देश में भूंकप के जोखिम वाले क्षेत्रों का वर्गीकरण
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भूकंप का सर्वाधिक खतरा घनी आबादी को
भूकंप की संवेदनशीलता के अनुसार भारत को 5 जोनों में बांटा गया है। इनमें सर्वाधिक संवेदनशील जोन ’पांच’ माना जाता है जिसमें सिंधु से लेकर ब्रह्मपुत्र का सम्पूर्ण भारतीय हिमालय क्षेत्र है। वैसे देखा जाए तो अफगानिस्तान से लेकर भूटान तक का संपूर्ण हिमालयी क्षेत्र भारतीय उप महाद्वीप के उत्तर में यूरेशियन प्लेट के टकराने से भूगर्वीय हलचलों के कारण संवेदनशील है।
इनके अलावा रन आफ कछ भी इसी जोन में शामिल है। लेकिन इतिहास बताता है कि भूचालों से जितना नुकसान कम संवेदनशील ’जोन चार’ में होता है, उतना जोन पांच में नहीं होता, क्योंकि जोन पांच वाले हिमालयी क्षेत्र में जनसंख्या का घनत्व बहुत कम है, जबकि जोन चार और उससे कम संवेदनशील क्षेत्रों का जनसंख्या का घनत्व काफी अधिक है।
त्रिपुरा को छोड़कर ज्यादातर हिमालयी राज्यों का जनसंख्या घनत्व बहुत कम है। अरुणाचल प्रदेश का जनसंख्या घनत्व तो 17 और मीजोरम का 52 प्रति वर्गकिमी है, जबकि दिल्ली का जनसंख्या घनत्व 11,297 है और दिल्ली को भी भूकंप के गंभीर खतरे की जद में माना जाता है।
उत्तराखंड में ही उच्च हिमालयी क्षेत्र जिला चमोली का जनसंख्या घनत्व 49 और उत्तरकाशी का 41 है, वहीं मैदानी हरिद्वार का 817 और उधमसिंहनगर का 648 व्यक्ति प्रति वर्गकिमी है। अगर कभी काठमांडो की जैसी भूकंप आपदा आती है तो भूकंपीय दृष्टि से अति संवेदनशील सीमांत जिलों से अधिक नुकसान मैदानी जिलों में हो सकता है।
मकानों की परम्परागत शैली त्यागने से बढ़ा खतरा
यही नहीं हिमालयी क्षेत्र में प्रायः लोगों के घर हजारों सालों के अनुभवों के आधार पर परंपरागत स्थापत्य कला के अनुसार बने होते थे, इसलिए यहां जनहानि भी काफी कम होती थी। लेकिन अब पहाड़ के लोग मैदानी क्षेत्र की तरह ही मकान बना कर खतरा बढ़ा रहे हैं। सन् 1991 के उत्तरकाशी भूकंप में हजारों मकान ध्वस्त हो गए मगर हजार साल से खड़ा कोटी बनाल का बहुमंजिला मकान ज्यों का त्यों आज भी खड़ा है। वहां आज भी ऐसे मकान हजारों की संख्या में हैं।
देखा जाए तो हमने अभी लातूर तथा भुज की भूकंपीय आपदा से सबक नहीं सीखा। सिन्धु से लेकर ब्रह्मपुत्र के बीच के सभी राज्यों में अब परंपरागत भवन निर्माण शिल्प के बजाय मैदानी इलाकों की नकल से सीमेंट कंकरीट के मकान बन रहे हैं, जो कि भूकंपीय दृष्टि से बेहद खतरनाक हैं। हिमालयी गावों में सीमेंट कंकरीट के जंगल उग गए हैं।
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