केजरीवाल बार-बार कहते रहे कि वह अपने काम पर वोट मांगेंग
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जनता ने समझाई विकास की परिभाषा
दिल्ली की जनता ने भाजपा को विकास की असली परिभाषा समझाई है। दिल्ली ने बता दिया है कि विकास का अर्थ गगनचुम्बी मल्टीप्लेक्स और कुछ सौ उद्योगपतियों की आमदनी बढ़ना नहीं है, बल्कि विकास का सही अर्थ है आम आदमी की क्रय शक्ति में इजाफा हो। और मुफ्त बिजली व मुफ्त पानी ने दिल्ली के आम बाशिन्दे की जिन्दगी को सीधे प्रभावित किया।
भाजपा यहां चूक कर गई, वह लोकसभा चुनाव में अपनी जीत के लिए जिन डायरेक्ट बेनिफिट योजनाओं को जीत का मंत्र बता रही थी, उसे यह अंदाज क्यों नहीं था कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल ने जो डायरेक्ट बेनिफिट योजनाएं चलाई हैं, वह ज्यादा काम करेंगी।
दरअसल, हो सकता है अगर भाजपा केजरीवाल की स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली पानी योजनाओं की कटु आलोचना न करती तो शायद केजरीवाल की इन योजनाओं का मुफ्त में इतना प्रचार भी न होता। लगता यही है कि भाजपा के नकारात्मक प्रचार ने आम आदमी पार्टी के लिए लाभ पहुंचाया।
गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया।
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मुफ्त बिजली पानी के सामने भाजपा व राजग के 200 सांसद, तीन दर्जन मंत्री, आधा दर्जन मुख्यमंत्री, और प्रधानमंत्री हार गए। केजरीवाल बार-बार कहते रहे कि वह अपने काम पर वोट मांगेंगे और भाजपा काम की पिच पर खेलने को राजी नहीं थी। उसका कारण साफ था। पहले तो दिल्ली में भाजपा दो दशक से सत्ता से बाहर है और काम की पिच पर खेलने से लड़ाई कांग्रेस बनाम आप हो जाती।
भाजपा के आरोप और परेशानियां
भाजपा लगातार कहती रही कि आप सरकार ने कोई नया स्कूल नहीं खोला और उसका शिक्षा का मॉडल झूठा है। लेकिन भाजपा नेता आम आदमी की नब्ज टटोलने में बुरी तरह विफल रहे। ठीक है कोई नया स्कूल नहीं खुला, लेकिन भाजपा शासित राज्यों में तो सरकारी स्कूल बंद किए गए और यह कहकर बंद किए गए कि उनमें पढ़ने वाले विद्यार्थी नहीं मिल रहे हैं, जबकि दिल्ली में सरकारी स्कूल गुलजार होते रहे।
निजी स्कूलों के स्तर पर भी आप सरकार की यह उपलब्धि तो है कि उसने फीस नहीं बढ़ने दी और निजी स्कूल मालिकों की लॉबी के आगे दिल्ली सरकार ने आत्मसमर्पण नहीं किया।
अरविंद केजरीवाल की राजनीति से सहमति और असहमति अपनी जगह हो सकती है, लेकिन दिल्ली की जनता ने जो जनादेश दिया है, वह एक शुभ संकेत इस मायनों में कि विकास की असली परिभाषा क्या है, जनता ने यह समझाया है।
जनता ने यह समझाया है कि पीपीपी मॉडल के नाम पर निजी क्षेत्र को बुनियादी जरूरतों सौंप देना विकास नहीं है। सवाल यह है कि क्या भारतीय जनता पार्टी विकास की इस परिभाषा को, जिसे दिल्ली की जनता ने पढ़ाया है, समझने को तैयार होगी या उसे मुफ्तखोर जनता कहकर कोसना जारी रखेगी।
दरअसल, यह समय जनता को कोसने का नहीं, अपनी कमियों की तरफ ध्यान देने का है। भाजपा की सबसे बड़ी गलती यही रही कि वह बार-बार जनता के विरुद्ध युद्ध की घोषणा करती रही और केजरीवाल ओढ़ी हुई विनम्रता से भाजपा के हर वार को जनता पर वार साबित करने में सफल रहे।
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