बचाव अभियान के दौरान तत्कालीन डीआईजी संजय गुंज्याल और दूसरी तस्वीर में गौचर स्थित स्पेशल एयर फिल्ड प
- फोटो : कुणाल वर्मा
घाटी में बनाए गए थे स्पेशल हैलीपैड
एयरफोर्स ने 23 एमआई-17, 2 सी-130 हरक्यूलिस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सहित करीब 45 एयरक्राफ्ट को पूरी ताकत के साथ इस ऑपरेशन में झोंक दिया था। गौचर और धरासू में एडवांस्ड लैंडिग ग्राउंड तैयार किया। केदारघाटी में भी स्पेशल हैलीपैड बनाए गए थे। लोगों को बचाने की जिम्मेदारी पूरी करने के साथ-साथ एयरफोर्स की टीम घाटी में सूखी लकड़ियां भी पहुंचाने लगी थी।
एयरफोर्स की सहायता मिलने के बाद शवों के अंतिम संस्कार में तेजी आई। तत्कालीन डीआईजी संजय गुंज्याल को इस टीम को लीड करने की जिम्मेदारी मिली थी। इस जांबाज पुलिस अधिकारी ने अपने सहयोगियों के साथ कई दिनों तक केदारघाटी में खतरनाक और विपरीत परिस्थितियों के बीच कैंप किया।
खुद शवों को उठाकर चिता सजाई। सामूहिक चिताओं को राजकीय सम्मान देते हुए अपने साथियों के साथ उन्हें अंतिम सलामी दी। फिर उनका संस्कार किया। कई दिनों तक यही प्रक्रिया चलती रही।
उस वक्त के डीआईजी जीएस मातोर्लिया, डीआईजी अमित सिन्हा, एसएसपी निलेश आनंद भरणे, एसपी प्रदीप कुमार राय, एसपी मणिकांत मिश्रा, एसपी नवनीत भुल्लर, एसपी स्वतंत्र सिंह ये कुछ ऐसे नाम थे जो अपनी टीम के साथ आपदा के समय हीरो की तरह उभरे।
न नाम की चाहत, न टीवी पर चेहरा चमकाने की ख्वाहिश, न अखबार के पन्नों में जगह की तमन्ना और न कोई अवार्ड की हसरत। बेहद खतरनाक परिस्थितियों में इन्होंने अपने कर्तव्य को अंजाम दिया। तत्कालीन डीजीपी सत्यव्रत बंसल ने भी अपनी लीडरशिप क्वालिटी की बेहतरीन मिसाल कायम की।
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