हिंदी का दायरा बढ़ रहा है।
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बढ़ा है हिंदी का दायरा
'भाषा बहता नीर 'के सिद्धांत का पालन करते हुए हिंदी तमाम अवरोधों, बाधाओं को पार करते हुए आज अपनी पहुंच का दायरा बढ़ा रही है। इसमें इंटरनेट और सूचना क्रांति विशेषकर मोबाइल फ़ोन ने हिंदी को तकनीकी भाषा बनाने में सहायता की है। इक्कीसवीं सदी की हिंदी न सिर्फ साहित्य भाषा है, शिक्षा की भाषा है, मनोरंजन, विज्ञापन की भाषा है बल्कि विज्ञान,तकनीक एवं रोज़गार की अनंत संभावनाओं से भरी हुई भाषा भी है।
ब्लॉग ,ऑनलाइन पत्रिकाएं,फेसबुक ,ट्विटर आज रोज़मर्रा के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं हिंदी ने समय के बदलते स्वरूप को हमेशा अपनाया है और अपनी प्रासंगिकता कम नहीं होने दी है। अन्य भाषाओं से हिंदी ने स्पर्धा का भाव कभी नहीं रखा बल्कि अन्य भाषाओं के शब्दों को भी अपने में आत्मसात किया है। माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसे कंपनियों ने हिंदी को कंप्यूटर और फ़ोन के लिए भी उपयोगी बना कर उसकी उपयोगिता को सिद्ध किया है।
भाषा की जीवंतता का आधार आज के समय में उसकी रोज़गारपरकता भी है। आज हिंदी तेज़ी से रोज़गार की भी भाषा बनाने लगी हैं। अनुवाद ,पर्यटन ,विज्ञापन,शिक्षण आदि अनेक क्षेत्र हैं जहां रोज़गार की अनंत संभावनाएं हैं। हर विषय में परंपरागत और व्यावसायिक दो तरह की शिक्षा दी जाती है। हिंदी को रोज़गारपरक, व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता है। इसके लिए हिंदी की प्रयोजनमूलकता और बढ़ानी होगी।
प्रयोजनपरक हिंदी
बाजारवाद और उपभोक्तावाद के इस दौर में प्रयोजनपरक हिंदी का दायरा व्यापक होता जा रहा है। आज हिंदी एक ओर कम्प्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक, टेलीप्रिंटर, दूरदर्शन, रेडियो, अखबार, फिल्म और विज्ञापन आदि जनसंचार के माध्यमों पर प्रभावी है, तो वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार, रेल, हवाई जहाज, बीमा उद्योग, बैंक आदि औद्योगिक उपक्रमों, रक्षा, सेना, इन्जीनियरिंग आदि प्रौद्योगिकी संस्थानों, तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों, आयुर्विज्ञान, कृषि, चिकित्सा, शिक्षा, ए० एम० आई० के साथ विभिन्न संस्थाओं में हिन्दी माध्यम से प्रशिक्षण दिलाने कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, सरकारी, अर्द्धसरकारी कार्यालयों, कार्यालयी हिंदी के विभिन्न रूपों में प्रयुक्त होकर अपने महत्व को स्वतः सिद्ध कर रही है। तात्पर्य यह कि पर्यटन, बाजार, तीर्थस्थल, कल-कारखाने , न्यायालय आदि अब प्रयोजनमूलक हिन्दी के दायरे में आ गए हैं।
निः संदेह ,दो तीन दशक में हिंदी के प्रति देश-विदेश में रुख बदला है। संसद में सड़क तक हिन्दी का उपयोग बढ़ा है। नई शिक्षा नीति 2020 में भारतीय भाषाओं के महत्व पर अधिक जोर दिया गया है जिस से हिंदी नई ऊंचाई हासिल कर सकती है। मातृभाषा के साथ आत्मीय संबंध होने के कारण ग्रहण करना छात्र के लिए सहज होता है ,उसकी तार्किक दृष्टि विकसित होती है। चाहे हम कितनी भी विदेशी भाषाओं की बात कर लें परंतु सच्चाई यह है कि व्यक्ति की रचनात्मकता अपना उत्कृष्टतम रूप अपनी भाषा में ही प्राप्त करती है।
जय हिंद !जय हिंदी !
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