इन्कोस्पार से बना 1969 में इसरो
समय के साथ ही अंतरिक्ष अनुसंधान की बढ़ती संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इसरो का गठन 15 अगस्त, 1969 को किया गया जिसने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए विस्तारित भूमिका के साथ इन्कोस्पार की जगह ली। 1972 में अंतरिक्ष विभाग और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान आयोग की स्थापना हुई और इसरो को नए विभाग के अधीन लाया गया।
इसरो का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास और अनुप्रयोग है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, इसरो ने संचार, दूरदर्शन प्रसारण और मौसम संबंधी सेवाओं, संसाधन मॉनिटरिंग और प्रबंधन, अंतरिक्ष आधारित नौ-संचालन सेवाओं के लिए प्रमुख अंतरिक्ष प्रणालियों की स्थापना की है।
इसरो ने उपग्रहों को अपेक्षित कक्षाओं में स्थापित करने के लिए उपग्रह प्रक्षेपण यान, पी.एस.एल.वी. और जी.एस.एल.वी. विकसित किए। अपनी तकनीकी प्रगति के साथ, इसरो देश में विज्ञान और विज्ञान संबंधी शिक्षा में योगदान देता है। अंतरिक्ष विभाग के तत्वाधान में सामान्य प्रकार्य में सुदूर संवेदन, खगोल विज्ञान और तारा भौतिकी, वायुमंडलीय विज्ञान और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए विभिन्न समर्पित अनुसंधान केंद्र और स्वायत्त संस्थान हैं।
इसरो के स्वयं के चंद्र और अंतरग्रहीय मिशनों के साथ-साथ अन्य वैज्ञानिक परियोजनाएं वैज्ञानिक समुदाय को बहुमूल्य आंकड़े प्रदान करने के अलावा विज्ञान शिक्षा को प्रोत्साहित और बढ़ावा देता है।
इसी प्रकार अंतरिक्ष आयोग देश के सामाजिक-आर्थिक लाभ के लिए अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास और अनुप्रयोग को बढ़ावा देने के लिए नीति निर्माता है और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के कार्यान्वयन की देखरेख करता है। अंतरिक्ष विभाग इन कार्यक्रमों को मुख्यरूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पी.आर.एल), राष्ट्रीय वायुमंडलीय अनुसंधान प्रयोगशाला (एन.ए.आर.एल.), उत्तरी पूर्वी अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (उ.पू.-सैक) और सेमी-कंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) के माध्यम से कार्यान्वित करता है।
1992 में एक सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी के रूप में स्थापित एंट्रिक्स कॉरपोरेशन अंतरिक्ष उत्पादों और सेवाओं का विपणन करता है।
आर्यभट्ट के साथ अंतरिक्ष युग में प्रवेश
पहले प्रक्षेपण के लगभग 12 वर्ष बाद भारत ने अपने पहले प्रायोगिक उपग्रह आर्यभट्ट के साथ अंतरिक्ष युग में प्रवेश किया जिसे 1975 में रूसी रॉकेट पर रवाना किया गया। इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. यू.आर.राव ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन दिनों बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं था, जो कुछ उपलब्ध था हमने उसका इस्तेमाल किया। यहां तक की हमने बैंगलोर में एक शौचालय को डेटा प्राप्त करने के केंद्र में तब्दील कर दिया।
थुंबा से शुरू हुआ भारत का अंतरिक्ष सफर आज चांद पर पहुंच गया है। भारत ने चंद्रमा संबंधी अनुसंधान शुरू करने, उपग्रह बनाने, अन्य के लिए भी विदेशी उपग्रहों को ले जाने में सफलता अर्जित कर दुनियाभर में अपनी पहचान बना ली है।
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