देश की बदनामी होती थी और विदेशों में लोग कहते थे कि भारतीयों को अभी तक मतदान करना नहीं आया। बाहुबली उम्मीदवारों में होड़ होती थी कि कौन ज्यादा बूथ कब्जा करके चुनाव जीत ले। लेकिन अब ये सारी कमियां दूर हो गईं हैं। अभी चुनाव आयोग तीसरी पीढ़ी की एम-3 मशीनें लेकर आया है जो पूरी तरह सुरक्षित हैं। आयोग को विश्वास है कि राजनीतिक दलों की शंकाएं और संदेह दूर होंगे। वीवीपैट की पर्चियों को लोगों को देने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस पर विचार जारी है।
रावत ने बताया कि 2017 में सभी राजनीतिक दलों की बैठक में तय हुआ था कि सभी चुनावों में वीवीपैट मशीनों का उपयोग होगा। चुनाव आयोग उस पर पूरी तरह अमल कर रहा है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव में हर मतदान केंद्र पर वीवीपैट युक्त मशीनों से ही मतदान कराया जाएगा।
मतगणना में संदेह होन पर कम से कम 25 फीसदी बूथों पर वीवीपैट पर्चियों की गिनती कराने की राजनीतिक दलों की मांग पर उन्होंने कहा कि यह नियम है कि जहां जिस मतदान केंद्र पर गड़बड़ी की शिकायत हो वहां निर्वाचन अधिकारी को यह अधिकार है कि वह वहां वीवीपैट की पर्चियों की गिनती कराने का आदेश दे सकता है। इसमें किसी प्रतिशत की सीमा नहीं है। मतगणना अधिकारी अगर चाहे तो शत प्रतिशत पर्चियों की गिनती करा सकता है।
टीएन शेषन ने चुनाव आयोग का जो दबदबा कायम किया था, उसमें कमी क्यों आई है, इस सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत कहते हैं कि यह सिर्फ एक धारणा है। उस एतिहासिक दौर के बाद जितने भी मुख्य चुनाव आयुक्त आए सभी ने आयोग के कामकाज में कुछ न कुछ योगदान दिया है। पूरे विश्व में भारत के चुनाव आयोग की छवि में इजाफा हुआ है और अब तक हुए सभी चुनाव निष्पक्षता और पारदर्शिता से संपन्न होते रहे हैं।
चुनाव आयोग पर सरकारी दबाव के आरोप को खत्म करने के लिए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भी सीबीआई निदेशक की तर्ज पर सरकार विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा करने के सवाल पर रावत ने कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रपति, संसद और सरकार पर निर्भर करता है।
पार्टियों के खर्च की सीमा तय करने के सवाल पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इसे लेकर आयोग ने अपने स्तर पर कई कदम उठाए हैं। उम्मीदवारों को सरकारी खर्च पर चुनाव लड़ने के सुझाव पर रावत का कहना है कि इसके लिए चाक चौबंद कानूनी इंतजाम जरूरी है। वरना इसका भी दुरुपयोग होगा।