प्रेम अभिव्यक्ति के बीच बारबेट की एक जोड़ी
- फोटो : तस्वीर: रोहित यादव
प्रेमाभिव्यक्ति और छोटा बसंता
नर और मादा दोनों समान दिखते हैं। वे गाते हुए, गला फुलाकर, सिर झुकाकर और पूंछ हिलाकर एक प्रेमालाप अनुष्ठान करते हैं। वे चोंच से एक-दूसरे के पर भी सवांरते है। वे अपना घोंसला बनाने के लिए एक पेड़ की शाखा में छेद करते हैं। इसलिए, कोपर्समिथ बारबेट्स के लिए मृत लकड़ी वाले आवास आवश्यक हैं। भारत में मुख्य रूप से फरवरी से अप्रैल तक इनका प्रजनन का मौसम होता है। मादा छेद के अंदर तीन से चार अंडे देती है। दोनों नर और मादा लगभग दो सप्ताह तक अंडे सेते हैं। बारबेट के चूज़े लगभग 36 दिनों के बाद उड़ने लगते है।
शिकारी पक्षी कभी-कभी वयस्क बारबेट को पकड़ लेते है। वे मनुष्यों के साथ किसी भी प्रत्यक्ष संघर्ष में शामिल नहीं हैं, और IUCN रेड लिस्ट के लिस्ट कंसर्न (सबसे कम खतरे वाली प्रजाति) श्रेणी में सूचीबद्ध हैं। लेकिन वे पेड़ों के कटने और कीटनाशकों के जहर से खतरों का सामना करते हैं। तो, क्या आप इसकी लयबद्ध ध्वनि को अनदेखा करना पसंद करेंगे या इसकी सुंदरता पर अचंभा करेंगे?
लेखक वर्तमान में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल से वन प्रबंधन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कर रहे हैं।
यह श्रंखला 'नेचर कन्ज़र्वेशन फाउंडेशन (NCF)' द्वारा चालित 'नेचर कम्युनिकेशन्स' कार्यक्रम की एक पहल है। इस का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में प्रकृति से सम्बंधित लेखन को प्रोत्साहित करना है। यदि आप प्रकृति या पक्षियों के बारे में लिखने में रुचि रखते हैं तो ncf-india से संपर्क करें।
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