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50 के सचिन: बाजार से बड़ा ब्रैंड, क्रिकेटर से बड़ा व्यक्तित्व और लोकप्रियता से पार होता एक सितारा

सार

क्रिकेट के मास्टर कहे जाने वाले सचिन ने केवल क्रिकेट खेला ही नहीं बल्कि बतौर खिलाड़ी इस खेल के सारे आयामों को प्रभावित किया। समाज, राष्ट्र और पूरे देश की संस्कृति सचिन से प्रभावित रही। यही नहीं कभी आर्थिक विषमता, बेकारी, बंद होती कंपनियों और मंदी के घटाटोप अंधेरे से भरे एक दौर में भारतीय क्रिकेट का यह सबसे महान खिलाड़ी पूंजी और समृद्धि का एक ऐसा अद्भुत टिमटिमाता तारा बनकर उभरा जिसने केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व क्रिकेट को रौशन किया है।

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क्रिकेट के मास्टर कहे जाने वाले सचिन ने केवल क्रिकेट खेला ही नहीं बल्कि बतौर खिलाड़ी इस खेल के सारे आयामों को प्रभावित किया है। - फोटो : instagram/sachintendulkar
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विस्तार
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विश्व क्रिकेट के सबसे जगमगाते सितारे सचिन तेंदुलकर आज 50वर्ष के हो गए हैं। अपने आयुष्य का अर्द्धशतक पूरा करने वाले इस करिश्माई भारतीय क्रिकेटर की दो दशकों से ज्यादा लंबी चली क्रिकेट की यात्रा जितनी उनके आला दर्जे के खेल और लगातार उम्दा प्रदर्शनों की फेहरिस्त का लेखा-जोखा है, उससे कहीं गुणा ज्यादा उन कीर्तिमानों की पर्वत श्रृंखला का विस्तार है जो पूरी दुनिया के क्रिकेट को गौरव से भर देती है।

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एक ऐसे दौर में जब खेल का मतलब देशभक्ति रहा, राष्ट्र की सेवा रहा और हर प्रशंसक के मन में देश के प्रति भावना और आत्मीयता का आलोक पैदा करता रहा और जब क्रिकेट की दीवानगी इस देश में सारे विरोधाभासों, विषमताओं और सीमाओं को लांघकर लोगों के दिलों में प्यार और मोहब्बत को स्वर घोला करती थी तब सचिन तेंदुलकर देश की एकता और सांप्रदायिक सौहार्द्र की सबसे हरी-भरी डोर थे।

दर्शक-दीर्घाओं से लेकर गली-मोहल्लों, चौक-चौराहों, गांव-कस्बों के भीतर छोटे कद के इस खिलाड़ी को देखकर कभी 100 करोड़ से ज्यादा लोगों का यह देश, जाति, धर्म, संप्रदाय और लिंगभेद भुलाकर एकता के उस सूत्र में समाहित होता रहा है जिससे यह देश एकता में अनेकता के जयघोष के साथ नक्शे पर उतरता रहा है।
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अपने आयुष्य के सबसे आरंभिक बिंदु से क्रिकेट की पिच पर बल्ला थामकर विश्व क्रिकेट के आकाश में नए नक्षत्रों की तरह उदीयमान होने वाले मुंबई के 14 साल के इस लड़के का करियर बतौर एक खिलाड़ी के शानदार खेलयात्रा की ही बानगी नहीं है बल्कि एक ईमानदार, पारदर्शी और गरिमामयी खिलाड़ी व्यक्तित्व की भी शिखर यात्रा है जिसने केवल क्रिकेट ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के खेल जगत को प्रभावित किया है।

सच कहा जाए तो भारत रत्न सचिन रमेश तेंदुलकर सही मायनों में भारत की उस गौरवशाली परंपरा और श्रेष्ठतम मूल्यों का भी प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्तित्व व चेहरा है, जिसके बूते हाशिए से लेकर उन्नति की पताका फहराने वाले करोड़ों भारतीय खुद को अभिमान से भर सकते हैं।
 

क्रिकेट में कीर्तिमानों, रिकॉर्ड्स की जीती-जागती जीवंत पर्वत श्रृंखला को रचने वाला यह सृजनहार, क्रिकेट के आंकड़ों में भी भारत रत्न है और विश्व क्रिकेट की सबसे हरी-भरी गौरवपूर्ण संपदा है। 14 की उम्र से 40 साल की फिटनेस के साथ 24 साल का लंबा करियर, विश्व रिकॉर्ड का शुरुआती सफर, पहले रणजी ट्रॉफी और ईरानी कप मैच में शतक जड़ने से लेकर 16 की उम्र में 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ पहला अंतर्राष्ट्रीय मैच खेलने तक सबकुछ आश्चर्य से भरने वाला ही रहा है। 

 

सचिन तेंदुलकर का पहला शतक/भारत रत्न सचिन तेंदुलकर एक स्क्रीन में लगातार बदल रही लोकप्रियता में कभी कैद नहीं हुए - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल, अपने खेल जीवन की सांझ तक सचिन के नाम सबसे ज्यादा वनडे, सबसे ज्यादा टेस्ट, सबसे ज्यादा रन, सबसे ज्यादा शतक दर्ज हो चुके थे। हालांकि कीर्तिमानों की यह श्रृंखला टूटने के लिए ही होती है और भविष्य में सचिन के ये सारे रिकॉर्ड्स टूटेंगे ही, लेकिन अपने व्यक्तित्व के चलते भारतीय क्रिकेट का यह सबसे चमकता सितारा इतनी सकारात्मक ऊर्जा और रौशनी से भरा है कि उसके करियर की बराबरी करना मुश्किल है।
 
