उच्च हौसले का प्रतीक बन चुकी शिवांगी का नाम सुनते ही हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है।
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देश की बेटियों के लिए उदाहरण
भारतीय नारी केवल घर की सुख-शांति और समृद्धि में ही योगदान नहीं देती बल्कि समय आने पर वह शत्रु के लिए मां चंडी और काली का रूप भी धर सकती है और भारतीय-चिन्तन-परम्परा में यह तथ्य प्रारंभ से ही स्वीकार किया जाता रहा है इसलिए भारतीय-संस्कृति में नारी सर्वत्र शक्ति-स्वरुपा है ; देवी रूप में प्रतिष्ठित है।
शिवांगी उस पितृसत्तात्मक समाज के मुख पर एक जवाब भी है जो सदैव स्त्री की शारीरिक क्षमता को लेकर स्त्री की क्षमता को सीमित करता रहा है। स्त्री को अबला और नाजुक समझने वालों को शिवांगी ने अपनी बहादुरी और हौसले से गलत साबित ही नहीं किया बल्कि उन्होंने हर महिला के लिए एक ऐसी मिसाल कायम की है जो सदियों तक प्रत्येक महिला को प्रोत्साहित करती रहेगी।
चट्टान से भी फौलादी हिम्मत वाली और गजब की सूझ–बूझ की धनी शिवांगी ने पूरे देश को यह संदेश दिया कि इच्छा शक्ति के बल पर कोई भी कार्य असंभव नहीं है। सबसे बड़े लड़ाकू विमान राफेल को उड़ाने वाली शिवांगी शक्तिरूपा का पर्याय बन चुकी थी। आज वह युवाओं के लिए आदर्श बन चुकी हैं।
इस शक्ति के पर्व नवरात्रि में हम यही प्रार्थना करते हैं कि भारत की बेटियाँ शिवांगी की भांति शक्तिरूपा बन कर दुश्मनों का सफाया करें और नारी को दुर्बल समझने वालों को ये संदेश दें कि अवसर मिलने पर स्त्री घर के या बाहर के शत्रुओं के छक्के छुड़ाने की क्षमता रखती हैं।
आज हिमालय से भी उच्च हौसले का प्रतीक बन चुकी शिवांगी का नाम सुनते ही हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। हम सब की ओर से भी देश की ऐसी बहादुर बेटी और वास्तविक जीवन की सच्ची नायिका को सत्–सत् नमन है। इतिहास में नाम लिखाने वाली शिवांगी देश की हर बेटी के लिए एक उदाहरण हैं।
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