कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी।
- फोटो : Facebook/Mamta Banerjee
पार्टी के एक नेता बताते हैं कि सरकार की ओर से महिलाओं के लिए शुरू भाग्यश्री और कन्याश्री जैसी योजनाओं ने विधानसभा चुनाव में महिला वोटरों को पार्टी की ओर खींचने में काफी अहम भूमिका निभाई थी। बीते विधानसभा चुनाव में जीत के बाद ममता ने महिलाओं के लिए गृहलक्ष्मी और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाएं शुरू की थी। इसके तहत हर महिला के बैंक खाते में पांच सौ से 1000 तक की रकम के अलावा मुफ्त राशन की व्यवस्था है। पार्टी लोकसभा चुनाव के प्रचार में इन दोनों योजनाओं को भी ममता की टाप गारंटी के तौर पर पेश करना चाहती है।
टीएमसी के तमाम नेताओं और मंत्रियों को प्रचार के अलावा अपनी नियमित प्रेस कांफ्रेंस में भी इन योजनाओं की चर्चा करने का निर्देश दिया गया है। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, मोदी की तमाम योजनाओं के जवाब में ममता की योजना सामने रख कर भाजपा से मुकाबले की रणनीति बनाई गई है। इसके तहत केंद्र की योजनाओं को फेल और ममता की योजनाओं को कामयाब बताया जाएगा।
दूसरी ओर, भाजपा ममता बनर्जी सरकार और उसके मंत्रियों के खिलाफ शिक्षक भर्ती घोटाला, चिटफंड घोटाला, राशन घोटाला, पशु तस्करी घोटाला और कोयला खनन घोटाला जैसे मुद्दे तो पहले से ही उठाती रही हैं। लेकिन अब उसे संदेशखाली के तौर पर महिला उत्पीड़न का एक ठोस मुद्दा मिल गया है। वह इस मुद्दे को अपने राजनीतिक हित में भुनाने में जुटी है। इसी कड़ी में पार्टी ने बशीरहाट संसदीय से संदेशखाली की एक पीड़िता रेखा पात्रा को अपना उम्मीदवार बनाया है। संदेशखाली इलाका बांग्लादेश की सीमा से सटी बशीरहाट संसदीय क्षेत्र में ही है।
भाजपा के इस आक्रामक प्रचार की काट के लिए तृणमूल कांग्रेस ने संदेशखाली में प्रचार की रणनीति में आमूल-चूल बदलाव किया है। पार्टी के नेता वहां यौन उत्पीड़न और अत्याचार के अभियुक्त शहाजांह शेख, शिबू हाजरा और उत्तम सर्दार जैसे पार्टी के निष्कासित नेताओं के कुकर्मों के लिए माफी मांगते हुए लोगों से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं। इलाके में पार्टी के पोस्टर या बैनर नहीं लगाए गए हैं। कोई जनसभा भी नहीं हो रही है। पार्टी के नेताओं के अलग-अलग गुट घर-घर जाकर लोगों को समझाने में जुटे हैं।
इस मुद्दे को बेअसर करने के लिए ही पार्टी ने बशीरहाट सीट पर पिछली बार जीतने वाली अभिनेत्री नुसरत जहां का टिकट काटते हुए इस बार पूर्व सांसद और जरी के कारोबारी हाजी नुरुल इस्लाम को दोबारा मैदान में उतारा है। इस्लाम वर्ष 2009 में इस सीट से जीत चुके हैं।
उसके बाद वर्ष 2016 और 2021 में उन्होंने लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीता है। संदेशखाली की घटना के दौरान नुसरत के रवैए से उन पर काफी सवाल उठे थे और लोगों में उनके प्रति भारी नाराजगी थी। संदेशखाली की महिलाएं जब यौन उत्पीड़न के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रही थी, नुसरत सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करने में मशगूल थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बंगाल में मोदी की गारंटी के मुकाबले ममता की गारंटी की रणनीति असरदार नजर आ रही है। लेकिन आम लोगों पर इसका कितना असर पड़ेगा, इस बारे में कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगी।
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