Melania Trump in Happiness Class
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डेनमार्क फिनलैंड और स्वीडन जैसे देश सालों से हैप्पीनेस इंडेक्स में टॉप पर हैं और सिर्फ हम ही नहीं दुनिया के कई बड़े देश टॉप टेन में भी नहीं हैं। यह चिंताजनक है। हैप्पीनेस इंडेक्स को मुख्यतः 4 आधार पर मापा जाता है। प्रथम सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण, द्वितीय पर्यावरण का संरक्षण चित्र सतत विकास और बेहतर प्रशासन, जो वर्तमान सामाजिकता और पर्यावरण के नजर से बेहद जरूरी है।
आज मोबाइल ने दूर के लोगों से नजदीकियां बढ़ाई है पर पास पड़ोस से हमें दूर कर दिया है। बच्चे भी इसके शिकार होते जा रहे हैं, परंतु हैप्पीनेस का एक उपाय निकालते हुए बच्चों को होमवर्क में दादा दादी की कहानियां सुनाने का काम दे रहा है। साथ ही हमें एक परिवार की तरह जुड़े रहने परिवार का महत्व समझने और उसके मूल्यों को कम नाचन का भी शिक्षा दे रहा है। हैप्पीनेस क्लास में हफ्ते के 2 दिन नैतिक शिक्षा पर कहानियां सुनाई जाती है और फिर कितना सीखा के अंतर्गत मौखिक सवाल भी पूछे जाते हैं। इससे बच्चों में रचनात्मक शक्ति बढ़ती है।
इस कारण आज दुनिया के कई देशों में दिल्ली के इस मॉडल को खूब पसंद किया जा रहा है और अपने देश में कई राज्यों में इसे लागू करने की बात कही जा रही है। कारण कि हम अपने बच्चों को स्ट्रेसफुल स्कूल नहीं बल्कि इंजॉय फुल स्कूल देना चाहते हैं, जो हैप्पीनेस क्लास पूरी करती है। उम्मीद है आने वाले दिनों में दिल्ली की पहचान हिंसा से नहीं हैप्पीनेस स्कूलों से होगी।
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