"बैट" - अगर हम क्रिकेट बैट की बात नहीं कर रहें हैं तो केवल यह शब्द ही प्रबल नकारात्मक भावनाओं को जगाने के लिए काफी होता है। सदियों से मिथकों में डूबा हुआ, चमगादड़ या बैट, घृणित जानवरों की सूची में शायद सबसे पहले गिना जाता है। पर सच तो यह है कि चमगादड़ घृणित बिलकुल भी नहीं। मैंने एक दशक से अधिक समय तक चमगादड़ों का अध्ययन किया है और हर बार उन्हें देखकर मेरा उनके प्रति लगाव और बढ़ गया है। ये छोटे पावरहाउस हैं जो जटिल सोनार सिस्टम की सहायता लेकर रात के आकाश में विचरण करते हैं।
जब हम सो रहे होते हैं, फल खाने वाले चमगादड़ जंगली केले, मैंग्रोव और महुआ जैसे व्यावसायिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण पेड़ों को परागित करते हैं। कीड़े-मकौड़े खाने वाले चमगादड़ हमें कपास, मक्का और चावल की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों से छुटकारा दिलाते हैं। जहाँ तक यह धारणा है कि चमगादड़ अशुद्ध जानवर हैं, मैंने शोध के लिए जिन चमगादड़ों को अपने हाथों में पकड़ा है, उनमें से अधिकांश के बाल इतने चिकने और रेशमी थे कि वे शैम्पू विज्ञापन मॉडल बनकर अपना करियर बना सकते थे!
चमगादड़ों का अध्ययन करने और लोगों से बात करने के अपने अनुभवों के माध्यम से, मैंने महसूस किया है कि चमगादड़ों से नफरत करने वाले अधिकांश लोगों ने उन्हें कभी करीब से नहीं देखा है। इस चित्र-कथा की मदद से, मैं चमगादड़ों को सौम्य और नम्र जानवरों के रूप में दिखाना चाहता हूं, जिससे यह घृणा पैदा करने के बजाय, लोगो के मन में विस्मय और आश्चर्य पैदा कर सकें।
1. भारतीय फ्लाइंग फॉक्स (Pteropus medius)
चार फीट के विशाल पंखों वाला यह विशाल चमगादड़ हमारी सबसे परिचित प्रजाति है। जैसा कि नाम से पता चलता है, ये चमगादड़ सिर्फ पंख वाले कुत्ते हैं - लेकिन शाकाहारी कुत्ते! फ्लयिंग फॉक्स विशेष रूप से फलों और पत्तियों का भोजन करते हैं। जब आप महानगर के ट्रैफिक में फंसे होते हैं, तो ये सुंदर चमगादड़ अक्सर एक दिशा में 50 किमी तक लंबी दूरी अपने पसंदीदा फलदार पेड़ों तक पहुंचने के लिए तय करते हैं। फलों और फूलों को खाकर और इतनी लंबी दूरी तय करके, फ्लयिंग फॉक्स पेड़ों को परागित करते हैं और फलों के बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं। इससे हमारे शहरों को हरा-भरा करने के लिए अधिक पेड़ लगाने में मदद मिलती है। वही दूसरी ओर, उनकी इसी फल खाने की आदत के कारण दुर्भाग्यवश उन्हें फल उत्पादक पसंद नहीं करते।
जैसे-जैसे तापमान बढ़ना शुरू होता है, फ्लयिंग फॉक्स को देखने का सबसे अच्छा तरीका शाम के समय अपनी नजदीकी झील पर इंतजार करना है। सूर्यास्त के समय, आपको ये आते और पानी पीने के लिए उतरते दिखाई देंगे।
सभी जंगली जानवरों की तरह, चमगादड़ के शरीर में भी वायरस पनपते हैं। फ्लयिंग फॉक्स के शरीर में निपाह वायरस पाए जाते हैं। ध्यान में रखने वाली बात यह है कि, मनुष्यों में बीमारी का संचरण दुर्लभ है और इसे बुनियादी स्वच्छता नियमों का पालन करके रोका जा सकता है; जैसे कि चमगादड़ की बस्तियों या मल के निकट संपर्क में न आना और चमगादड़ (या उस मामले में किसी भी जानवर) द्वारा काटे गए गिरे हुए फलों का सेवन न करना।
2. भारतीय पिग्मी चमगादड़ (Pipistrellus tenuis)
