नंद कुमार कांग्रेस की विचारधारा मानते हैं, मूलत: कांग्रेसी ही हैं, नेहरू गांधी परिवार के भक्त हैं लेकिन कांग्रेस के सदस्य नहीं हैं।
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कौन हैं नंद कुमार बघेल? क्या है आखिर एजेंडा?
अब आपको नंद कुमार बघेल के बारे में थोड़ा बता दें। ऐसा नहीं है कि उन्होंने ब्राह्मणों को लेकर कोई पहली बार ऐसा कोई बयान दिया है। उनका पूरा चिंतन शुरु से ही ऐसा रहा है। नंद कुमार बघेल ओबीसी के एक बड़े नेता रहे हैं।
नंद कुमार कांग्रेस की विचारधारा मानते हैं, मूलत: कांग्रेसी ही हैं, नेहरू गांधी परिवार के भक्त हैं लेकिन कांग्रेस के सदस्य नहीं हैं। अपना एक एनजीओ चलाते हैं – मतदाता जागृति मंच। उन्होंने एक बहुत चर्चित किताब लिखी है – ब्राह्मणकुमार रावण को मत मारो। किताब पर अच्छा खासा विवाद हुआ। उनके खिलाफ केस मुकदमे हुए और इसे लिखने के जुर्म में उन्हें 24 दिन जेल में भी रहना पड़ा।
दुर्ग जिले के पाटन के रहने वाले नंदकुमार बघेल के मुताबिक इस किताब में बाकायदा वाल्मीकि और तुलसीदास के रामायण के संदर्भों सहित ये साबित करने की कोशिश की गई है कि राम गलत थे और रावण को मारना गलत था।
इस किताब में मनु स्मृति का भी जिक्र है और देश में ब्राह्मणवाद के वर्चस्व को बताने, समाज में भेदभाव पैदा करने और बुद्ध के दर्शन को सही ठहराने की कोशिश की गई है। ये किताब करीब तीन दशक पहले लिखी गई थी, इसपर प्रतिबंध भी लगा और बघेल बरसों से देश में अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
एक इंटरव्यू में नंद कुमार बघेल ने हंसते हंसते कहा था-
जेल अच्छी जगह है, वहां आपको कोई पकड़ने नहीं आता, बिजली पानी बिल की चिंता नहीं होती, लिखने-पढ़ने का वक्त मिलता है। अब उनके बेटे ने कुछ समय के लिए उन्हें ये वक्त दे दिया है।
भूपेश बघेल कहते हैं कि वो पिता का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन अगर उनके किसी बयान से किसी समाज को ठेस पहुंची है और वह कानून के खिलाफ है तो कार्रवाई होगी।
सवाल ये है कि आखिर नंद कुमार बघेल की गिरफ्तारी से कांग्रेस क्या संदेश देना चाहती है? क्या इस कदम से यूपी या उत्तराखंड के ब्राह्मण उसके साथ आ जाएंगे? क्या भूपेश बघेल यूपी में कांग्रेस के चुनाव कैंपेन के स्टार प्रचारक हो सकते हैं? क्या इस कदम को चंद ब्राह्मण संगठनों के विरोध को शांत करने की रणनीति मानी जाए? क्या कांग्रेस अब भी समाजवादी पार्टी से गठबंधन की आस लगाए बैठी है?
फिलहाल यूपी पर सबकी नज़र है। सियासी पारा आसमान पर है। मायावती ब्राह्मण सम्मेलन कर रही हैं, अखिलेश यादव भी ब्राह्मणों को लुभाने में लगे हैं। भाजपा अपने नाराज़ ब्राह्मण वोटरों को राम मंदिर के नाम पर साथ लाने की कोशिश में लगी है।
कांग्रेस बेशक हाशिए पर पड़ी दिख रही हो, लेकिन भीतर ही भीतर उसने अपनी तैयारियां तेज़ कर रखी हैं। ऐसे में कोई भी रणनीतिक भूल उसके लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती है। नंद कुमार बघेल की गिरफ्तारी से एक संदेश देने की कोशिश तो जरूर है, लेकिन ये कदम कितना फायदेमंद होगा, देखने वाली बात होगी।
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