डिजिटल बैंकिंग से ग्रामीण भारत को फायदा मिलेगा।
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बजट और भविष्य की रूपरेखा
केंद्रीय बजट प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों रूप में विकासोन्मुख है। बुनियादी ढांचे के विकास के लिए पूंजीगत व्यय में 35 प्रतिशत की वृद्धि और स्थानीय कंपनियों के लिए 65 प्रतिशत रक्षा पूंजीगत व्यय, स्टार्टअप के लिए कर प्रोत्साहन और पीएम गति शक्ति से बैंकिंग क्षेत्र को लाभ होगा।
सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड लाने से बैंकिंग क्षेत्र को भी मदद मिलेगी। इस नए विचार में सरकार हरित परियोजनाओं के लिए ऐसे निर्दिष्ट बांडों के माध्यम से उधार लेगी। ईसीएलजीएस योजना का एक और साल विस्तार एमएसएमई के साथ ही बैंकिंग क्षेत्र के व्यापार को मजबूत करेगा, सरकार ने आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) को एक साल के लिए 31 मार्च, 2023 तक बढ़ा दिया है।
इसके अलावा, ईसीएलजीएस के लिए गारंटी कवर को भी 50,000 करोड़ रुपये बढ़ाकर कुल 5 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा। अतिरिक्त राशि आतिथ्य और संबंधित उद्यमों पर केंद्रित होगी।
सरकार ने अधिक कुशल और सस्ती मुद्रा प्रबंधन प्रणाली के लिए 2022-23 से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए जाने वाले ब्लॉकचेन और अन्य तकनीकों का उपयोग करते हुए डिजिटल रुपया पेश करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ, भारत अपने स्वयं के केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) जारी करने वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।
एक केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा डिजिटल रूप में आरबीआई द्वारा जारी एक कानूनी निविदा होगी। इसे सरकार द्वारा जारी नोटों के साथ आमने-सामने बदला जा सकता है।
महामारी के कारण भारत का बैंकिंग क्षेत्र बेहद मुश्किल हालात से गुजर रहा है। बैंकों को मौजूदा हालात से उबरने में 24 से 36 महीने तक का वक़्त लग सकता है।
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क्या बदलेगी भारत की तस्वीर?
डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर और फिनटेक नवाचार की शुरुआत से फिनटेक क्षेत्र को गति मिलेगी। तकनीक तय करेगी कि बैंकिंग का तरीका क्या है। इसमें विशाल डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, स्मार्ट फोन और इसी तरह के अन्य आविष्कार शामिल हैं। बैंकों के साथ ग्राहक संपर्क और लेन-देन मल्टी-वे के बजाय ऑल-वे होगा।
भारत में बड़ी संख्या में मोबाइल ग्राहक होने के कारण, वित्तीय सेवाओं के वितरण में इस तकनीक का व्यापक रूप से उपयोग किए जाने की काफी संभावनाएं हैं। इस समय देश में 90 करोड़ लोगों के पास मोबाइल फोन हैं। लेकिन सिर्फ चार करोड़ लोग ही मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं। निकट भविष्य में डिजिटल बैंकिंग अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करेगी और फिनटेक भारतीय बैंकिंग और भुगतान प्रणाली के लिए आगे का रास्ता है।
साथ ही, यह आवश्यक है कि देश में काम करने वाली भुगतान प्रणालियां अच्छी और सुरक्षित हों। केंद्रीय बैंक धोखाधड़ी की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। बावजूद इसके कार्डों में धोखाधड़ी और ऑनलाइन लेनदेन की घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही हैं।
हालांकि, डिजिटल चैनलों को सुरक्षित करने के लिए क्रेडिट, डेबिट, प्रीपेड कार्ड पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर सभी ऑनलाइन, आईवीआर, आवर्ती लेनदेन के लिए बैंकों द्वारा अतिरिक्त प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से भी स्थिति में सुधार हो सकता है।
महामारी के कारण भारत का बैंकिंग क्षेत्र बेहद मुश्किल हालात से गुजर रहा है। बैंकों को मौजूदा हालात से उबरने में 24 से 36 महीने तक का वक़्त लग सकता है। भारत में अकेला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ही ऐसा बैंक है, जो दुनिया के टॉप 50 बैंकों में आता है। उचित बजट, सही कर और नियामक नीतियाँ बैंकिंग उद्योग को तेजी से विकास पथ पर वापस ला सकती हैं।
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