आइसलैंड की फिल्में और इतिहास
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आज आइसलैंड की फिल्में खूब सराही जा रही हैं। यहां स्त्री-पुरुष बराबरी का दावा करने के बावजूद स्त्री फिल्म निर्देशकों का प्रतिशत बहुत कम है। 2016 में आइसलैंड में केवल 7% स्त्री फिल्म निर्देशक हैं, एवं 15% स्क्रीनप्ले राइटर स्त्रियां हैं।
प्रसिद्ध लेखक हल्डोर लैक्सनेस की बेटी गनी लैक्सनेसडॉटर ने स्क्रीनप्ले राइटर (1986, ‘स्टेला ऑन होलीडे’) के रूप में काम किया और बाद में इस स्क्रिप्ट पर भी फिल्म बनाई। ‘अंडर द ग्लेशियर’, ‘द मेन’स कोयर’, ‘ऑनर ऑफ द हाउस’, ‘द क्वाइट स्टोर्म’ उनकी अन्य फिल्में हैं। उन्होंने अधिकतर फिल्में अपने पिता की रचनाओं पर बनाई हैं।
अमेरिकन पिता और आइसालिंडिक मां की बेटी सोल्वे एन्सपेच वैसे तो फ्रांस में रहती हैं मगर बार-बार अपने जन्मस्थान आइसलैंड आती हैं और फिल्म बनाती हैं। उन्होंने 1990 की अपनी डॉक्यूमेंट्री में यहां की खूबसूरती को पकड़ा है। मगर कई साल कैंसर से जूझने के बाद 2015 में सोल्वे की मृत्यु हो गई।
1999 में उन्होंने अपनी इस दर्दनाक बीमारी को ‘हौट लेस कोर्स!’ में उतार दिया। चार पुरस्कारों से नवाजी इस फिल्म की नायिका पहली बार गर्भवती हुई है, तभी उसे पता चलता है कि वह स्तन कैंसर से भी ग्रसित है, जहां एक डॉक्टर गर्भपात की सलाह देता है, वहीं दूसरे के अनुसार इलाज और बच्चा साथ-साथ हो सकता है। नायिका के मानसिक संघर्ष को यह फिल्म दिखाती है।
उसे 2017 से उनके नाम पर स्त्री फिल्म निर्देशकों के लिए प्रतिवर्ष एक प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, जो आइसलैंड में आयोजित फ्रेंच फिल्म समारोह का हिस्सा होती है।
लेखक तथा सिने-निर्देशक क्रिस्टीन जॉहान्सडॉटर अपनी फिल्म ‘एज इन हेवन’ (1992) के लिए जानी जाती हैं। इसमें नायिका 1936 के ग्रामीण आइसलैंड में समायोजित होने का प्रयास कर रही है। फिल्म कान समारोह में प्रतियोगिता सत्र में दिखाई गई थी और सर्वोत्तम विदेशी भाषा की फिल्म के रूप में ऑस्कर के लिए नामांकित हुई थी।
अभी हाल में, 2017 में उन्होंने अपनी फिल्म ‘अल्मा’ बनाई है। 28 साल की अल्मा को गलती से उसके प्रेमी की हत्या के लिए मानसिक अस्पताल में रख दिया गया है, जब उसे पता चलता है कि उसका बॉयफ्रेंड अभी जीवित है तो वह उसे मार डालना चाहती है। 90 मिनट की इस फिल्म को सिडनी वीमेन’स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का पुरस्कार प्राप्त हुआ।
एवा सिगुरोरडॉटर न केवल सिने-निर्देशक हैं वरन वे ‘अस्क्जा’ नाम से एक प्रोडक्शन कंपनी भी चलाती हैं। इस कम्पनी के द्वारा वे डॉक्यूमेंट्री एवं फिल्म बनाने वाली स्त्रियों की प्रमुखता से सहायता करती हैं। ‘गुड नाइट’ तथा ‘रैम्स’ उनकी अपनी बनाई हुई फिल्में हैं। ‘गुड नाइट’ को बाफ्टा नामांकन भी मिला था।
वास्तविक घटना पर आधारित बाल्टासार कोर्माकुर निर्देशित ‘जुपी’ (Djúpið), ‘रेक्विक’ (Reykjavík), ‘माइरिन’ तथा ‘हाफिओ’, ‘दि ओथ’, ऑस्कर जॉनसन निर्देशित ‘स्वर्टोर ए लेइक’, ‘रेक्विक रोटरडैम’, गनर बी. गोडमंडसन निर्देशित ‘अस्ट्रोपिया’, रेनिर लाइन्गडैल निर्देशित ‘फ्रोस्ट’, फ्रिडरिक पुर फ्रिडरिक्ससन निर्देशित ‘एन्गलैर एल्हेइमसिन्स’, पोर्स्टीन गनर जार्नासन निर्देशित ‘जोहान्स’, वाल्डीमैर जोहानसन निर्देशित ‘लैम’, गोडमन्डुर एर्नैर गोडमन्डसन निर्देशित ‘ब्युटिफुल बीइंग्स’, ‘हार्ट स्टोन’, ऑस्कर थोर एक्सेलसन निर्देशित ‘आई रिमेंबर यू’, अगस्ट जैकोबसन निर्देशित कॉमेडी ‘पार्डन माई आइसलैंडिक’ आदि इस सदी में आइसलैंद से आने वाली कुछ अच्छी फिल्में हैं।
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