‘रोजेटा’ फिल्म का दृश्य
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परिस्थितियों से जूझती बच्ची की कहानी
बच्ची रोजेटा रात को सोते समय खुद से जो कहती है, वह उसकी आंतरिक दृढ़ता का परिचय देता है। वह अपनी मां की तरह का जीवन नहीं बिताना चाहती है। उसे एक अच्छे साफ-सुथरे जीवन की तलाश है। सोने से पहले वह खुद से कहती है, ‘तुम्हारा नाम रोजेटा है, मेरा नाम रोजेटा है। तुम्हें एक काम मिल है। मुझे एक काम मिला है। तुम्हें एक दोस्त मिला है, मुझे एक दोस्त मिला है। तुम्हारी एक सामान्य जिंदगी है। मेरी एक सामान्य जिंदगी है। तुम कीचड़ में नहीं पड़ोगी, मैं कीचड़ में नहीं पड़ूंगी। गुड नाइट-गुड नाइट।’ अच्छी जिंदगी पाने के लिए एक स्थाई आमदनी होनी जरूरी है इसके लिए रोजेटा दर-दर भटक रही है। रोजेटा का नैतिक बल बहुत उच्च है। इसी कारण वह गलत काम करने को कभी राजी नहीं होती है।
यहां उल्टी गंगा बह रही है। बच्ची वयस्क की भूमिका में है। बड़ों का दायित्व निभाते हुए बेटी मां को संभाल रही है। उसे भागने से रोक रही है। मां है कि बेटी को चहबच्चे में ढ़केल कर भाग जाती है। बेटी मां, मां, मुझे बचाओ, पानी-कीचड़ से निकालो चिल्लाती रह जाती है और नशे में धुत्त मां भाग जाती है। रोजेटा की दृष्टि सदा नीचे झुकी रहती है। सिर झुकाए सदा दौड़ती-भागती रोजेटा को देख कर एरिना में साढ़ की याद आती है।
वह आक्रमण को तत्पर रहता है, रोजेटा दुनिया में अपनी जगह बनाने को संघर्षरत है। जब कभी वह आंख उठा कर देखती है तो क्या उसकी दृष्टि में होती है, हताशा, निराशा और होती है एक तड़फ। डेढ़ घंटे की इस फिल्म में नायिका का अधिकांश समय दौड़ते हुए बीतता है। मुश्किल है इस लड़की को जब-तब भयंकर पेट दर्द उठता है, बीमारी क्या है?
बच्चा जब परिवार-समाज के बीच बड़ा होता है तो वह संबंध बनाना, निभाना सीखता है। कह सकते हैं कि रोजेटा परिवार-समाज, रिश्तेदार-दोस्त विहीन बड़ी हुई है इसीलिए जब बेकरी स्टोर में काम करने वाला युवक रिक्वेट (फैबरिज़िओ रोन्गीवन) उसकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, तो रोजेटा इसके लिए तैयार नहीं है। जॉब पाने के लिए वह रिक्वेट की जान लेने की बात सोचती है। यह बेल्जियम फिल्म फ्रैंच भाषा (इंग्लिश सबटाइटिल्स) में है।
कान फिल्म समारोह में प्रदर्शन
बिना तड़क-भड़क वाली इस फिल्म रोजेटा को दो भाइयों जीन-पियरे डार्डेन तथा लुक डार्डेन ने मिलकर निर्देशित किया है। इसका स्क्रीनप्ले भी दोनों भाइयों ने मिल कर लिखा है। 1999 कान फिल्म समारोह इसका प्रथम प्रदर्शन हुआ और इस नवयथार्थवादी फिल्म को पॉम ड’ओर पुरस्कार मिला, नायिका एमिली डेक्वीन को कान समारोह में सर्वोत्तम अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। इसके अलावा तमाम अन्य पुरस्कार भी इसकी झोली में आए।
शायद सारे दर्शकों को यह न जंचे, मगर बहुतों को खूब जंचेगी। रोजेटा की मुसीबतों का अंत नहीं है, फिल्म में रोजेटा को देखते हुए दर्शक तहे दिल से चाहने लगता है कि किसी तरह उसकी परेशानियां समाप्त हो जाएं। दर्शक चाहता है कि उसे नौकरी मिल जाए, उसे दोस्त मिल जाएं, उसका जीवन सामान्य हो जाए ताकि वह गुड नाइट कह कर आराम से सो सके। यथार्थ जीवन में ऐसा कहां होता है, फिल्म की बात और है। रोजेटा फिल्म को नि:संदेह महान क्लासिकल फिल्म की श्रेणी में रखा जा सकता है।
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