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शक्ति पर्व नवरात्रि: शक्तिरूपा शिंवागी सिंह की कहानी, जिसने राफेल से भरी आसमान में उड़ान

सार

उत्तर प्रदेश के वाराणसी की रहने वाली शिंवागी सिंह हवा में लड़ाकू विमान उड़ाने के साथ ही महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम कर रही हैं। उनका जन्म 15 मार्च 1995 को हुआ है। शिक्षक पिता और गृहिणी मां की बेटी शिवांगी बचपन से ही बहादुर और चुनौतियों को स्वीकार करती रही हैं।
 
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उत्तर प्रदेश के वाराणसी की रहने वाली शिंवागी सिंह हवा में लड़ाकू विमान उड़ाने के साथ ही महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम कर रही हैं। - फोटो : air force twitter
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विस्तार
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विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृतियों में से एक भारतीय संस्कृति है जिसमें नारी का विशेष स्थान है। हमारे ग्रंथ और वेद सब में नारी को अपार शक्ति से महिमामंडित किया गया है। शक्ति की पूजा करने वाले हमारे देश में नारी को केवल सुंदरता की मूर्ति न मानकर उसे शक्ति का रूप माना जाता है तभी तो वेदों में नारी को 'दुर्गा', 'शक्ति', 'ज्योति' आदि नामों से परिभाषित किया जाता है।

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हमारे देश की नारी समय आने पर शत्रु के लिए काल का रूप भी धर सकती है और यही बात हमारे देश की बहादुर बेटी शिवांगी सिंह ने साबित की है। शिवांगी ने अपनी मेहनत और लगन से साबित कर दिया है कि ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां लड़कियां काम नहीं कर सकती हैं चाहें वह सैन्य सेवाएं हों या नागरिक सेवाएं।

शिंवागी सिंह ने राफेल जैसा लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली महिला पायलट बन कर यह साबित कर दिया है कि हमारे देश की बच्चियां अपने क़दमों से ज़मीं से लेकर आसमान को नापने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने अपने जज्बे से आज के युवाओं को उनके आदर्श बदलने की और अग्रसर कर दिया है अब युवा फिल्मों की नायिका के स्थान पर असल जिंदगी की नायिका शिवांगी को आदर्श मानते हैं।

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कौन हैं शिवांगी सिंह ?

उत्तर प्रदेश के वाराणसी की रहने वाली शिंवागी सिंह हवा में लड़ाकू विमान उड़ाने के साथ ही महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम कर रही हैं। उनका जन्म 15 मार्च 1995 को हुआ है। शिक्षक पिता और गृहिणी मां की बेटी शिवांगी बचपन से ही बहादुर और चुनौतियों को स्वीकार करती रही हैं।

स्कूल में वह पढ़ाई के साथ बास्केटबाल की अच्छी खिलाड़ी रहीं। उनके नाना वीएन सिंह भी सेना में कर्नल रह चुके हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और सिक्किम मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से शिक्षा प्राप्त शिवांगी राफेल विमान से पहले मिग-21 लड़ाकू विमान भी उड़ा चुकी हैं। उन्हें विंग कमांडर अभिनंदन के साथ मिग 21विमान उड़ाने का श्रेय हासिल है।

2013 में शिवांगी ने गणतंत्र दिवस की परेड के अवसर पर उत्तर प्रदेश टीम का प्रतिनिधित्व भी किया था l उन्होंने वायु सेना की परीक्षा 2015 में उत्तीर्ण की और उसके बाद डेढ़ साल तक प्रशिक्षण ग्रहण करने के बाद हैदराबाद स्थित एयर फोर्स अकादमी में 16 दिसंबर 2017 को शिवांगी को फाइटर पायलट की पदवी मिली l तीन साल के अन्दर उनकी अद्भुत क्षमता को देखते हुए उन्हें राफेल की टीम में चुन लिया गया और अब वह राफेल को उड़ाने वाले स्कवाड्रन की टीम का हिस्सा हैं l 

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उच्च हौसले का प्रतीक बन चुकी शिवांगी का नाम सुनते ही हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। - फोटो : PTI

देश की बेटियों के लिए उदाहरण

भारतीय नारी केवल घर की सुख-शांति और समृद्धि में ही योगदान नहीं देती बल्कि समय आने पर वह शत्रु के लिए मां चंडी और काली का रूप भी धर सकती है और भारतीय-चिन्तन-परम्परा में यह तथ्य प्रारंभ से ही स्वीकार किया जाता रहा है इसलिए भारतीय-संस्कृति में नारी सर्वत्र शक्ति-स्वरुपा है ; देवी रूप में प्रतिष्ठित है।  

शिवांगी उस पितृसत्तात्मक समाज के मुख पर एक जवाब भी है जो सदैव स्त्री की शारीरिक क्षमता को लेकर स्त्री की क्षमता को सीमित करता रहा है। स्त्री को अबला और नाजुक समझने वालों को शिवांगी ने अपनी बहादुरी और हौसले से गलत साबित ही नहीं किया बल्कि उन्होंने हर महिला के लिए एक ऐसी मिसाल कायम की है जो सदियों तक प्रत्येक महिला को प्रोत्साहित करती रहेगी।
 

चट्टान से भी फौलादी हिम्मत वाली और गजब की सूझ–बूझ की धनी शिवांगी ने पूरे देश को यह संदेश दिया कि इच्छा शक्ति के बल पर कोई भी कार्य असंभव नहीं है। सबसे बड़े लड़ाकू विमान राफेल को उड़ाने वाली शिवांगी शक्तिरूपा का पर्याय बन चुकी थी। आज वह युवाओं के लिए आदर्श बन चुकी हैं। 


इस शक्ति के पर्व नवरात्रि में हम यही प्रार्थना करते हैं कि भारत की बेटियाँ शिवांगी की भांति शक्तिरूपा बन कर दुश्मनों का सफाया करें और नारी को दुर्बल समझने वालों को ये संदेश दें कि अवसर मिलने पर स्त्री घर के या बाहर के शत्रुओं के छक्के छुड़ाने की क्षमता रखती हैं।

आज हिमालय से भी उच्च हौसले का प्रतीक बन चुकी शिवांगी का नाम सुनते ही हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। हम सब की ओर से भी देश की ऐसी बहादुर बेटी और वास्तविक जीवन की सच्ची नायिका को सत्–सत् नमन है। इतिहास में नाम लिखाने वाली शिवांगी देश की हर बेटी के लिए एक उदाहरण हैं। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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