेद हो सकता हैं। और खुद उद्धव ठाकरे कहते रहे हैं कि वे अपने पिता और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे को यह वचन दे चुके हैं कि राज्य में एक न एक दिन किसी शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनाकर छोड़ेंगे और कांग्रेस-एनसीपी भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए शिवसेना की अल्पमत संभावित सरकार को बाहर से समर्थन दे सकते हैं, क्योंकि मतगणना की पूर्व संध्या पर कांग्रेस नेता राजू वाघमार ने बयान दिया था कि आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस-एनसीपी शिवसेना को समर्थन दे सकते हैं।
निश्चित रूप से यह चुनाव देवेंद्र फड़णवीस के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा है। वह अपने दम पर बहुमत पाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन एनसीपी ने उनका खेल बिगाड़ दिया। पिछली बार भाजपा का मुख्यमंत्री पद का कोई चेहरा नहीं था और पार्टी का शिवसेना से गठबंधन नहीं था, फिर भी भाजपा 122 सीट जीतने में सफल रही थी।
इस बार भाजपा शिवसेना का चुनावी गठबंधन था। भाजपा निर्विवाद बड़े भाई की भूमिका में थी, जबकि शिवसेना छोटे भाई के किरदार में थी। भाजपा 164 सीटों पर चुनाव लड़ी, जबकि शिवसेना को 124 सीट से ही संतोष करना पड़ा। इस बार चुनाव देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लड़ा गया। इस परिस्थिति में फडणवीस पर सीटों की संख्या को 122 से ऊपर ले जाने की जिम्मेदारी थी, जिसमें वह सफल नहीं हुए, उल्टे सीटें 20 कम हो गईं। ऐसे में पार्टी के अंदर उनके विरोध जरूर मुखर होंगे। लिहाज़ा मुख्यमंत्री पर उनसे भी निपटने की जिम्मेदारी होगी।
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