तथागत अवतार तुलसी का नाम आपको याद होगा। बिहार की राजधानी पटना के तथागत उस समय राष्ट्रीय फलक पर छा गए थे, जब उन्होंने मात्र 9 साल की उम्र में मैट्रिक और 12 साल की उम्र में एम.एससी की डिग्री हासिल कर ली थी। तथागत के नाम दो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड दर्ज हैं। छोटी उम्र में शिक्षा के क्षेत्र में बिहार से प्रतिभाएं चमकती रही हैं, लेकिन राज्य का एक क्रिकेटर राष्ट्रीय फलक पर पहली बार इतनी कम उम्र में चमका है। खिलाड़ी का नाम वैभव सूर्यवंशी है। समस्तीपुर के वैभव को इंडियन प्रमियम लीग (आईपीएल) की राजस्थान रॉयल्स टीम ने 1.10 करोड़ रुपए में खरीदा है।
पहले तथागत अवतार तुलसी की बात करते हैं। तथागत प्रारंभ से मेधावी छात्र थे। वर्ष 1997 में उन्हें राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से नवाजा गया। मात्र 21 साल की उम्र में तथागत ने फिजिक्स में पी.एचडी की डिग्री हासिल कर ली और 22 साल की उम्र में आईआईटी, बॉम्बे में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति मिल गई। जिस उम्र में बच्चे पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते, उसे उम्र में तथागत आईआईटी में पढ़ाने लगे थे। हालांकि, समय का चक्र ऐसा घूमा की तथागत की आईआईटी की नौकरी छूट गई। पिछले दिनों यह खबर आई थी कि तथागत अब बेरोजगार हैं। वो अपनी प्रसिद्धि को संभाल कर नहीं रख पाए।
13 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का वैभव भी इनदिनों चमक रहा है। मात्र 13 वर्ष का यह बच्चा नया-नया करोड़पति बना है। वैभव ने जिस छोटी उम्र में क्रिकेट की दुनिया में लंबी छलांग लगा दी है, उसके उदाहरण बेहद कम देखने को मिलते हैं। क्रिकेट के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को भी क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने में 14 साल लग गए थे।
14 साल की उम्र में सचिन तेंदुलकर ने रणजी ट्रॉफी में बॉम्बे (अब मुंबई) का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, पहले सीजन में उन्हें अंतिम ग्यारह में खिलाड़ियों में खेलने का मौका नहीं मिला था। 15 साल 232 दिन की उम्र में सचिन तेंदुलकर को गुजरात के खिलाफ बॉम्बे की रणजी टीम में खेलने का मौका मिला और उन्होंने इस मैच में नाबाद शतक लगाया था।
वैभव सूर्यवंशी को एक चमत्कारिक खिलाड़ी कहा जा सकता है। मात्र 8 वर्ष की उम्र में वैभव का समस्तीपुर जिले की अंडर-16 टीम में सिलेक्शन हो गया था। वैभव की उम्र को लेकर बीसीसीआई ने बोन टेस्ट भी कराया। वैभव अंडर-19 टीम के लिए भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। राजस्थान रॉयल्स टीम ने भी इस बाल खिलाड़ी को लेने से पहले नागपुर में ट्रायल लिया था। वैसे वैभव का बेस प्राइस 30 लाख रुपए था। इस कीमत पर दिल्ली कैपिटल्स ने बोली लगाई थी, लेकिन राजस्थान रॉयल्स ने वैभव को करोड़ रुपए से ऊपर बोली लगाकर ले लिया।
वैभव सूर्यवंशी को मंच मिल गया है, लेकिन उन्हें संभाल कर और अपनी ऊर्जा को बचाकर चलना होगा। प्रतिभा को बनाए रखना होगा। एकाएक मिली शोहरत को संभालना होगा। बेहद कम उम्र में विनोद कांबली, पृथ्वी शॉ जैसे प्रतिभावान खिलाड़ी भी क्रिकेट की दुनिया में आए और चमके थे, लेकिन वो लंबी पारी नहीं खेल सके।
पृथ्वी शॉ की तुलना तो सचिन तेंदुलकर से की जाने लगी थी, जबकि इस बार आईपीएल की बोली में पृथ्वी शॉ को खरीदार तक नहीं मिले। कुछ न कुछ विवाद उनके पीछे लग गए। 13 साल की उम्र में आईपीएल में शामिल होने वाले सबसे युवा वैभव सूर्यवंशी की अब अग्नि परीक्षा है। देखना यह होगा कि वैभव राजस्थान रॉयल्स के लिए अंतिम 11 खिलाड़ियों में शामिल होते हैं या बेंच पर बैठकर समय निकाल देते हैं।
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