अंतिम यात्रा पर सीडीएस बिपिन रावत।
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इस खबर ने सबको रुला दिया
वहीं, घड़ी में शाम के 6 बजते ही वो हो गया जो कोई नहीं चाहता था। खबर सामने थी कि जनरल बिपिन रावत अब नहीं रहे। टीवी की ब्रेकिंग से न्यूज वेबसाइट की हैडिंग तक, हर जगह ये खबर छा गई थी। हर देशवासी दुखी हो गया, किसी की आंखें नम थी तो कोई मन ही मन रो रहा था, क्योंकि खबर दुखदायी थी।
जनरल अब नहीं रहे, हमारे बीच नहीं रहे और अब कुछ है तो उनकी यादें, उनके द्वारा किए गए नेक काम, उनके द्वारा देश को आगे बढ़ाने की चाह और भी बहुत कुछ। आज पूरे देश की आंखें नम है और इन्हीं नम आंखों के साथ आज लगभग शाम 5 बजे देश जनरल बिपिन रावत को अलविदा कहेगा, क्योंकि जनरल साहब अपनी अंतिम यात्रा पर हैं।
जब एक व्यक्ति सेना में भर्ती होता है, तो उसे इस बात का हमेशा पता होता है कि मौत उसे कभी भी अपने आघोष में ले सकती है। बावजूद इसके वो कभी देश की सेवा करने से पीछे नहीं हटते, और दिन-रात देश के लिए लगे रहते हैं। वहीं, जब देश के वीर सपूतों की इस तरह से मृत्यु होती है, तो इसका दुख देश को ज्यादा होता है, जो मौजूदा समय में साफ देखा जा सकता है।
नहीं भुलाई जा सकती शाहदत
जनरल बिपिन रावत के अलावा 12 लोगों की भी जान इस हेलिकॉप्टर हादसे में चली गई। इसमें जनरल बिपिन रावत, मधुलिका रावत (जनरल रावत की पत्नी), ब्रिगेडियर एल. एस. लिद्दर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, विंग कमांडर पी. एस. चौहान, स्क्वॉड्रन लीडर के. सिंह, जेडब्ल्यूओ दास, जेडब्ल्यूओ प्रदीप ए., हवलदार सतपाल, नायक गुरसेवक सिंह, नायक जितेंद्र कुमार, लांस नायक विवेक कुमार और लांस नायक साइ तेजा भी शामिल थे। ये सभी अब हमारे बीच नहीं रहे।
कुछ काम अधूरे रह गए
याद आएंगे जनरल बिपिन रावत द्वारा किए गए काम, कैसे उन्होंने देश को दुश्मनों की बुरी नजरों से सुरक्षित रखने में अपना योगदान दिया। कैसे उन्होंने देश की सीमाओं पर ये सुनिश्चित किया कि दुश्मन देश के अंदर घुसपैठ न कर पाएं। हालांकि, जनरल बिपिन रावत को अभी बहुत कुछ करना था। वो देश के पहले सीडीएस थे और उनके ऊपर कई जिम्मेदारियां थी, जिन पर वे काम भी कर रहे थे। लेकिन अब वो नहीं हैं और हैं तो उनकी यादें हर भारतवासी के दिल में...
चला गया वो छोड़कर
पीछे सिर्फ छूटी यादें हैं...