दिग्विजय सिंह- ज्योतिरादित्य सिंधिया
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ज्योतिरादित्य सिंधिया कल तक भाजपा की नीतियों और नीयत पर सवाल खड़ा करते-करते कब भाजपा के साथ खड़े हो गए यह जनता को पता ही नहीं चला। जिस जनता की दुहाई देकर सिंधिया भाजपा में गए हैं, उस जनता को प्रेस कॉन्फ्रेंस से खबर हुई कि सिंधिया उनलोगों के लिए ऐसा कर रहे हैं। दरअसल, सिंधिया जनता जनार्दन के लिए नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बचाने के लिए कहीं से निकलकर कहीं पहुंच चुके हैं।
राजनीतिक प्रासंगिकता आपके राजनीतिक हस्तक्षेप से तय होती है और यह हस्तक्षेप करने की शक्ति आपको राजनीतिक पद से आती है। इस तरह दलों में आने और जाने वाले लोगों को भारतीय राजनीति गतिशील मानती है और एक जगह टिके रह जाने को जड़ मानती है। दरअसल, हमारी राजनीतिक संस्कृति में कार्यकर्ता के नेता बनने की रस्म तो है लेकिन नेता के कार्यकर्ता बन जाने का कोई रिवाज नहीं।
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