पैरेलल यूनीवर्स की थ्योरी
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कार्ल सैगन ने ब्रह्मांड के बारे में यही कहा था कि यह हमारे प्रति उदासीन है। इतने बड़े ब्रह्मांड में हमारा अस्तित्व कुछ भी नहीं और इससे इस कॉस्मॉस जगत को फ़र्क़ भी नहीं पड़ता। वॉयजर की तस्वीर का मैं अक्सर ज़िक्र करती हूं और कार्ल सैगन के उस भाषण का भी जिसमें वह किसी बिंदु के समान दिखाई देती धरती के लिए कहते हैं कि धर्म, राजनीति, भूगोल आदि के सब झगड़े इस एक छोटे बिंदु के लिए हैं।
पैरेलल यूनीवर्स की थ्योरी
यह बातें एक बार के लिए ज़हन को दूसरे डाइमेंशन में ले जाती हैं, पैरेलल यूनीवर्स की उस थ्योरी में जहां शायद हम जैसा कोई है जो अपने होने भर से दुनिया को बेहतर करना चाहता है लेकिन हम फिर लौटते हैं इसी थ्री डी वर्ल्ड में अपने द्वेष, गुस्से और समस्याओं के साथ अपने समूचे अस्तित्व को विस्मृत करते। भूलते जाते हैं कि एक दिखाई न देने वाले किसी पदार्थ से जुड़ा है हमारा ब्रह्मांड।
संभवत: ईश्वर ने बहुत कुछ अपने पास सुरक्षित रखा है, गॉड पार्टिकल की तरह, कुन फ़ाया कुन की तरह जिसके बारे में जानने के लिए विज्ञान की बहुत मशक्कत बाक़ी है। मनुष्य के पास तब भी एक उपाय बाक़ी है एक दूसरे को जोड़े रखने के लिए जो दिखाई तो नहीं देता लेकिन जिसके प्रभाव से बचाया जा सकता है अपना यह अस्तित्व, वह उपाय है प्रेम। मनुष्य के ह्रदय में मौजूद डार्क मैटर जिससे बंधे हुए हैं लोग ताकि पृथ्वी पर सुचारू रहे सारी व्यवस्था।
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