क्रिकेट के मास्टर कहे जाने वाले सचिन ने केवल क्रिकेट खेला ही नहीं बल्कि बतौर खिलाड़ी इस खेल के सारे आयामों को प्रभावित किया। समाज, राष्ट्र और पूरे देश की संस्कृति सचिन से प्रभावित रही। यही नहीं कभी आर्थिक विषमता, बेकारी, बंद होती कंपनियों और मंदी के घटाटोप अंधेरे से भरे एक दौर में भारतीय क्रिकेट का यह सबसे महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर पूंजी और समृद्धि का एक ऐसा अद्भुत टिमटिमाता तारा बनकर उभरा जिसने केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व क्रिकेट को रौशन किया है।

इस तारे की मद्धम और झीनी रौशनी से देसी अर्थव्यवस्था जगमग होती रही है, तो दुनिया के कई कंगाल होते, तंगी झेल रहे क्रिकेट बोर्ड भी राहत की रौशनी पाते रहे हैं। बताने की जरूरत नहीं कि रोजाना देश के आर्थिक महाशक्ति होने के अलापे जाने वाले राग के बीच बीसीसीआई सालों से क्रिकेट की आर्थिक महाशक्ति है।
 
सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड की दुनिया में कुबेरपति कहे जाने वाले सचिन ने कभी घरेलू मैदान मुंबई के वानखेडे पर अपना 200वां अंतिम टेस्ट मैच खेला था और उस वक्त उनके संन्यास के बाद उनकी क्रिकेट की दुनिया में उनकी प्रासंगिकता पर भी सवाल उठे थे। पूछा जा रहा था कि पिछले डेढ़ से ज्यादा दशकों से भारत में कई बड़ी देसी विदेशी कंपनियों के लिए मुनाफे का मोहजाल फैलाने वाले सचिन की लोकप्रियता का ग्राफ क्या कम होगा?  क्या विज्ञापन की दुनिया के इस किमियागार पर पहले की तरह कंपनियां मेहरबान होंगी? और क्या भारतीय खेलों की दुनिया के सबसे बड़े ब्रैंड स्वर्गीय रमेश तेंदुलकर के इस छोटे लड़के की विज्ञापनी माया ढलने तो नहीं लगेगी?
 
दरअसल, रन बनाने की मशीन कहे जाने वाले सचिन जब तक पिच पर रहे तब तक मुनाफे की बावली कंपनियां सचिन के पैड, बैट, हैलमेट, जूते और शर्ट के खीसे तक को भुनाती रही, लेकिन बाद में सचिन के विनम्र, उदार और हमेशा कमजोर की सहायता के लिए खड़े रहने वाले इस ब्रैंड ने अपनी काया और आत्मा का आकार इतना बड़ा कर लिया कि आज 50 के हो चुके सचिन बाजार से बड़ा ब्रैंड तो हैं ही बल्कि आज भी मीडिया की सुर्खियों में रहने सितारा हैं।
 
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सचिन तेंदुलकर अपने परिवार के साथ - फोटो : Twitter/@sachin_rt
जाहिर है पूंजीवादी व्यवस्था में जब मुनाफे की कोई निष्ठा और ईमान नहीं है, वह हर कदम पर अवसरवादी है, ऐसे में आज अपना 50वां जन्मदिन मना रहे भारत रत्न सचिन तेंदुलकर एक स्क्रीन में लगातार बदल रही लोकप्रियता में कभी कैद नहीं हुए बल्कि इस शानदार खिलाड़ी ने अपने खिलाड़ी और व्यक्तित्व से उपजी प्रतिष्ठा से ब्रैंडिंग का वह सरताज बन गए हैं कि फिक्सिंग, सट्टेबाजी और आईपीएल जैसे फॉर्मेट की चमकती रातों में लगातार काले हो रहे क्रिकेट में भी वे आज चारित्रिक रूप से उतने ही धवल, उजले और सम्मानित होकर हमारे सामने हैं, जितना कि कोई अंजान नया चेहरा। 
 
एक शख्सियत की एक बेहतरीन क्रिकेटर होने से बड़ी खासियत यही रही है कि पिछले 24 सालों के उनके क्रिकेट करियर में ना उनके चरित्र पर न कोई दाग लगा, न वे किसी सट्टेबाजी या फिक्सिंग स्कैंडल में फंसे, यहां तक कि एक सिंगल फोटो भी ऐसी नहीं रही जो उनके नाम पर विवाद पैदा करती।

विनम्रता, निष्ठा, प्रतिष्ठा और चरित्र सचिन की वास्तविक ब्रैंडिंग करते हैं। एक नजरिए से देखा जाए तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद के सर्वोच्च सदन राज्यसभा में सदस्य के रूप में रहने वाले दुनिया के और भी बड़े व प्रतिष्ठित ब्रैंड बनकर सामने आए हैं।
 
अपने संन्यास के वक्त मुंबई में कांदीवली जिम खाना क्लब उनके नाम से हो जाने की आहट उनकी कीर्ति की पवित्रता का विस्तार ही रहा है, जो यहां तक पहुंचकर इस खिलाड़ी को इस रूप में और महान बना रही है।
 
बहरहाल, अपने जीवन का अर्द्धशतक पूर्ण करने वाले 50 वर्षीय मुंबई के इस पोरगे को और देशभक्त को शुभकामनाएं, इस इच्छा के साथ की उनके क्रिकेट से भी ज्यादा प्रभावशाली उनके व्यक्तित्व का विस्तार होगा और वह खेल की दुनिया में अतुलनीय होगा। 
 
जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं सचिन..!
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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