यदि भारत में सबसे परिचित चमगादड़ फ्लाइंग फॉक्स (हमारी सबसे बड़ी प्रजाति) है, तो दूसरी सबसे परिचित प्रजाति है सबसे छोटी प्रजाति - भारतीय पिग्मी चमगादड़। पंखों वाला, मुस्कुराते हुए चूहे की तरह दिखने वाला यह चमगादड़ सिर से पैर तक केवल 4 सेमी का है और इसका वजन मात्र 4 ग्राम है - जो कोलगेट टूथपेस्ट की सबसे छोटी ट्यूब से भी हल्का है! पर उनके छोटे आकार पर मत जाईये। हर रात, एक अकेला छोटा चमगादड़ पतंगे, छोटे भृंग और यहां तक कि मच्छरों जैसे एक हजार से अधिक कीड़ों को खा सकता है। इस क्रिया को आप आपके नज़दीकी स्ट्रीटलाइट के नीचे खड़े होकर
लाइव देख सकते हैं, जहां ये चमगादड़ अपने उच्च स्वर वाले अल्ट्रासोनिक संकेतों का उपयोग कर इधर से उधर उड़ान भरते हैं और प्रकाश की ओर आकर्षित कीड़ों को पकड़ने के लिए पैंतरेबाज़ी लगाते हैं। वे हमारे घरों और अपार्टमेंटों में किसी एकांत अंधेरे कोने या दरार में सोकर दिन का समय बिताते हैं। एक बार जब मैं कुछ दिनों के लिए दिल्ली में रह रहा था तो मैंने एक चौथी मंजिल के फ्लैट की बालकनी में एक सिक्के के आकार के छेद के अंदर एक पिग्मी चमगादड़ को सोते हुए पाया।
3. कोलार लीफ-नोज्ड चमगादड़/कोलार पत्ती-नाक वाला चमगादड़ (Hipposideros hypophyllus)
हमारे सबसे आम चमगादड़ों के बारे में जानने के बाद, आइए सबसे दुर्लभ और सबसे लुप्तप्राय चमगादड़ों की बात करते हैं। कोलार लीफ-नोज्ड बैट या पत्ती नाक वाले चमगादड़ एक छोटी प्रजाति है जिनका वजन लगभग 10 ग्राम होता है। पत्ती-नाक वाले चमगादड़ों का नाम उनकी पतली और गोल नाक के कारण रखा गया है जो पत्तियों से मिलती जुलती है। इनके नाक के छेद इस जटिल नाक के ऊपर की ओर होते हैं। अपने मुँह के माध्यम से अल्ट्रासोनिक ध्वनि निकालने के बजाय, पत्ती-नाक वाले चमगादड़ अपनी नाक के माध्यम से ध्वनि निकालते हैं।
ऐसा करने से वे 180 किलोहर्ट्ज़ तक की ध्वनि उत्पन्न कर सकते हैं - जो हमारी सुनने की क्षमता से नौ गुना अधिक ऊंची ध्वनि है! जबकि अधिकांश अन्य पत्ती-नाक वाले चमगादड़ देश के विभिन्न हिस्सों में आम हैं, कोलार पत्ती-नाक वाले चमगादड़ केवल बेंगलुरु और चेन्नई के बीच स्थित खनन शहर कोलार की दो गुफाओं में पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इनकी संख्या सिर्फ 250 तक हो सकती है और इनके लिए सबसे बड़ा खतरा ग्रेनाइट खनन है। अच्छी बात यह है कि हाल के वर्षों में, उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद और बैट कंजर्वेशन इंडिया ट्रस्ट के वैज्ञानिकों के प्रयासों से इस गंभीर रूप से लुप्तप्राय चमगादड़ की रक्षा के लिए गुफाओं को सुरक्षा प्रदान किया जा रहा है।
4. ग्रेटर माउस-टेल्ड चमगादड़ (Rhinopoma microphyllum)
उत्तर भारत के खंडहरों और किलों में ग्रेटर माउस-टेल्ड चमगादड़ रहते हैं। जैसा कि नाम से पता चलता है, इस चमगादड़ की एक लंबी, चाबुक जैसी पूंछ होती है जिसे यह अक्सर हिलाता है। खुशी में अपनी पूंछ हिलाने वाले कुत्ते के विपरीत, यह चमगादड़ अपनी पूंछ का उपयोग एक अलग उद्देश्य के लिए करते हैं। पूंछ के सिरे पर महीन बाल होते हैं जो - बिल्ली की मूंछों की तरह - चमगादड़ को अपने आस-पास के परिवेश को समझने में मदद करती हैं।
जब यह चमगादड़ अपने निवास स्थान पर मनुष्यों या किसी शिकारी द्वारा परेशान किये जाते हैं, तो यह अपने पीछे की दीवारों को महसूस करने के लिए अपनी पूंछ का उपयोग करते हैं और एक दरार पाकर चुपचाप पीछे कि ओर चले जाते हैं। इसके अलावा, जब कीड़ों का शिकार करने के लिए ये उड़ान भरते हैं, तो पूंछ का उपयोग स्थिरता बनाए रखने और दिशा बदलने के लिए किया जाता है। माउस-टेल्ड चमगादड़ विशेष रूप से देश के शुष्क क्षेत्रों में पाए जाते हैं। नागपुर के एक धूप-प्रेमी, बारिश-नापसंद करने वाले व्यक्ति के रूप में मैं उनकी इस जीवनशैली को पसंद करता हूं!