तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट पर बीते पांच वर्षों के दौरान अपनी स्थिति कुछ मजबूत की है।
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भाजपा की ताकत की काट के तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजबंशी समुदाय के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है। इनमें राजबंशी समुदाय के लिए अलग प्राथमिक स्कूलों की स्थापना और समुदाय के समाज सुधारक पंचानन बर्मा की जयंती पर सरकारी अवकाश की घोषणा करना शामिल है। ममता ने चाय बागान मजदूरों की मांगों पर विचार करने और न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का भी भरोसा दिया है।
भाजपा ने अलीपुरदुआर सीट पर अपने पिछले विजेता और केंद्रीय मंत्री जॉन बारला की जगह पार्टी के जिला प्रमुख मनोज तिग्गा को मैदान में उतारा है। इससे पार्टी में कुछ असंतोष है। बारला इस बार भी टिकट की आस लगाए बैठे थे। टीएमसी यहां इसी असंतोष को भुनाने का प्रयास कर रही है।
तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट पर बीते पांच वर्षों के दौरान अपनी स्थिति कुछ मजबूत की है। पार्टी के राज्यसभा सदस्य प्रकाश चिक बारिक की इलाके के चाय बागान मजदूरों पर खासी पकड़ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इलाके में गोरखा, कोच-राजबंशी और कामतापुरी जैसे जातीय समूहों के समर्थन ने भाजपा के पैरों तले की जमीन को मजबूत बनाया है। भाजपा वर्ष 2009 से ही गोरखा समुदाय के समर्थन से दार्जिलिंग सीट जीतती रही है।
जहां तक मुद्दों का सवाल है पहले दौर में जिन सीटों पर मतदान होना है वहां अलग केंद्रशासित प्रदेश की मांग के अलावा नागरिकता (संशोधन) कानून और चा बागानों और उशके मजदूरो की दुर्दशा ही सबसे बड़ा मुद्दा है। दोनों प्रमुख दावेदार यानी भाजपा और टीएमसी इलाके के विकास के लिए अपनी योजनाओं का जिक्र करते हुए लोगों से समर्थन मांग रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पहले दौर में भाजपा के सामने इन सीटो को बचाए रखने की चुनौती है। तृणमूल कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। अगर वह इन तीनों में से एक भी सीट भाजपा से छीन लेती है तो इसे उसकी बड़ी कामयाबी माना जा सकता है।
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