विश्व सिनेमा का इतिहास
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सत्तर-अस्सी के दशक का सिनेमा
सत्तर के दशक में द निकरागुआ फिल्म इंस्टीट्यूट स्थापित हुआ और परामर्शदाताओं तथा कैमरों को क्यूबा से आयात किया गया। नए निर्देशक आगे आए। मेहनताना, सरकारी तथा अनुदान के सहयोग से दिया जाने लगा। उन्हें हॉलीवुड की तर्ज पर काम करने की सारी सुविधाएं मिलने लगीं। वे फिल्मांकन की नई तकनीक सीखने लगे। अस्सी के दशक में चिली के सिने-निर्देशक मिग्युएल लिटिन निकरागुआ आए और उन्होंने अपनी सबसे अधिक प्रभावशाली फिल्म ‘एल्सीनो एंड द कोन्डोर’ बनाई।
निकरागुआ की इस पहली रंगीन फिल्म में एक 10-12 साल का लड़का एल्सीनो निकरागुआ के सुदूर इलाके में अपनी दादी मां के साथ रह रहा है। वह विद्रोहियों तथा सरकारी ट्रूप्स के बीच फंस जाता है। फिल्म सर्वोत्तम विदेशी फिल्म की श्रेणी में ऑस्कर के लिए नामांकित हुई थी।
अस्सी के दशक में एक और उल्लेखनीय फिल्म यहां बनी। यह फिल्म है सिने-निर्देशक रैमीरो लैकयो-देशोन की ‘द घोस्ट ऑफ वार’। 1988 की यह फिल्म म्युजिकल ड्रामा है। इस राजनैतिक थ्रिलर में रेनालो निकरागुआ के कैरिबियन तट के इलाके का एक युवा डॉन्सर है, लेकिन वह अपने पेशे को छोड़ कर देश के लिए लड़ना चाहता है।
1998 में फ्लोरेंस जौगे के निर्देशन में एक लघु डॉक्युमेंट्री ‘सिनेमा एल्काजार’ बनी। इस दस मिनट की डॉक्युमेंट्री में रोजा एक स्थान पर आती है। इस स्थान में कुछ देर पहले भूकंप आया था और एक बिल्डिंग मलबे में तब्दील हो गई थी। लोगों के अनुसार यह सिनेमा हाल था मगर रोजा वहां बरसों-बरस रही थी मगर उसने अपनी जिंदगी में कभी फिल्म नहीं देखी थी। फिल्म में बहुत कुछ होता है। इसमें पिलर एक्युर ने अभिनय किया है। आईएमडीबी में इसे 6.9 स्टार दिया है। इसे बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दो पुरस्कार प्राप्त हुए।
वर्तमान का सिनेमा
आजकल निकरागुआ में फिल्म निर्माण निजी हाथों में है क्योंकि सरकार के ओर से सहायता की कोई व्यवस्था नहीं है। लेकिन यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्में बन रही हैं। 2008 में बनी फिल्म ‘ला युमा’ को 2011 में ऑस्कर पुरस्कार के लिए यहां से भेजा गया था, इसे 7 अन्य पुरस्कार मिले। फ्लोरेंस जौगे द्वारा निर्देशित इस फिल्म की खूब प्रशंसा हुई है, इसमें निकरागुआ की अभिनेत्री अलमा ब्लैंको ने अभिनय किया है, मगर इसे बनाया है निकरागुआ में रहने वाली एक फ्रेंच स्त्री निर्देशक ने। इस 1 घंटा 30 मिनट की फिल्म में युमा नामक मजबूत इरादों वाली विद्रोही लड़की की कहानी है, जो बॉक्सर बनने का सपना देख रही है।
गैब्रिएल सेरा ने मैक्सिको में फिल्म अध्ययन किया, उसने 2015 में ‘ला पार्का’ (‘द रीपर’) बनाई इसे ऑस्कर में सर्वोत्तम डॉक्युमेंट्री केलिए नामांकित किया गया। फिल्म मैक्सिको के नए सिनेमा से प्रभावित है तथा क्रूर, अत्याचार भरे कथानक पर बनी है।
2017 में निकरागुआ के संगीत-लेखक पर एक नायाब डॉक्युमेंट्री ‘वाल-टेर’ नाम से बनी। ‘द ब्लैक क्रिओल्स’, ‘डॉटर ऑफ रेज’, ‘बिग ब्रदर वल्कैनो’, ‘पेइंग द प्राइज फार पीस’, ‘आइलैंड ऑफ लोस्ट चिल्ड्रेन’ इस सदी में निकरागुआ से आने वाली कुछ अन्य फिल्में हैं।
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