थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन की ओर से जारी किए गए एक सर्वे में भारत को पूरी दुनिया में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश माना गया है। महिलाओं के प्रति यौन हिंसा, मानव तस्करी और यौन व्यापार में ढकेले जाने के आधार पर भारत को महिलाओं के लिए खतरनाक बताया गया है। इस सर्वे के अनुसार महिलाओं के मुद्दे पर युद्धग्रस्त अफगानिस्तान और सीरिया क्रमशः दूसरे और तीसरे, सोमालिया चौथे और सउदी अरब पांचवें स्थान पर हैं। इस सर्वे में 193 देशों को शामिल किया गया था।
इससे यह साबित होता है कि 2012 में दिल्ली में एक चलती बस में हुए सामूहिक बलात्कार के बाद अभी तक महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त काम नहीं किए गए हैं। 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा और उनके खिलाफ होने वाली हिंसा देश के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया था। अब प्रश्र यह है कि क्या भारत, सच में महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है?
पाश्चात्य देशों का भारत के प्रति रुख कभी सकारात्मक नहीं रहा है। आज भारत, जहां एक ओर विकास की लम्बी छलांग लगा रहा है वहीं दूसरी ओर कुछ विदेशी संस्थान दूर बैठ कर भारत के ऊपर नकारात्मक रिपोर्ट बना रहे हैं। कुछ घटनाएं वाकई में शर्मनाक हैं लेकिन कुछ घटनाओं के लिए पूरे देश को जिम्मेदार तो नहीं ठहराया जा सकता है। इस रिपोर्ट में आपराधिक घटनाओं में वृद्धि इसलिए दिखाई दे रही है, क्योंकि रिपोर्ट बनाने से पहले उनके द्वारा इस प्रकार का माहौल बनाया जाता है।
महिला सुरक्षा को लेकर सजग रहा है भारत
जहां तक बात आती है महिलाओं की सुरक्षा की तो पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अभूतपूर्व निर्णयों से महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई प्रबंध किए हैं। ऐसे में भारत के प्रति ऐसी नकारात्मक रिपोर्ट भारत में खबर बनाने की विदेशी संस्थाओं की सोची समझी साजिश के अलावा कुछ और प्रतीत नहीं होता। भारत में महिलाएं पहले की अपेक्षा ज्यादा सुरक्षित है। आज जहां महिलाएं नई ऊंचाइयों को छू रहीं हैं वहीं दूसरी ओर सुरक्षा के शीर्ष पदों में भी देश का गौरव बढ़ा रहीं हैं।
भारत में महिला सुरक्षा से जुड़े कानून की सूची बहुत लंबी है। इसमें हिंदू विडो रीमैरिज एक्ट 1856, इंडियन पीनल कोड 1860, मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1861, क्रिस्चियन मैरिज एक्ट 1872, मैरिड वीमेन प्रॉपर्टी एक्ट 1874,चाइल्ड मैरिज एक्ट 1929, स्पेशल मैरिज एक्ट 1954, हिन्दू मैरिज एक्ट 1955, फॉरेन मैरिज एक्ट 1969, इंडियन डाइवोर्स एक्ट 1969, मुस्लिम वुमन प्रोटेक्शन एक्ट 1986, नेशनल कमीशन फॉर वुमन एक्ट 1990, सेक्सुअल हर्रास्मेंट ऑफ वुमन एट वर्किंग प्लेस एक्ट 2013 आदि शामिल हैं।
इसके अलावा 7 मई 2015 को लोकसभा ने और 22 दिसम्बर 2015 को राज्यसभा ने जुवेनाइल जस्टिस बिल में भी बदलाव किया है। इसके अन्तर्गत यदि कोई 16 से 18 साल का किशोर जघन्य अपराध में लिप्त पाया जाता है तो उसे भी कठोर सजा का प्रावधान है।
देश में महिलाओं के प्रति खराब होते माहौल को बदलने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की ही नहीं अपितु आम आदमी की भी है। हम सभी को आगे आकर महिला सुरक्षा की लड़ाई में महिलाओं का साथ देना होगा तभी देश की मातृ शक्ति सिर उठा कर शान से चल सकेगी।
फिर कोई विदेशी संस्था भारत के खिलाफ इस तरह की नकारात्मक रिपोर्ट जारी करने से पहले सौ बार सोचेगी। अब महिलाओं को समझना होगा कि आज समाज में उनकी दयनीय स्थिति समाज में चली आ रही परम्पराओं का परिणाम है। इन परम्पराओं को बदलने का बीड़ा स्वयं महिलाओं को ही उठाना होगा।
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