पहले स्वतंत्रता दिवस की एक दुर्लभ तस्वीर
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क्या था ब्रिटिश प्रचार?
मनुष्य दुष्ट प्राणी है और हिन्दुस्तानी लोग धर्म के नशे में खून-खराबा के शौकीन। सैन्य बल और कुलीन मजहब आधारित प्रतिनिधित्व के द्वारा ही वे शासित किए जा सकते है। ब्रिटिश साम्राज्य समर्थक कैथरीन मेयो ने टैगोर, गांधी का हवाला देते हुए अमेरिका को बताया की भारतीय बाल विवाह के हिमायती हैं, उनके पास सफाई का कोई मानक नहीं है और पाश्चात्य दवाइयों का विरोध करते हैं। उदार और नारीवादी लेखकों ने गांधी के तपस और त्याग पर जोर को रूढ़िवादी और स्त्री-विरोधी घोषित कर दिया।
कम्युनिस्टों की अवधारणा- मनुष्य मुख्यरूप से भौतिक भोग का मशीन है। भोग के तकनीक में विकास कर वो समाज में निरंतर द्वंद पैदा करता है। द्वंद, मानव सभ्यता को प्रगति के पथ पर सदा कायम रखती है। वहीं गांधी के अधीन स्वतंत्रता संग्राम में भोग पर संयम, द्वंद के बदले अहिंसा का महिमा मंडन और आधुनिक मशीनों के प्रति आलोचनात्मक रुख को बढ़ावा मिल रहा था । कम्युनिस्टों का निष्कर्ष था भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मानव प्रगति के लिए बाधा और ब्रिटिश राज उम्मीद।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के खिलाफ अमेरिका में, सालों साल मेहनत कर के औपनिवेशिक ताकतों ने जो दुष्प्रचार का महल खड़ा किया था वो एक पत्रकार ने कुछ दिनों के अंदर धाराशाई कर दिया। वेब मिलर ने मई 1930 में धरसाना नमक सत्याग्रह का अत्यंत मार्मिक रिपोर्ट सरकारी सेंसर को चकमा देकर अमेरिका भेज दिया। इस रिपोर्ट ने अमेरिकी पत्रकार जगत में तहलका मचा दिया।
अमेरिका की प्रमुख पत्रिका टाइम ने अपने 1931 के अंकों में कवर पर गांधी को चित्रित किया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सामग्री छापी। कितने ही अमरिकियों को गांधी में ईसा-मसीह की और कुछ को उन में बुद्ध की छाया दिखी। जो अमरीकी पहले विश्व युद्ध की विभीषिका और आर्थिक मंदी से आतंकित थे उन्हें भारतीय स्वतंत्रता में विश्व शांति की संभावना दिखाई दी।
विलियम शायरर
अमेरिका में भारत और गांधी पर खबर की मांग बढ़ी तो विलियम शायरर नियमित रूप से भारत और गांधी पर रिपोर्ट अमेरिका भेजने लगे। अगस्त सितम्बर 1931 में जब गांधी यूरोप पहुंचे तो विलयम शायरर ने पाया कि ब्रिटिश सरकार उनके काम में अड़चन डाल रही है। जब अमेरिका में गांधी प्रशंसकों को पता चला कि गांधी यूरोप आए हैं तो वे भी मिलने को बेचैन हो गए।
गांधी ने कोलंबिया ब्रॉडकास्ट सिस्टम के रेडियो से उनको सम्बोधित किया। अपने सम्बोधन में उन्होंने दुनिया के अन्तरात्मा से भारत की आजादी के लिए गुहार लगाई।
1931 के अंत तक ये स्पष्ट हो गया था कि अमेरिकी जनमत भारतीय स्वतंत्रता के पक्ष में है। ठीक दस साल बाद दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस जनमत का प्रभाव अटलांटिक चार्टर में दिखा। ब्रिटेन और अमेरिका ने इस चार्टर द्वारा लिखित आश्वासन दिया कि उपनिवेश के लोगों को युद्ध के बाद स्व-निर्णय और स्व-शासन का अधिकार मिलेगा।
भारतीय स्वतंत्रता में अमेरिकी पत्रकार लुई फिशर का भी अनमोल योगदान है। जब दूसरे विश्वयुद्ध में जापान ने अमेरिका पर आक्रमण कर दिया तो वो गांधी के पास 1942 में अमेरिकी नीति निर्माताओं का अनुरोध ले कर आए। क्या गांधी ऐलाइस राष्ट्रों के समूह को औपचारिक समर्थन देंगे? गांधी ने मना कर दिया। उनका अमेरिकी राष्ट्रपति को संदेश था कि वो चाहते हैं अमेरिका जापान पर जीत हासिल करें। लेकिन परतंत्र लोगों के नेता होने के नाते वो औपचारिक ऐलान किस हैसियत से करें?
एक उभरते हुए महाशक्ति को ये बात चुभ सकती थी, लेकिन संदेशवाहक लुई फिशर प्रतिभाशाली थे और भारतीय हितों के प्रति संवेदनशील, इसलिए अमेरिका से कोई रूखा जवाब नहीं आया और जुलाई 1947 में अटलांटिक चार्टर के मुताबिक ब्रिटिश संसद में भारत स्वतंत्रता अधिनियम पारित हो गया।
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