विम वेंडर्स की फिल्में
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‘विंग्स ऑफ डिजायर’ भी दोनों ने संग मिल कर लिखी। दो घंटे से कुछ ऊपर की इस ड्रामा, रोमांस, फैंटसी फिल्म में एक देवदूत ऊपर से बर्लिन के लोगों के क्रियाकलापों को देखता है। इसी बीच उसे एक मनुष्य से प्यार हो जाता है और वह शारीरिक अस्तित्व और उससे जुड़ी खुशियों के लिए लालायित हो उठता है। इस फिल्म को कई पुरस्कार प्राप्त हुए।
इसके पहले उन्होंने कई अन्य फिल्में निर्देशित की। 1974 में उनकी फिल्म ‘एलिस इन द सिटीज’ आई और एक बार फिर से विम वेंडर्स के नाम की धूम मच गई। करीब दो घंटे की इस फिल्म में एक जर्मन फोटो-पत्रकार न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर एक नौ साल की बच्ची की हिप्पी मां से मिलकर बहुत दु:खी और उदास है। स्त्री ने जानबूझ कर बच्ची उस पर थोप दी है।
लड़की की ग्रैंडमदर को खोजने के चक्कर में वह बच्ची का कृत्रिम पिता बन बैठता है। इसे जर्मन फिल्म क्रिटिक्स एसोशियेशन का पुरस्कार मिला। इस रोड मूवी ने विम वेंडर्स को न्यू वेव सिनेमा के लीडर के रूप में स्थापित कर दिया। इस फिल्म को भी उनके प्रिय सिनेमाटोग्राफर रोबी मुलर ने फिल्माया है। एलिस के रूप में येला रोटलैंडर दर्शकों को याद रह जाती है।
छह पुरस्कारों वाली फिल्म ‘रॉन्ग मूव’
अगले साल विम वेंडर्स ने अपनी रोड मूवी त्रयी की फिल्म ‘रॉन्ग मूव’ बनाई। पौने दो घंटे की इस फिल्म को छह पुरस्कार प्राप्त हुए। एक युवा कलाकार रोड ट्रिप पर निकलता है और रास्ते में कई अन्य कलाकारों से मिलता है। सबके-सब क्रोध तथा चिंता से भरे हुए हैं और वे ग्रामीण जर्मनी की दुर्दशा से दु:खी हैं। किसी के पास कहने के लिए कुछ नहीं है। भौगोलिक, ऐतिहासिक, सामाजिक, कलात्मक सब दृष्टि से गलत चाल हुई है। फिल्म का कुरूप, निष्ठुर रूप दर्शकों को अपनी गिरफ्त में ले लेता है।
रोड मूवी त्रयी की तीसरी फिल्म है, ‘किंग्स ऑफ रोड’। जगह-जगह जाकर फिल्म प्रोजेक्टर की मरम्मत करने वाला कारीगर एक अवसादग्रस्त मनोवैज्ञानिक की जान बचाता है। मनोवैज्ञानिक अपनी कार लेकर नदी में उतर गया था, क्योंकि उसकी शादी टूट गई है। दोनों किरदार अपने-अपने अतीत से बचना चाह रहे हैं। फिर दोनों की रोड यात्रा प्रारंभ होती है।
करीब तीन घंटे की इस फिल्म में दोनों की दोस्ती होती है और दोनों जर्मनी के तमाम ग्रामीण क्षेत्र के मूवी थियेटर में जाते हैं। देश अभी भी युद्ध की तबाही में डूबा हुआ है। इस फिल्म का खूबसूरत फिल्मांकन विम वेंडर्स के प्रिय सिनेमाटोग्राफर रोबी मुलर ने ही किया है।
फिल्म ‘दि अमेरिकन फ्रेंड
अगले साल उन्हें ख्याति दिलाने वाली उनकी एक और फिल्म ‘दि अमेरिकन फ्रैंड’ आई। इसमें डेनिस होपर ने काम किया है। इस फिल्म ने डेनिस होपर को अंतरराष्ट्रीय सिने-फलक पर स्थापित कर दिया, होपर को कान समारोह में पाम ड’ओर के लिए नामित किया गया। अमेरिका के फिल्म को नेशनल बोर्ड ऑफ रिव्यू ने सर्वोत्तम विदेशी फिल्म के रूप में इंगित किया।
हमारे यहां सिने-ज्यूरी को लेकर तमाम तरह की बातें होती रहती हैं। यहां विम वेंडर की कही एक बात जानना रोचक होगा, इससे पता चलता है कि ज्यूरी को कभी-कभी किन दबावों के बीच काम करना पड़ता है। वे बताते हैं कि वे एक बार कान फिल्म समारोह की ज्यूरी में थे और स्पाइक ली की फिल्म को पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया। विम वेंडर्स को उन्होंने धमकी दी कि वे बेसबॉल लेकर उनका इंतजार कर रहे हैं।
वेंडर्स का कहना था कि उन्हें बेसबॉल लेकर केवल उनका नहीं पूरी ज्यूरी का इंतजार करना चाहिए था क्योंकि पुरस्कार का निर्णय उनका नहीं सभी का सम्मिलित निर्णय था। वैसे वेंडर के अनुसार स्पाइक ली की फिल्म ‘स्कूल डेज’ बुरी फिल्म नहीं थी, बस ली का भाग्य उस साल खराब था।
अभी भी सक्रिय विम वेंडर्स की फिल्म ‘पेरिस, टेक्सस’ को सर्वोत्तम निर्देशन का बाफ्टा फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ। यहां भी एक आदमी निरुद्देश्य भटक रहा है।
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