एक समय ऐसा आया जब मंगोलिया के फिल्म निर्माताओं को साथी खोजने पड़े, लेकिन इसी समय कुछ युवा फिल्मकार सामने आए जो परिवर्तनकारी सिद्ध हुए। इनमें से एन. जेनक्याग, बी. उरैन्चिमेग तथा जे. बिंदर प्रमुख हैं। ‘चेंगेज खान, अंदर द पॉवर ऑफ दि इटर्नल स्काई’ पहली फिल्म थी जिसका निर्माण जापान के सहयोग से हुआ। 1998 में ‘स्टेट ऑफ डॉग्स’ बनी फिल्म का लेखन तथा निर्देशन बेल्जियम के साझापन से हुआ। इसमें बेल्जियम के पीटर ब्रोसेन्स तथा मंगोलिया के द्रुखैन्दिन तुमुरंग का सहयोग था।
बाईम्बैसुरेन दैवर के निर्देशन में जर्मन-मंगोलियन को-प्रोडक्शन में बनी ‘द टेल ऑफ द वीपिंग कैमल’ को अंतरराष्ट्रीय सफलता हासिल हुई। इस डॉक्युमेंट्री को 2003 तथा 2005 में विदेशी फिल्म के रूप में ऑस्कर नामांकन मिला। 2005 की फिल्म ‘द येलो डॉग केव’ में एक छोटी बच्ची माता-पिता के न चाहते हुए भी एक पिल्ले से दोस्ती करती है। 2008 की एन्कतैवान अग्वैनसेरेन निर्देशित फिल्म ‘पर्ल्स इन द फोरेस्ट’ 1930 की घटनाओं को दिखाती है और मंगोलिया पर सोवियत के कम्युनिज्म की बात करती है।
यह अपने ढंग की पहली फिल्म है, क्योंकि यह मंगोलिया के अभी भी अस्तित्व में होने वाले आदि-समुदाय बुर्यैट लोगों का इतिहास पहली बार दिखाती है।
मंगोलिया में चंगेज खान को लेकर फिल्में
1965 में हेनरी लेविन ने स्टीफन ब्यॉयड, ओमर शरीफ आदि को लेकर ‘चंगेज खान’ फिल्म हॉलीवुड में बनाई थी। मंगोलिया में चंगेज खान को लेकर कई फिल्में बनी हैं। बायम्बासुरेन दैवा निर्देशित ड़ेढ़ घंटे की डॉक्युमेंट्री ‘द टू होर्सेस ऑफ चंगेज खान’ चायनीज कल्चरल रिवल्यूशन के दौरान दादी द्वारा बाध्य होकर नष्ट की गई वायलिन की कहानी है। वायलिन पर प्राचीन मंगोलियन गीत ‘द टू होर्सेस ऑफ चंगेज खान’ उकेरा हुआ था, मगर सांस्कृतिक तूफान में वायलिन का सिर और गर्दन बच रही थी। अब उरना को अपनी दादी से किए वायदे को पूरा करना है।
उसे वायलिन को मुक्कमल कराना है और गीत के नष्ट हुए बोल खोज निकालने हैं। फिल्म को 2009 का सेंट्रल यूरोप पुरस्कार प्राप्त हुआ। फिल्म मंगोल जीवन में घोड़े और उसके आध्यात्मिक महत्व को स्थापित करती है, साथ ही पुरातन एवं आधुनिक के बीच के तनाव को फिल्माती है।
सर्गेई बोडरोव निर्देशित, ऑस्कर के लिए नामित ‘मंगोल: द राइज ऑफ चंगेज खान’ (2007), काले लम्बेर्ट निर्देशित, बायोग्राफी-ड्रामा ‘द चिल्ड्रेन ऑफ चंगेज’ ऐसी ही फिल्में हैं। 2007 की फिल्म ‘द चिल्ड्रेन ऑफ चंगेज’ चंगेज खान के प्रारंभिक जीवन को दिखाती है, जब वह गुलाम था। यह उसके 1206 में दुनिया जीतने के अभियान के पहले के काल को समेटती है।
मंगोलिया की फिल्में एक भिन्न दुनिया में ले जाती हैं। यहां की दुनिया, भाषा, संस्कृति सब अलग है। प्राकृतिक दृष्टि से भी यह देश भिन्न है, यहां तमाम तरह के आदिवासी अभी भी हैं। मंगोलिया में कहानी-कहन की अनोखी और संमृद्ध परम्परा है। यहां सजीव ड्रामा, एतिहासिक गाथाएं, लोक कथाएं फिल्म में गूंथी जाती हैं। शायद इसी कारण से आज विश्व मंगोलिया की फिल्मों की ओर आकर्षित है।
तो मौका मिलते मंगोलिया की फिल्में देखिए तथा एक अलग दुनिया की सैर कीजिए।
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