सचिन तेंदुलकर का पहला शतक/भारत रत्न सचिन तेंदुलकर एक स्क्रीन में लगातार बदल रही लोकप्रियता में कभी कैद नहीं हुए
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दरअसल, अपने खेल जीवन की सांझ तक सचिन के नाम सबसे ज्यादा वनडे, सबसे ज्यादा टेस्ट, सबसे ज्यादा रन, सबसे ज्यादा शतक दर्ज हो चुके थे। हालांकि कीर्तिमानों की यह श्रृंखला टूटने के लिए ही होती है और भविष्य में सचिन के ये सारे रिकॉर्ड्स टूटेंगे ही, लेकिन अपने व्यक्तित्व के चलते भारतीय क्रिकेट का यह सबसे चमकता सितारा इतनी सकारात्मक ऊर्जा और रौशनी से भरा है कि उसके करियर की बराबरी करना मुश्किल है।
क्रिकेट के मास्टर कहे जाने वाले सचिन ने केवल क्रिकेट खेला ही नहीं बल्कि बतौर खिलाड़ी इस खेल के सारे आयामों को प्रभावित किया। समाज, राष्ट्र और पूरे देश की संस्कृति सचिन से प्रभावित रही। यही नहीं कभी आर्थिक विषमता, बेकारी, बंद होती कंपनियों और मंदी के घटाटोप अंधेरे से भरे एक दौर में भारतीय क्रिकेट का यह सबसे महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर पूंजी और समृद्धि का एक ऐसा अद्भुत टिमटिमाता तारा बनकर उभरा जिसने केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व क्रिकेट को रौशन किया है।
इस तारे की मद्धम और झीनी रौशनी से देसी अर्थव्यवस्था जगमग होती रही है, तो दुनिया के कई कंगाल होते, तंगी झेल रहे क्रिकेट बोर्ड भी राहत की रौशनी पाते रहे हैं। बताने की जरूरत नहीं कि रोजाना देश के आर्थिक महाशक्ति होने के अलापे जाने वाले राग के बीच बीसीसीआई सालों से क्रिकेट की आर्थिक महाशक्ति है।
सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड की दुनिया में कुबेरपति कहे जाने वाले सचिन ने कभी घरेलू मैदान मुंबई के वानखेडे पर अपना 200वां अंतिम टेस्ट मैच खेला था और उस वक्त उनके संन्यास के बाद उनकी क्रिकेट की दुनिया में उनकी प्रासंगिकता पर भी सवाल उठे थे। पूछा जा रहा था कि पिछले डेढ़ से ज्यादा दशकों से भारत में कई बड़ी देसी विदेशी कंपनियों के लिए मुनाफे का मोहजाल फैलाने वाले सचिन की लोकप्रियता का ग्राफ क्या कम होगा? क्या विज्ञापन की दुनिया के इस किमियागार पर पहले की तरह कंपनियां मेहरबान होंगी? और क्या भारतीय खेलों की दुनिया के सबसे बड़े ब्रैंड स्वर्गीय रमेश तेंदुलकर के इस छोटे लड़के की विज्ञापनी माया ढलने तो नहीं लगेगी?
दरअसल, रन बनाने की मशीन कहे जाने वाले सचिन जब तक पिच पर रहे तब तक मुनाफे की बावली कंपनियां सचिन के पैड, बैट, हैलमेट, जूते और शर्ट के खीसे तक को भुनाती रही, लेकिन बाद में सचिन के विनम्र, उदार और हमेशा कमजोर की सहायता के लिए खड़े रहने वाले इस ब्रैंड ने अपनी काया और आत्मा का आकार इतना बड़ा कर लिया कि आज 50 के हो चुके सचिन बाजार से बड़ा ब्रैंड तो हैं ही बल्कि आज भी मीडिया की सुर्खियों में रहने सितारा हैं।
सचिन तेंदुलकर अपने परिवार के साथ
- फोटो : Twitter/@sachin_rt
जाहिर है पूंजीवादी व्यवस्था में जब मुनाफे की कोई निष्ठा और ईमान नहीं है, वह हर कदम पर अवसरवादी है, ऐसे में आज अपना 50वां जन्मदिन मना रहे भारत रत्न सचिन तेंदुलकर एक स्क्रीन में लगातार बदल रही लोकप्रियता में कभी कैद नहीं हुए बल्कि इस शानदार खिलाड़ी ने अपने खिलाड़ी और व्यक्तित्व से उपजी प्रतिष्ठा से ब्रैंडिंग का वह सरताज बन गए हैं कि फिक्सिंग, सट्टेबाजी और आईपीएल जैसे फॉर्मेट की चमकती रातों में लगातार काले हो रहे क्रिकेट में भी वे आज चारित्रिक रूप से उतने ही धवल, उजले और सम्मानित होकर हमारे सामने हैं, जितना कि कोई अंजान नया चेहरा।
एक शख्सियत की एक बेहतरीन क्रिकेटर होने से बड़ी खासियत यही रही है कि पिछले 24 सालों के उनके क्रिकेट करियर में ना उनके चरित्र पर न कोई दाग लगा, न वे किसी सट्टेबाजी या फिक्सिंग स्कैंडल में फंसे, यहां तक कि एक सिंगल फोटो भी ऐसी नहीं रही जो उनके नाम पर विवाद पैदा करती।
विनम्रता, निष्ठा, प्रतिष्ठा और चरित्र सचिन की वास्तविक ब्रैंडिंग करते हैं। एक नजरिए से देखा जाए तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद के सर्वोच्च सदन राज्यसभा में सदस्य के रूप में रहने वाले दुनिया के और भी बड़े व प्रतिष्ठित ब्रैंड बनकर सामने आए हैं।
अपने संन्यास के वक्त मुंबई में कांदीवली जिम खाना क्लब उनके नाम से हो जाने की आहट उनकी कीर्ति की पवित्रता का विस्तार ही रहा है, जो यहां तक पहुंचकर इस खिलाड़ी को इस रूप में और महान बना रही है।
बहरहाल, अपने जीवन का अर्द्धशतक पूर्ण करने वाले 50 वर्षीय मुंबई के इस पोरगे को और देशभक्त को शुभकामनाएं, इस इच्छा के साथ की उनके क्रिकेट से भी ज्यादा प्रभावशाली उनके व्यक्तित्व का विस्तार होगा और वह खेल की दुनिया में अतुलनीय होगा।
जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं सचिन..!
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