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दिल्ली चुनाव नतीजे 2020ः आप ने भाजपा को बताया विकास का अर्थ

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अरविंद केजरीवाल ने राजनीतिक दलों को विकास का मतलब समझाया - फोटो : AmarUjala
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी आदमी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल कर ली है। आप की इस जीत से भाजपा चारों खाने चित्त हैं। एक ओर जहां आप बहुत चतुराई के साथ मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी, मुफ्त स्वास्थ्य और अच्छी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित रही तो भाजपा उसे लगातार छद्म राष्ट्रवाद, पाकिस्तान, शाहीन बाग और टुकड़े-टुकड़े गैंग की पिच पर खेलने के लिए धकेलती रही। लेकिन अरविंद केजरीवाल, जो अनुच्छेद 370 के मसले पर भाजपा का समर्थन कर चुके थे, वह भाजपा की पिच पर खेलने को तैयार नहीं हुए और अंततः भाजपा चारों खाने चित्त रही।

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अजब बात यह है कि लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा केंद्र सरकार की जिन योजनाओं को गेम चेंजर बता रही थी और अपनी उपलब्धि बता रही थी उनमें उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, किसान सम्मान निधि शामिल थीं, वही भाजपा दिल्ली चुनाव आते-आते केजरीवाल के मुफ्त बिजली-पानी के सामने हांफती नजर आई। और अब जब परिणाम सामने आए तो समझ में आ रहा है कि दिल्ली की जनता को केजरीवाल की वह योजनाएं मन को भा गईं, जिन्हें भाजपा के नेता मुफ्तखोरी बता रहे थे और इन योजनाओं की लाभार्थी दिल्ली की दो करोड़ जनता को परोक्ष रूप से आलसी, लालची घोषित कर रहे थे।

केजरीवाल बार-बार कहते रहे कि वह अपने काम पर वोट मांगेंग - फोटो : Twitter
जनता ने समझाई विकास की परिभाषा 
दिल्ली की जनता ने भाजपा को विकास की असली परिभाषा समझाई है। दिल्ली ने बता दिया है कि विकास का अर्थ गगनचुम्बी मल्टीप्लेक्स और कुछ सौ उद्योगपतियों की आमदनी बढ़ना नहीं है, बल्कि विकास का सही अर्थ है आम आदमी की क्रय शक्ति में इजाफा हो। और मुफ्त बिजली व मुफ्त पानी ने दिल्ली के आम बाशिन्दे की जिन्दगी को सीधे प्रभावित किया। 

भाजपा यहां चूक कर गई, वह लोकसभा चुनाव में अपनी जीत के लिए जिन डायरेक्ट बेनिफिट योजनाओं को जीत का मंत्र बता रही थी, उसे यह अंदाज क्यों नहीं था कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने जो डायरेक्ट बेनिफिट योजनाएं चलाई हैं, वह ज्यादा काम करेंगी।

दरअसल, हो सकता है अगर भाजपा केजरीवाल की स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली पानी योजनाओं की कटु आलोचना न करती तो शायद केजरीवाल की इन योजनाओं का मुफ्त में इतना प्रचार भी न होता। लगता यही है कि भाजपा के नकारात्मक प्रचार ने आम आदमी पार्टी के लिए लाभ पहुंचाया।
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गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया। - फोटो : PTI
मुफ्त बिजली पानी के सामने भाजपा व राजग के 200 सांसद, तीन दर्जन मंत्री, आधा दर्जन मुख्यमंत्री, और प्रधानमंत्री हार गए। केजरीवाल बार-बार कहते रहे कि वह अपने काम पर वोट मांगेंगे और भाजपा काम की पिच पर खेलने को राजी नहीं थी। उसका कारण साफ था। पहले तो दिल्ली में भाजपा दो दशक से सत्ता से बाहर है और काम की पिच पर खेलने से लड़ाई कांग्रेस बनाम आप हो जाती।

भाजपा के आरोप और परेशानियां 
भाजपा लगातार कहती रही कि आप सरकार ने कोई नया स्कूल नहीं खोला और उसका शिक्षा का मॉडल झूठा है। लेकिन भाजपा नेता आम आदमी की नब्ज टटोलने में बुरी तरह विफल रहे। ठीक है कोई नया स्कूल नहीं खुला, लेकिन भाजपा शासित राज्यों में तो सरकारी स्कूल बंद किए गए और यह कहकर बंद किए गए कि उनमें पढ़ने वाले विद्यार्थी नहीं मिल रहे हैं, जबकि दिल्ली में सरकारी स्कूल गुलजार होते रहे।

निजी स्कूलों के स्तर पर भी आप सरकार की यह उपलब्धि तो है कि उसने फीस नहीं बढ़ने दी और निजी स्कूल मालिकों की लॉबी के आगे दिल्ली सरकार ने आत्मसमर्पण नहीं किया।

अरविंद केजरीवाल की राजनीति से सहमति और असहमति अपनी जगह हो सकती है, लेकिन दिल्ली की जनता ने जो जनादेश दिया है, वह एक शुभ संकेत इस मायनों में कि विकास की असली परिभाषा क्या है, जनता ने यह समझाया है।

जनता ने यह समझाया है कि पीपीपी मॉडल के नाम पर निजी क्षेत्र को बुनियादी जरूरतों सौंप देना विकास नहीं है। सवाल यह है कि क्या भारतीय जनता पार्टी विकास की इस परिभाषा को, जिसे दिल्ली की जनता ने पढ़ाया है, समझने को तैयार होगी या उसे मुफ्तखोर जनता कहकर कोसना जारी रखेगी।

दरअसल, यह समय जनता को कोसने का नहीं, अपनी कमियों की तरफ ध्यान देने का है। भाजपा की सबसे बड़ी गलती यही रही कि वह बार-बार जनता के विरुद्ध युद्ध की घोषणा करती रही और केजरीवाल ओढ़ी हुई विनम्रता से भाजपा के हर वार को जनता पर वार साबित करने में सफल रहे।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें  blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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