नशे से बचाने के लिए कानून सख्त किए जाने के साथ साथ सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता, परिवारों की सजगता और सहयोग पर केंद्रित किया जाना चाहिए।
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मादक पदार्थों को लेकर कानून
कानून में मादक पदार्थ के ‘अवैध यातायात’ के परिभाषा में कुछ विसंगति थी। कमी को देखते हुए त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने ये आदेश दिया जब तक एनडीपीएस अधिनियम की धारा 27 A में उचित रूप से संशोधन करके उचित विधायी परिवर्तन नहीं होता है, तब तक एनडीपीएस अधिनियम की धारा 2 के खंड (viii-a) के उप-खंड (i) से (v) को निष्क्रिय कर दिया गया है। केंद्र सरकार को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (संशोधन) अध्यादेश 2021 के स्थान पर संसद में नया प्रारूप लाने की कोशिश हो रही है।
नशे से बचाने के लिए कानून सख्त किए जाने के साथ-साथ सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता, परिवारों की सजगता और सहयोग पर केंद्रित किया जाना चाहिए। इससे नशे के दुष्प्रभाव के प्रति लोगों को न केवल सचेत किया जा सकता है, बल्कि इस अवैध कारोबार की सूचना भी नियामक संस्थाओं तक पहुंचाई जा सकती है।
15 अगस्त 2020 को नशीले पदार्थों के सेवन की समस्या से निपटने के लिए सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय ने 272 जिलों में नशा मुक्त भारत अभियान शुरू किया।
वित्त वर्ष 2021-22 में नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (एनएपीडीडीआर) के तहत इन 272 जिलों में करीब 11.80 लाख लोग को लक्षित कर नशा मुक्त किया जाएगा। साथ ही 13,000 युवा स्वयंसेवियों को प्रशिक्षित कर इस समस्या के प्रति जागरूकता फैलाने का काम दिया गया था।
नशीले पदार्थों के उपभोग के मुद्दों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए लघु एवं दीर्घकालीन इलाज के साथ-साथ नशा मुक्ति के बाद पुनर्वास पर भी जोर देना चाहिए। आधे से अधिक लोग एक बार नशा को त्यागने के बाद फिर से नशे के चपेट में आ जाते हैं।
इस अभियान से जुड़े विभिन्न लोगों और संस्थाओं का क्षमता निर्माण, शैक्षणिक संस्थानों के साथ सकारात्मक साझेदारी, ड्रग्स हॉट स्पॉट वाले स्थान के स्पेशल ड्राइव और उपचार, पुनर्वास और परामर्श सुविधाओं में वृद्धि कर हम नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर लगाम कस सकते है।
आवश्यकता इस बात की है कि पथभ्रष्ट करने वाली इस मानसिक बीमारी को लेकर लोगों में जागरूकता लायी जाए तभी इस नशा रुपी संक्रमण से बचा जा सकेगा।
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