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Blog: मशरूम के साथ सावधानी जरूरी, इन्हें बिना जांचे खाना ठीक नहीं

Mon, 12 Jan 2026 07:07 AM IST
नितिन गौतम करेन ह्यूजेस, अमर उजाला

सार

जहरीले व खाने लायक मशरूमों में फर्क करने का कोई आसान तरीका नहीं है। इसलिए जंगली मशरूम बगैर जांचे खाना ठीक नहीं है।
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मशरूम को लेकर सावधानी जरूरी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आपने शायद ध्यान दिया होगा कि बारिश के ठीक बाद आपके आंगन में अचानक मशरूम उग जाते हैं। मशरूम वास्तव में कवक (फंगस) का जमीन के ऊपर दिखाई देने वाला भाग होता है। अधिकतर समय कवक जमीन के नीचे या लकड़ी जैसी चीजों में धागे जैसी संरचनाओं के रूप में रहते हैं, जिन्हें हाइफा कहा जाता है। इसके कुछ पौधे जहरीले होते हैं, ताकि वे खुद को खाए जाने से बचा सकें और प्रजनन कर सकें। मशरूम इससे उलट तरीका अपनाते हैं। उन्हें जानवरों की जरूरत होती है कि वे उन्हें खाएं, ताकि वे मल के जरिये अपने बीजाणुओं को फैला सकें। मशरूम तब विकसित होते हैं, जब तापमान अनुकूल हो और पर्याप्त पानी उपलब्ध हो।
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इसमें आमतौर पर एक टोपी व डंठल होता है। टोपी के नीचे की सतह पर मशरूम बीजाणु बनाते हैं, जो पौधों के बीजों की तरह नए कवक उत्पन्न करते हैं। यदि आप अलग-अलग मशरूम की टोपी के नीचे देखेंगे, तो आप पाएंगे कि वे सभी एक जैसी नहीं हैं। कुछ मशरूम में गलफड़े व दांत जैसी संरचनाएं होती हैं। ये सभी सतही बीजाणु बनाते हैं। नई पीढ़ी के उत्थान के लिए कवक को अपने बीजाणु को नई जगह पर पहुंचाने की जरूरत होती है।
 
मशरूम इसके लिए कई तरह के दिलचस्प तरीके अपनाते हैं। कई मशरूम रात में चमककर कीड़ों को आकर्षित करते हैं। कीड़े, जो रोशनी की तरफ आकर्षित होते हैं, अनजाने में बीजाणु को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं। कुछ मशरूम ऊपर नहीं, बल्कि जमीन के नीचे रहते हैं, जिन्हें गिलहरी और चूहे खाते हैं। ये उनके टुकड़ों को अपने घोंसले में ले जाते हैं और मल के जरिये बीजाणुओं को फैलाते हैं। ऐसे मशरूमों को ट्रफल कहा जाता है। कीट और घोंघे उन मशरूमों को खाने से बचते हैं, जिनमें जहर होता है। कुछ मशरूमों का जहर खाने वाले को इतना बीमार कर देता है कि वह भविष्य में उस प्रजाति से दूर रहे, जबकि कुछ जहर जानलेवा भी हो सकते हैं।
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मशरूमों में कई तरह के जहर पाए जाते हैं। बहुत सुंदर मशरूमों के समूह में भी एक तरह का जहर होता है, जिन्हें अमानिटास कहते हैं। अमानिटास को खाने से हर साल कई मौतें होती हैं। कुछ मशरूमों का उपयोग दवाओं में भी किया जाता है। मसलन, एरगट कवक के जहर से एक ऐसी दवा विकसित की गई है, जो माइग्रेन के सिरदर्द को रोकने के लिए इस्तेमाल होती है। करीब एक से दो प्रतिशत मशरूम इन्सानों के लिए जहरीले होते हैं। जहरीले व खाने लायक मशरूमों में फर्क करने का कोई आसान तरीका नहीं है। इसलिए जंगली मशरूम बगैर जांचे खाना ठीक नहीं है। कई मशरूम पौष्टिक व स्वादिष्ट होते हैं। बस ध्यान रखें कि उन्हें किसी ऐसे व्यक्ति से लें, जो मशरूम का विशेषज्ञ हो।  - द कन्वर्सेशन से
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